कत्थक जीने की कला सिखाती है: कविता

बिलासपुर. कत्थक मेरे लिए साधना है। जीवन जीने का माध्यम है और इसके जरिए मैं स्वयं को जानने का प्रयास करती हूं। यह बातें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कत्थक कलाकार कविता गुप्ता ने कही। गुरुवार को शहर की विभिन्न संस्थाओं ने होटल इंटरसिटी में उनका सम्मान किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अटल श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम से शहर की संस्कृति विकसित होती है और हमारी विरासत को नया आयाम मिलता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बिलासपुर एसपी प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि बिलासपुर की सांस्कृतिक विशेषता केवल देखी थी, लेकिन आज उसे महसूस भी किया। ऐसे आयोजन से सकारात्मकता मिलती है और नई ऊर्जा मिलती है। ऐसे आयोजन शहर में होने चाहिए। कार्यक्रम अध्यक्ष सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन संजय दुबे ने कहा कि कविता गुप्ता का सम्मान करते हुए हम खुद भी सम्मानित महसूस कर रहे  हैं। कत्थक गुरु भूपेंद्र बरेठ ने कविता की उपलब्धियों की सराहना की और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। रायगढ़ घराने के गुरु सुनील वैष्णव ने अपने शानदार उद्बोधन से कत्थक के महत्व को दर्शाया। कविता की प्रशंसा की। कार्यक्रम मे ंविशेष रूप से महापौर किशोर राय, मनीष अग्रवाल, जयेंद्र कौशिक, बेला गुप्ता, केपी गुप्ता समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। कविता चौपाटी के सदस्य नितेश पाटकर, सुमित शर्मा, श्री पांडे, समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

शहर की प्रमुख संस्थाओं ने किया सम्मानित
इस मौके पर फाउंडेशन क्रिकेट एकेडमी के प्रमुख प्रिंस भाटिया, एरीना मल्टीमीडिया के प्रमुख संदीप गुप्ता, बिलासा कला मंच से राजेंद्र मौर्य, गुजराती समाज के अध्यक्ष ललित पुजारा, सिंधि युवा विंग के अध्यक्ष विजय छुगानी, बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष तिलकराज सलूजा और सचिव विरेंद्र गहवई, एथलेटिक्स एसोसिएशन और तैराकी संघ से अमरनाथ सिंह व हेमंत परिहार ने कविता का सम्मान किया।

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