कमीशनखोरी का अड्डा बना अपोलो अस्पताल, सीबीआई जांच से होंगे चौंकाने वाले तथ्य उजागर

बिलासपुर. अपोलो अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे अधिकांश गंभीर मरीजों को मौत के मुंह का आंचल ओढऩा पढ़ रहा है। रोजाना यहां उपचार में लापरवाही को लेकर हो हंगामा होना आम बात हो गई है। एसईसीएल से कमीशनखोरी करने के लिए इस अस्पताल को बिलासपुर में खोला गया है। आम लोगों का यहां उचित उपचार तो दूर, भारी भरकम रकम चुकाने में जान निकल रही है। बिना रेट लिस्ट के अस्पताल प्रबंधन आम लोगों को खुलेआम लूट रही है। निजी अस्पतालों और एसईसीएल कर्मचारियों से सांठगांठ कर उपचार के नाम अपोलो अस्पताल कमीशन खोरी करने के लिए बदनाम हो चुका है। पीडि़तों व मृतकों के परिजनों की शिकायत दर शिकायत की अगर सीबीआई जांच कराई जाये कई चौकाने वाले तथ्य उजागर होंगे। जनहित में राज्य सरकार को अपोलो अस्पताल पर ताला जडऩे की सख्त आवश्यकता है। यहां मरीजों के परिजन छाती पीट-पीट कर बिलखते रहते हैं, लाश ले जाने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं होते और कांच के कमरे में बंद अपोलो अस्पताल के आला अधिकारी रोजाना तमाशा कराते है।
बिलासपुर संभाग में अपोलो अस्पताल खोले जाने के बाद उचित उपचार की एक आस दौड़ गई थी। अपोलो अस्पताल के नाम से लोग अपने परिजनों को उपचार के लिए दौड़े-दौड़े चले आते थे। लेकिन शहर वासियों को शायद यह नहीं मालूम था अपोलो अस्पताल आम लोगों के कसाईखाना बन जाएगा। अस्पताल प्रबंधन को किसी के दर्द और मौत से कोई देना-देना नहीं रह जाएगा। कमीशनखोरी करते-करते अपोलो अस्पताल प्रबंधन किस हद गिर जाएगा आज के दौर उसे खुद नहीं मालूम। रोजाना यहां लोग नारेबाजी कर रहे हैं, शासन प्रशासन से अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं यहां तक हाईकोर्ट में भी उपचार में गंभीर लापरवाही को लेकर याचिकाएं दायर की जा रही है।
भाजपा शासन काल में तत्कालीन महापौर अशोक पिंगले के मौत के मामले में अपोलो अस्पताल प्रबंधन की जमकर किरकिरी हुई थी। उपचार में गंभीर लापरवाही के आरोप अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए थे। इसके बाद हर दूसरे-तीसरे दिन मरीजों व मृतकों के परिजन गंभीर लापवाही का आरोप लगा रहे हैं। उपचार करने वाले डॉक्टर कौन हैं इसकी जानकारी नहीं दी जाती वहीं मरीजों के परिजनों को टेस्ट के नाम पर लाखों का बिल थमा दिया जा रहा है। बिना रेट लिस्ट के लोगों को दवाईयों व उपचार के नाम पर आसानी से ठग लिया जा रहा है। मृतक के परिजनों को लाश सौंपने के एवज में भी लाखों के बिल भुगतान करने बाध्य किया जा रहा है। दूर-दराज से आये ग्रामीण मरीजों के साथ साथ उनके परिजनों से जो बर्ताव किया जा रहा है वह निंदनीय है। हाल ही में निशा सिंह की मौत होने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। सीधे तौर पर उपचार में गंभीर लापरवाही का आरोप परिजनों ने लगाया था।
अब वो दिन दूर नहीं कि अपोलो प्रबंधन को अपना बोरिया-बिस्तर समेट अस्पताल बंद कर भागना पड़े। उपचार के नाम पर दलाली खाने निजी अस्पतालों से मिलीभगत कर अपोलो अस्पताल का संचालन करने वाले प्रबंधन के आला अधिकारियों को इतना भी भय नहीं है कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती। जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को अपनी ऊंगली में नचाने वाले अपोलो अस्पताल के कर्ता-धर्ताओं को शायद यह नहीं मालूम कि ऊपर भी लोग बैठे हैं। राज्य में कांग्रेस की सरकार बन चुकी है और अपोलो अस्पताल प्रबंधन का पाप का घटा भी भरा चुका है। 15 सालों तक भाजपा शासन काल में जो कारनामे इस अस्पताल ने किए है और वर्तमान परिवेष में जो लूट खसोट का खेल खेला जा रहा है उस पर राज्य सरकार कभी भी लगाम लगा सकती है। आम लोगों को जो दर्द इस अस्पताल ने पैसे लेने के बाद भी दिया है, उचित उपचार के नाम पर जो धोखाधड़ी की गई ऐसे अनगिनत मामले हैं जो अस्पताल प्रबंधन की काली करतूतों को दर्शाता है। शहर के बुद्धिजीवियों का कहना है कि देर से ही सहीं मगर अपोलो अस्पताल प्रबंधन पर गाज गिरना संभव नजर आने लगा है।