इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ फ्रांस की कार्रवाई से बौखलाया तुर्की, Emmanuel Macron को बताया मुसीबत
अंकारा. इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ फ्रांस द्वारा उठाए जा रहे कदमों से तुर्की बौखला गया है. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) को ‘मुसीबत’ करार देते हुए कहा है कि फ्रांस जल्द ही इस मुसीबत से छुटकारा पा लेगा. एर्दोगन का दावा है कि मैक्रों के नेतृत्व में फ्रांस बहुत ही खतरनाक दौर से गुजर रहा है. इससे पहले भी तुर्की के राष्ट्रपति फ्रांस और मैक्रों के खिलाफ जगह उगलते रहे हैं.
France ने वापस बुला लिया है राजदूत
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने शुक्रवार को इस्तांबुल में जुमे की नमाज के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘मैक्रों के नेतृत्व में फ्रांस बेहद खतरनाक दौर से गुजर रहा है और मुझे उम्मीद है कि फ्रांस मैक्रों नामक ‘मुसीबत’ से जल्द छुटकारा पा लेगा’. बता दें कि एर्दोगन के फ्रांस विरोधी रुख के चलते ही फ्रांस तुर्की से अपने राजदूत को वापस बुला चुका है.
बंद होंगी कई मस्जिदें
फ्रांस और तुर्की के बीच काफी समय से विवाद चल रहा है, लेकिन पेरिस की घटना के बाद जिस तरह से इमैनुएल मैक्रों ने आतंकवाद को इस्लाम से जोड़कर बयान दिया. उससे तुर्की सहित सभी मुस्लिम देश उनके खिलाफ हो गए. हाल ही में फ्रांस ने कई मस्जिदों को बंद करने का निर्णय भी लिया है, जो तुर्की की आंखों में खटक रहा है. मालूम हो कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने उन मस्जिदों का निरीक्षण करना शुरू कर दिया है जिन पर उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथ, अलगाववाद और चरमपंथ को बढ़ावा देने का संदेह है. गृह मंत्री जेराल्ड डर्मेनिन ने इस बारे में घोषणा करते हुए कहा कि यदि मस्जिदों को आतंकवाद या अलगाववाद को बढ़ावा देते पाया गया, तो उन्हें बंद किया जा सकता है.
Nagorno-Karabakh पर भी तनातनी
अंकारा और पेरिस नागोर्नो-करबाख (Nagorno-Karabakh) संघर्ष में अपनी भूमिका को लेकर भी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. एर्दोगन का कहना है कि फ्रांस कथित रूप से अर्मेनिया का समर्थन कर रहा है और अजरबैजान के खिलाफ साजिश रच रहा है. जबकि फ्रांस ने इससे इनकार किया है. जुमे की नमाज के बाद तुर्की के राष्ट्रपति ने इस मुद्दे को लेकर भी फ्रांस पर हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘मेरे प्रिय भाई इल्हाम अलीयेव (अजरबैजान के राष्ट्रपति) ने फ्रांस को एक सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि यदि फ्रांस को अर्मेनियाई लोगों से ज्यादा प्यार है तो अपना शहर Marseille उन्हें दे दे. मैं भी यही कहना चाहता हूं’.