अमेरिका के 50% राज्यों में बढ़ी कोरोना की रफ्तार, लेकिन ट्रंप चुनावी अभियान में मशगूल
वॉशिंगटन. कोरोना (Corona Virus) से जंग में अमेरिका का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. यहां स्थिति स्थिति सुधरने के बजाये बिगड़ती जा रही है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस पर ध्यान देने के बजाए अपनी चुनावी गोटियां बैठाने में व्यस्त हैं. अमेरिका के लगभग 50 फीसदी राज्यों में कोरोना के मामले बढ़े हैं और आने वाले दिनों में इनमें खतरनाक उछाल देखने को मिल सकता है.
अमेरिका में कुल संक्रमित मरीजों का आंकड़ा गुरुवार को दो मिलियन से पार निकल गया और मरने वालों की संख्या 114,000 से अधिक हो गई है. इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप अपने चुनावी कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं करना चाहते. वह एरिजोना, फ्लोरिडा, ओक्लाहोमा और टेक्सास (Arizona, Florida, Oklahoma,Texas) में बड़े पैमाने पर रैलियां आयोजित करने जा रहे हैं, जबकि यहां COVID-19 के मामलों में तेजी आई है.
यहां होगी पहली रैली
ट्रंप 19 जून से अपनी चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे. व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि पहली रैली ओक्लाहोमा में होगी. डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि COVID के लिए उन्हें दोषी न ठहराया जाए और उन्होंने जनता को भी यह संदेश पहुंचा दिया है. अपनी पहली रैली में वह सही साबित करने का प्रयास करेंगे कि कोरोना महामारी को संभालने के लिए वह जो कर सकते थे, उन्होंने किया. हालांकि, ये बात अलग है कि कोरोना से निपटने के लिए बनाये गए नियमों के उल्लंघन में वह खुद भी पीछे नहीं रहे. उनकी तरह ही उनके डिप्टी माइक पेंस भी कई मौकों पर बिना मास्क के नजर आ चुके हैं.
बेताबी की यह है वजह
ट्रंप हजारों समर्थकों के साथ विशाल रैलियों को संबोधित करने को लेकर उत्सुक हैं. महामारी के बीच भी चुनावी अभियान को लेकर राष्ट्रपति की बेताबी की मुख्य वजह है उनके भविष्य को लेकर सामने आ रहे आंकड़े. हालिया कुछ सर्वेक्षणों में यह पता चला है कि अमेरिकी ट्रंप सरकार से नाखुश हैं. खासतौर पर कोरोना के कहर और जॉर्ज फ्लॉयड की मौत को लेकर लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ा है. Wall Street Journal/NBC के पोल के अनुसार, 10 में से 8 अमेरिकियों को लगता है कि देश में कोरोना वायरस नियंत्रण के बाहर हो गया है. उन्होंने महामारी से निपटने के लिए सरकार को काफी कम नंबर दिया हैं.
और बुरे होंगे हाल
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के डेटा के अनुसार, इस साल 1 अक्टूबर तक कोरोना से लगभग 170,000 मौतें हो सकती हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञ संक्रमण की बढ़ती रफ़्तार का कोई विशेष कारण नहीं बता रहे हैं. हालांकि, उन्हें लगता है कि लॉकडाउन हटाना और हाल ही में विरोध प्रदर्शनों ने आग में घी डालने का काम किया है. एरिजोना जहां राष्ट्रपति ट्रंप की रैली होनी है, वह तेजी से कोरोना का एपीसेंटर बनता जा रहा है. अकेले 11 जून को ही यहां 1,150 से अधिक मौतें दर्ज की गईं और सितंबर तक यहां स्थिति काफी खराब होने की आशंका है. महामारी शुरू होने के बाद से यहां संक्रमण अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है.
वहीं, टेक्सास में, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में जबर्दस्त तेजी आई है. एरिज़ोना विश्वविद्यालय के डॉ. जो गेराल्ड ANBC को बताया कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि अस्पताल में जगह कम पड़ जाएगी. एरिज़ोना के अस्पताल पहले से ही 80 प्रतिशत क्षमता पर हैं. डॉक्टरों का कहना है कि लोग स्वास्थ्य संबंधी सलाह को मानने को तैयार नहीं हैं, लिहाजा व्हाइट हाउस को इस विषय में कुछ करना चाहिए.