अमेरिका पर वार, WHO पर प्यार: कहीं इसलिए तो तारीफों का जाल नहीं बुन रहा चीन?
बीजिंग. कोरोना (Corona Virus) महामारी को लेकर चीन (China) एक बार फिर से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के बचाव में उतर आया है. चीन ने WHO से अलग होने को लेकर अमेरिका की आलोचना की और कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस से लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है.
अगले हफ्ते आएगी टीम
जिस तरह से चीन ने एक बार फिर से WHO का बचाव करते हुए उसकी कार्यप्रणाली की तारीफ की है, उससे कई सवाल खड़े होते हैं. सबसे पहला तो यही कि क्या उसकी यह कवायद अगले हफ्ते चीन पहुंच रही WHO की टीम को प्रभावित करने के लिए है? कोरोना महामारी के संबंध में जांच के लिए WHO की एक टीम अगले हफ्ते चीन के वुहान जाएगी. जायज है चीन नहीं चाहेगा कि टीम कुछ ऐसा कहे जिससे उसकी परेशानियों में इजाफा हो, संभवतः इसलिए वह तारीफों के जाल में WHO को फंसाने की कोशिश कर रहा है.
चीन के अधीन काम करने का आरोप
गौरतलब है कि अमेरिका ने 6 जुलाई से खुद को विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग कर लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने WHO को इस बाबत अपना फैसला भेज दिया था. ट्रंप सरकार कोरोना वायरस को लेकर शुरुआत से ही चीन और WHO को निशाना बनाती आई है. ट्रंप ने आरोप लगाया था कि WHO चीन के अधीन काम काम रहा है. साथ ही अप्रैल महीने से अमेरिकी सरकार ने WHO को फंडिंग देना भी बंद कर दिया था.
ट्रंप के फैसले का घर में ही विरोध
ट्रंप सरकार ने WHO से अपनी सदस्यता (Membership) वापस लेने से संबंधित पत्र भेज दिया है. हालांकि,1984 में तय गए नियमों के तहत किसी भी देश को सदस्यता वापस लेने के साल भर बाद ही WHO से निकाला जाता है. इसके अलावा अमेरिका को WHO के सभी बकाए चुकाने होंगे. डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले का घर में ही विरोध हो रहा है. डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन (Joe Biden) ने कहा है कि यदि वह चुने जाते हैं, तो इस फैसले को तुरंत पलट देंगे.