कमलनाथ के इस्तीफे के बाद BJP की सत्ता में वापसी तय
नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस्तीफे के बाद अब ये तय हो गया है कि बीजेपी एक बार फिर 15 महीने के बाद सूबे की सत्ता में वापसी करेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद बहुमत का आंकड़ा बीजेपी के पक्ष में आ गया है. इसके साथ ही बीजेपी खेमे में सबसे बड़ा सवाल ये उठने लगा है कि इस बार कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
कहा जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान के अलावा, नरोत्तम मिश्रा, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मुख्यमंत्री पद की रेस में हैं. लेकिन किसको मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, ये अभी साफ नहीं है. बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस संबंध में कहा कि बीजेपी का संसदीय बोर्ड तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा. हालांकि 13 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को बाकियों की तुलना में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है.
बहुमत का आंकड़ा
आपको बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद प्रदेश कांग्रेस के 22 विधायकों ने कांग्रेस से बागी होकर अपने त्यागपत्र दे दिए थे. इसके बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आ गई थी. मप्र असेंबली में 230 विधायकों की कुल संख्या में 2 विधायकों की आकस्मिक मृत्यु हो चुकी है और इनकी सीटों पर उपचुनाव होने हैं.
इस तरह मध्य प्रदेश विधानसभा में अब 206 विधायक ही बचे हैं. यानी बहुतम का आकंड़ा 104 है. भाजपा के पास 106 विधायक हैं, यानी बहुमत के आंकड़े से 3 ज्यादा. कांग्रेस के पास अपने 92 विधायक हैं.
असेंबली की स्थिति
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या है- 230
इनमें से 2 विधायकों के आकस्मिक निधन से संख्या है- 228
कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद संख्या है- 206
इस तरह विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा बैठता है- 104
मौजूदा आंकड़े
भाजपा – 106 विधायक, बहुमत के आंकड़े से 2 ज्यादा.
कांग्रेस – 92 विधायक, 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद.
सपा, बसपा, निर्दलीय- 07 विधायक (सपा- 2, बसपा-1, निर्दलीय- 4)
बीते 2 मार्च को शुरू हुआ था सियासी ड्रामा
मध्य प्रदेश में बीते 2 मार्च से कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल छाए थे. सबसे पहले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने 2 मार्च को ट्वीट कर भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया था. इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा नेताओं शिवराज सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा और अरविंद भदौरिया पर कमलनाथ सरकार को गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया था. लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 10 मार्च को कांग्रेस पार्टी से बगावत कर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया. 11 मार्च को सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा और उनके नक्शेकदम पर चलते हुए कांग्रेस में इस्तीफे का दौर शुरू हो गया.