कांग्रेस सरकार के एक साल पर मुख्यमंत्री ने जारी की छत्तीसगढ़ सेवा और जतन का एक साल पुस्तिका

एक साल पहले हुए विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ की जनता ने हमें सरकार की बागडोर संभालने का आदेश दिया। यह जनादेश तीन चौथाई से अधिक प्रचंड बहुमत के रूप में हमें मिला। हमने जनादेश के मर्म को समझते हुए, जन आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए छत्तीसगढ़ के जनमानस के हितकारी लक्ष्य तय करते हुए नये सफर की शुरूआत की। यह समय एक साल पहले की परिस्थितियां का पुनरावलोकन करने का भी है ताकि यह समझा जा सके कि हमने अपना सफर कहां से शुरू किया था। पुरखों के लम्बे संघर्ष की बदौलत जब 1 नवम्बर सन् 2000 को छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य के रूप में रेखांकित हुआ तो यहां की लगभग ढाई करोड़ आबादी को लगा था कि राज्य अब अपने पुरखों के सपनों को पूरा करने की दिशा में चल पड़ेगा, लेकिन विडम्बना है कि ऐसा हो नहीं पाया। तो सवाल उठता है कि छत्तीसगढ़ की जिंदगी के महत्वपूर्ण डेढ़ दशक कहां गये ? क्या यह नहीं माना जाए कि यह वक्त गलत प्राथमिकताओं, गलत नीतियों और गलत मंशाओं की भेंट चढ़ गया? 17 दिसम्बर 2018 को जब मैंने सरकार का कामकाज संभाला, उसके पहले प्रदेश में एक अजीब तरह की उदासी, सुस्ती, निराशा, हताशा का वातावरण था, जो अनेक भ्रम-जालों से भरा पड़ा था। प्रचण्ड जनादेश ने हमें यह जिम्मेदारी दी कि हताशा को उल्लास में बदलें और वास्तविकता के धरातल पर उतरकर विकास की अलख जगायें। हमने छत्तीसगढ़ के वर्तमान और भविष्य को लेकर ठोस योजना बनाई और विश्वास के सेतु को मजबूत किया। स्वतंत्रता संग्राम के दौर से हमारा विकास का नजरिया स्पष्ट रहा है। भारत के संविधान निर्माताओं की सोच और दृष्टि भी हमेशा हमारा पथ-प्रदर्शित करती रही है। लोकतंत्र और संविधान के प्रति अटूट आस्था से हमारा रास्ता निर्धारित हो जाता है। सामाजिक-आर्थिक नीतियों के लिए भी हमारे पास महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद जैसे गौरव स्तंभों के आदर्शों, मूल्यों और सिद्धांतों की धरोहर है। गुरू बाबा घासीदास, शहीद गैंदसिंह, शहीद वीर नारायण सिंह जैसी अनेक विभूतियों के द्वारा दी गई यथा आवश्यकता शांति और क्रांति की सीख हमारे जेहन में है। आजादी के लिए अमर शहीदों का योगदान याद रखने के साथ हमने उन चुनौतियों को भी याद रखा है, जिनमें महात्मा गांधी, गणेश शंकर विद्यार्थी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी जैसी विभूतियों की शहादत हुई। एक साल पहले हमारे सामने दो स्पष्ट चुनौतियां थीं। पहली चुनौती थी प्रचलित कुशासन पर तत्काल रोक लगाकर जनहितकारी सरकार का सपना साकार करना और दूसरी राज्य की सामाजिक-आर्थिक नीतियों को दिशा और गति देना। इस तरह हमने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों को जीवंत करते हुए आर्थिक, सांस्कृतिक विकास का छत्तीसगढ़ी मॉडल विकसित किया, जिसके केन्द्र में किसान, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और तमाम ऐसे लोग हैं, जो राज्य गठन के बाद से न्याय की बाट जोह रहे थे। हमारी ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ की परिकल्पना, ‘छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी- नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ को विकास की धुरी बनाने की ‘सुराजी गांव योजना’ और सबको न्याय दिलाने की हमारी सनातन परंपरा निरंतर संघर्षों और सतत सोच का परिणाम है।
आज पहले साल के पड़ाव पर मुझे यह कहते हुए संतोष है कि हम प्रदेश के ग्रामीणों, किसानों और अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य कमजोर तबकों को राज्य के विकास के साथ जोड़ने में सफल हुए हैं। शिक्षा से रोजगार तक, युवाओं को सर्वांगीण विकास के अवसर देने से लेकर सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाने तक हर उपाय हमने किया। चौतरफा प्रयासों के कारण ही विश्वव्यापी मंदी का असर हमारे जन-जीवन को तनिक भी नहीं छू पाया, बल्कि इस दौर में विकास के नए प्रतिमान स्थापित हुए। चाहे वह बेरोजगारी दर घटाने का विषय हो, ग्रामीण समृद्धि की ताकत से बाजारों का विश्वास जीतने का विषय हो, बीमारियों और कुपोषण से सीधी जंग का ऐलान हो या नए जमाने की जरूरतों के लिए नई तालीम की शुरूआत हो। सेहत के बुनियादी सवालों से उबरने के रास्ते निकालते हुए हमने 20 लाख रूपए तक के निःशुल्क उपचार की योजना बना ली है, ताकि धनाभाव किसी भी नागरिक की बेबसी का सबब न बन पाए और सबको यह विश्वास रहे कि उनकी हर जरूरत के पीछे एक लोकहितकारी सरकार मजबूती से खड़ी है। महिलाओं का सम्मान हो या संस्कृति का उत्थान, हर मोर्चे पर विकास के छत्तीसगढ़ी मॉडल का रंग चढ़ा। मुझे विश्वास है कि साल भर की विभागवार पहल और उपलब्धियों का यह दस्तावेज हमारे शासन-प्रशासन की पारदर्शिता के साथ जन-पक्षधरता का भी दस्तावेज सिद्ध होगा।

श्री भूपेश बघेल
मुख्यमंत्री, छग

सामान्य प्रशासन विभाग
1. राज्य सेवा परीक्षा नियम, 2008 की प्रारंभिक परीक्षा योजना एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में विभागीय अधिसूचना 13 फरवरी 2019 द्वारा संशोधन किया गया है।
2. छग के स्थानीय निवासियों को निर्धारित आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान किए जाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
3. प्रदेश में पहली बार ‘हरेली, हरतालिका तीज, विश्व आदिवासी दिवस, माता कर्मा जयंती एवं छठ पूजा’ भाईदूज, गोवर्धन पूजा के दिन सामान्य अवकाश घोषित किया गया है।
4. छग के स्थानीय निवासियों को निर्धारित आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान किए जाने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
5. कृषि तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग का नाम परिवर्तित कर ‘कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी’ किया गया है।
6. बस्तर तथा सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों के विभिन्न विभागों में जिला संवर्ग की तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों में उद्भूत रिक्तियों पर भर्ती हेतु केवल जिले के स्थानीय निवासी ही पात्र होंगे। इसकी अवधि 31 दिसम्बर 2021 तक निर्धारित है तथा इसका विस्तार कोरबा जिले के निवासियों के लिए भी किया गया है।
7. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के समग्र विकास हेतु ‘बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण’, ‘सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण’ एवं आदिवासी बहुल मध्य क्षेत्र (रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर संभाग) के क्षेत्रीय विकास एवं अंचल के निवासी विशेषकर अनुसूचित जनजातियों के कल्याण एवं सर्वांगीण विकास हेतु ‘मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण’ का गठन किया गया है।
8. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों के परिवार में शिशु के जन्म के उपरांत उसके पिता की जाति के आधार पर शिशु का जाति प्रमाण पत्र भी निर्धारित प्रारूप में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया जा रहा है। इस तरह जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है।  
कर्मचारी कल्याण
1. छग शासन के कर्मचारियों अधिकारियों की मांग के अनुरूप समय पर महंगाई भत्ता दिया जा रहा है।
2. सातवें वेतनमान के एरियर्स की द्वितीय किश्त के भुगतान का आदेश जारी किया गया।
3. आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक रिस्पांस।
4. आपदा से निपटने वाले डीआरएफ जवानों को 50 प्रतिशत का जोखिम भत्ता।
5. अनिवार्य सेवानिवृत्ति के दुरूपयोग के मामलों की पुनः समीक्षा।
6. आवास सुविधा देने के लिये हर संभाग में एक आवास गृह बनाने का निर्णय लिया गया।
चिटफंड कम्पनी से प्रभावितों को राहत
1. चिटफंड कम्पनी में काम करने वाले स्थानीय युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरणों की जांच कमेटी के माध्यम से कराकर निवेशकों की राशि वापस करने हेतु पहल की गई। लोढ़ा कमीशन का लाभ दिलाने विकासखण्ड स्तर पर निःशुल्क सहायता शिविर आयोजित गया।
2.अब तक सैकड़ों निवेशकों का पैसा वापस किया गया।
विभाग
1. कार्मिक संपदा (ई-कर्मचारी) सॉफ्टवेयर :- ई-कर्मचारी सॉफ्टवेयर में शासकीय सेवकों की जानकारियों को समय के अनुरूप अद्यतन करने के उद्देश्य से ई-कर्मचारी सॉफ्टवेयर को संशोधित कर कार्मिक संपदा (ई-कर्मचारी) मॉड्यूल तैयार किया गया है। कार्मिक संपदा (ई-कर्मचारी) सॉफ्टवेयर को छत्तीसगढ़ राज्य में समस्त शासकीय सेवकों के लिए प्रारंभ किया जाएगा।
2. प्रदेश के कृषकों के समग्र विकास के लिये राज्य शासन ने अल्पकालीन कृषि ऋण माफी योजना-2018 एवं सार्वजनिक क्षेत्र के व्यावसायिक बैंकों से लिये गये अल्पकालीन कृषि ऋण हेतु माफी योजना-2019 जारी किया है।
3. अल्पकालीन कृषि ऋण माफी योजना-2018 के अंतर्गत छŸासगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक को 701.11 करोड़ रुपए की अदायगी की जा चुकी है, जिससे 1.79 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के व्यावसायिक बैंकों को 899.21 करोड़ रु. की अदायगी की जा चुकी है जिससे 2.17 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।
4. सहकारिता विभाग द्वारा 13.46 लाख किसानों के 45 सौ करोड़ रूपए के कृषि ऋणों की माफी की गई है।
5. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा में विस्तार – छत्तीसगढ़ शासन के वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में विशेष प्रयास से सर्वाधिक नक्सल प्रभावित 8 जिलों में पिछले चार वर्ष में 138 नई बैंक शाखाएं खोली गइंर्, जिससे इन क्षेत्रों में पिछले चार वर्षों में बैंक शाखाओं की संख्या 338 से बढ़कर 467 हो गई, जो कि 41 प्रतिशत की वृद्धि है।
6. पहले एटीएम की संख्या 222 थी, जो बढ़कर 382 हो गई है। इस प्रकार बैंक ब्रांच एवं एटीएम दोनों की कुल संख्या 560 से बढ़कर अब 849 हो गई है, जो कि 52 प्रतिशत वृद्धि है।
7. बैंकों की नई शाखा खोलने राज्य शासन ने दूरस्थ क्षेत्रों में भवन की सुविधा एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की है।
ऊर्जा विभाग
1. मार्च 2019 से राज्य के उपभोक्ताओं का 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ किया गया है। बिजली खपत पर प्रति यूनिट 2.30 रु. देय, इससे पहले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 4.30 रूपए देने पड़ते थे।
2. बिजली बिल हाफ होने से घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को प्रति वर्ष 940 करोड़ रु. की सौगात मिलने लगी है।
3. 19.78 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली की सुविधा एवं बिजली बिल हॉॅफ होने से 33.89 लाख उपभोक्ता लाभान्वित हुए।
4. राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं को अन्य प्रदेशों की तुलना में कम दरों पर विद्युत आपूर्ति की जा रही है।
5. उपभोक्ताओं को लगातार बिजली मुहैया कराने के साथ छग देश का बिना पावर कट वाला राज्य बन गया है।
6. प्रदेश की विद्युत अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में नये उपकेन्द्रों एवं लाइनों का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ऊर्जा प्रवाह योजना अंतर्गत विद्युतीकरण कार्य को गति दी जा रही है।
7. प्रदेश में 316 नए उपकेन्द्र बनाने का काम तेजी से पूरा करने का निर्णय लिया गया था, जिसमें से 294 उपकेन्द्रों का काम पूरा हो चुका है। पुराने उपकेन्द्रों में 254 नए ट्रांसफार्मर लगाने के साथ क्षमता बढ़ाई गई है। बिजली की ट्रांसमिशन क्षमता शुरुआती 6 माह में ही 5 प्रतिशत से बढ़कर 7 हजार 790 एम.वी.ए. हो गई है, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है।
8. सरगुजा में छत्तीसगढ़ की बिजली पहुंचाने और गरियाबंद में कनेक्टिविटी की समस्या हल करने के लिए आधुनिक स्तर पर इंतजाम किए गए हैं, जिसका इंतजार बरसों से था।
9. 5.26 लाख किसानों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
10. अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के किसानों को तो पूरी खपत पर बिजली बिल से छूट दी गई है।
11. ऊर्जा विभाग के अन्तर्गत क्रेडा के माध्यम से प्रदेश के किसानों को खेती में आत्मनिर्भर बनाने सौर सुजला योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है इससे 56317 किसानों के यहां सोलर पम्पों की स्थापना की गई हैं।
12. सौभाग्य योजना के माध्यम से प्रदेश के 42105 अविद्युतीकृत घरों को सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युतीकृत किया गया है।
13. दूरस्थ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थित 462 पुलिस थानों/बेस कैम्पों को सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत किया गया है। प्रदेश के 1686 आदिवासी छात्रावास सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत हैं। सौर संयंत्र इन बच्चों के शैक्षणिक विकास में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। दूरदराज के 1189 सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सौर ऊर्जा प्रणाली से विद्युतीकृत किया गया हैं। इसमें वहां के वैक्सीन रेफ्रीजरेटर भी संचालित किये जा रहे हैं। इन संयंत्रों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में सहायता मिली हैं।
14. अब प्रदेश के 57597 से अधिक परिवार बायोगैस से खाना बनाते हैं एवं खेतों के लिये बहुमूल्य खाद प्राप्त कर रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजनान्तर्गत राज्य के विभिन्न जिलों में पेयजल प्रदाय हेतु लगभग 11415 सोलर पम्पों की स्थापना की जा चुकी हैं।
15. केन्द्रीयकृत कॉल सेंटर की स्थापना होने और टोल फ्री टेलीफोन नंबर-1912 जारी होने के बाद उपभोक्ताओं को सहूलियतें मिलने लगी हैं।
खनिज विभाग
1. नई खनन नीति – छ.ग. जिला खनिज संस्थान न्यास नियम के क्रियान्वयन हेतु खनन क्षेत्रों में प्रभावित क्षेत्रों एवं व्यक्तियों के हित लाभ के लिए नियम में संशोधन किया गया है।
2. ‘डीएमएफ’ के सही उपयोग हेतु नई गाइड लाइन जारी की गई है। अब ‘डीएमएफ’ की शासी परिषद में जिला कलेक्टर के स्थान पर प्रभारी मंत्री अध्यक्ष तथा विधायकगण सदस्य होंगे।
3. प्रभारी मंत्री को शासी परिषद का पदेन अध्यक्ष एवं जिले के सभी विधायकों को पदेन सदस्य नियुक्त किया गया है। प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों की ग्रामसभा में कम से कम 10 सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
4. खनन प्रभावित क्षेत्र/व्यक्तियों के हित के उद्देश्य से न्यास निधि में प्राप्त 50 प्रतिशत राशि प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग की जाएगी।
5. न्यास निधि से लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों की पहचान, प्रभावित क्षेत्र/निवासियों की आवश्यकता के अनुरूप 5 वर्षीय विजन डाक्यूमेंट तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
6. सतत् जीविकोपार्जन, सार्वजनिक परिवहन, सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण, युवा गतिविधियों को प्रोत्साहन हेतु नये सेक्टरों को शामिल किया गया है।
7. सौर ऊर्जा आधारित परियोजना, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का उन्नयन, प्रभावित परिवारों के सदस्यों को उच्च शिक्षा हेतु शासकीय संस्थाओं में शैक्षणिक शुल्क/छात्रावास शुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। कृषि की उन्नत तकनीकों को प्रोत्साहन देना एवं खनन प्रभावित वन अधिकार पट्टाधारियों के जीवन स्तर में सुधार एवं जीविकोपार्जन के उपाय आदि को शामिल किया गया है।
8. वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिला खनिज संस्थान न्यास ;क्डथ्द्ध मद में 1233.65 करोड़ रु. का अंशदान प्राप्त हुआ है।
9. इस राशि का उपयोग खनन प्रभावित अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, रोजगार, जीवनस्तर उन्नयन, सुपोषण आदि जनोपयोगी कार्यों के लिए होगा तथा व्यय होने वाली राशि का सोशल आडिट किया जाएगा।
10. ‘‘खनिज‘‘ राज्य के राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत है। खनिज राजस्व के रूप में राज्य शासन को वित्तीय वर्ष 2018-19 में 6110 करोड़ 25 लाख रु. का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ था। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 6500 करोड़ रूपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है।
11. विभागीय क्रियाकलापों में और अधिक दक्षता एवं पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से प्रदेश में खान एवं खनिजों के समग्र प्रबंधन हेतु एक वेब-आधारित योजना ‘‘खनिज ऑन लाइन’’ लागू की गई है। उक्त योजना में सिंगल पाईंट पेमेंट सहित पट्टाधारी/ अनुज्ञप्तिधारी द्वारा अपने स्थान से स्वतः ई-ट्रांजिट पास निकालने की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त योजना अंतर्गत ई-जियोलॉजिक मॉडलिंग, ऑनलाइन एप्लिकेशन एण्ड रिटर्नस, ई-चेक पोस्ट एवं ई-वेब्रिज विषयक समस्त कार्यवाही का प्रावधान है। एन्ड-टू-एन्ड ट्रेकिंग के उद्देश्य से विकसित उक्त कम्प्यूटराईजेशन योजना के माध्यम से प्रदेश में खनन् कार्य अन्तर्गत शासकीय एवं निजी संस्थायें सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं।
12. खनिज संसाधनों का अधिक पारदर्शिता के साथ आबंटन किये जाने हेतु खनिज रियायतों को ई-नीलामी के माध्यम से आबंटित किया जा रहा है। राज्य में वित्तीय वर्ष 2019-20 में ई-ऑक्शन हेतु 7 बाक्साइट एवं 3 चूनापत्थर ब्लॉक्स चिन्हांकित किये गये हैं। मुख्य खनिजों की तर्ज पर गौण खनिज खानों का भी आबंटन ई-टेण्डर/नीलामी के माध्यम से किया जा रहा है।
13. राष्ट्र की अर्थव्यवस्था एवं औद्योगिक विकास में खनिजों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों का लगातार अन्वेषण एवं विकास कर खनिजों के नये भण्डार आंकलित किये जा रहे हैं, जिससे राज्य के राजस्व में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है।
14. भारत सरकार, खान मंत्रालय के निर्देशानुसार गौण खनिजों के बेहतर तथा वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा देने स्टार रेटिंग बिंदु तैयार किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में नवीन 31 गौण खनिजों एवं अन्य सभी गौण खनिजों के 4 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले खदानों में स्टार रेटिंग प्रणाली लागू किये जाने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त 27 जिलों में गौण खनिज से संबंधित पट्टेधारियों को कार्यशाला के माध्यम से स्टार रेटिंग प्रणाली में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा।
15. छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जिला बस्तर एवं दक्षिण बस्तर में अनुसूचित जनजाति के परिवारों को आर्थिक रूप से सम्पन्न करने हेतु उनके द्वारा संग्रहण किये गए टिन अयस्क को क्रय किया जा रहा है, जिससे 215 से अधिक अनुसूचित जनजाति समुदाय के परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इस व्यवसाय के माध्यम से इस वर्ष अप्रैल-2019 से सितम्बर-2019 तक 27,60,840 रुपये का भुगतान संग्राहकों को किया गया है, जिससे औसत प्रतिदिन राशि 17,698 रुपये का वितरण संग्राहकों को किया गया।
16. छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जिला सरगुजा में खनिज बाक्साइट का खनन् एवं विपणन का कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में सी.एम.डी.सी. को रू. 9.79 करोड़ तथा राज्य शासन को रायल्टी एवं अन्य वैधानिक दायित्व के रूप में 4.91 करोड़ रु. की प्राप्ति हुई है। इस विŸाय वर्ष 2019-20 में 2 अन्य बाक्साइट खदानों से खनन एवं विपणन  कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
17. खनन व्यवसाय से जुड़े लोगों को आई.टी. के उपयोग को सुगमता ;म्ेंम वि क्वपदह ठनेपदमेद्ध, पारदर्शिता और विश्वसनीयता लाने के लिए चिप्स द्वारा वेब आधारित ‘छत्तीसगढ़ इंटीग्रेटेड माइन्स एण्ड मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम ;ब्भ्पडडैद्ध खनिज ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है, जिससे रायल्टी प्राप्त कराने में तेजी आयी है। अभी तक करीब 1,615 करोड़ रु. रायल्टी, डीएमएफ, एनएमडीसी से प्राप्त हो चुकी हैं और 9.5 लाख से अधिक ई-ट्रांजिट पास सिस्टम के द्वारा जारी किया जा चुका है।
18. पोर्टल से 2074 खनिज पट्टाधारियों का पंजीयन किया गया है, जिसमें से 96 सिस्टम में ऑनबोर्ड होकर कार्य कर रहे है।
19. छग मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जिला बस्तर कांकेर तहसील-भानुप्रतापपुर में स्थित आरीडोंगरी लौह अयस्क परियोजना का संचालन इस विŸाय वर्ष 2019-20 में प्रारंभ कर दिया जाएगा जिससे सी.एम.डी.सी. एवं राज्य शासन को लगभग 5 करोड़ रूपए राजस्व की प्राप्ति इस वर्ष में होने की संभावना है तथा कालांतर में इस खदान से सी.एम.डी.सी. एवं राज्य शासन को लगभग 40 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष राजस्व की प्राप्ति होने की संभावना है।
जनसंपर्क विभाग
1. छग के वरिष्ठ पत्रकारों के लिए सम्मान निधि योजना – राज्य के जो श्रमजीवी पत्रकार अधिवार्षिकी आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत होते हैं उन्हें 60 वर्ष की आयु से आजीवन 10 हजार रूपए प्रति माह सम्मान निधि प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
2. लोकवाणी कार्यक्रम – प्रत्येक माह के हर दूसरे रविवार को आकाशवाणी के माध्यम से सुबह 10ः45 बजे से 11ः05 बजे तक छŸासगढ़ के आकाशवाणी के सभी केंन्द्रों, एफ.एम. रेडियो तथा टी.वी. चैनलों पर ‘‘लोकवाणी’’ का कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री न सिर्फ सरकार की नई पहल की जानकारी देते हैं बल्कि वे प्रदेश के नागरिकों की बातें सुनते हैं, उनसे प्राप्त सुझावों को भी अपनाते हैं।
3. छग जनमन – जनसम्पर्क विभाग द्वारा प्रत्येक माह शासन द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों, पहल एवं विभागीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के नागरिकों को मिल रहे लाभ और जीवन में आए बदलाव आदि पर केन्द्रित पत्रकारों एवं आमजनों के विचारों को प्रकाशित कर जन-जन तक पहुंचाया जाता है।
4. छत्तीसगढ़ समाचार मीडिया प्रतिनिधि अधिमान्यता नियम 2019 – इस नियम को राज्य में समाचार मीडिया प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों को अधिमान्यता प्रदान करने के लिए लागू किया गया है। पत्रकार, फोटोग्राफर, कैमरामेन जो आकाशवाणी, दूरदर्शन, टी.वी. समाचार चैनल, समाचार बेव पोर्टल में सेवारत हों, उन्हें अधिमान्यता प्रदान की जाती है।
5. पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित, कानून के प्रारूप पर पत्रकारों तथा जनसामान्य से संभाग स्तरीय चर्चा के पश्चात प्रारूप को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।
6. पत्रकारों को स्वयं या उनके आश्रित परिवार के सदस्यों की बीमारियों के इलाज हेतु दी जाने वाली न्यूनतम राशि 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रु. और अधिकतम 50 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रु. कर दी गई है।
7. सोशल मीडिया पर ‘‘फेक न्यूज’’ की मॉनीटिरिंग हेतु राज्य स्तरीय विशेष मॉनीटिरिंग सेल का गठन किया गया है।


इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
1. लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत चॉइस परियोजना के माध्यम से आम लोगों की जरूरतों, समस्याओं का शीघ्र निराकरण करने हेतु 126 प्रकार की जनोपयोगी शासकीय सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
2. विगत छह माह में लगभग ग्यारह लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हो चुके हैं। कुल प्राप्त आवेदनों में से 98 प्रतिशत आवेदनों का तय समय सीमा में निराकरण किया जा चुका है। वर्तमान में एक माह में औसतन दो लाख नागरिकों को लाभ मिल रहा है।
3. राज्य में लगभग 17 हजार सामान्य सेवा केन्द्रों द्वारा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत सेवा प्रदान की जा रही है। अनेक शासकीय सेवाएं जैसे-प्रमाण पत्र-आय, जाति, मूल निवास, जन्म-मृत्यु, गुमास्ता लाइसेंस, खाद्य विक्रेता, राशनकार्ड, विभिन्न पेंशन योजनाएं वृद्धावस्था, विधवा पेंशन आवेदन और अनेक व्यावसायिक जनोपयोगी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नये अवसर पैदा हो रहे हैं। विगत 10 माह में लगभग 16 लाख नागरिकों ने योजना द्वारा संचालित विभिन्न सेवाओं का लाभ प्र्राप्त किया है।
4. माह जून 2018 से दिसम्बर 2018 तक 995 बैंक-मित्र बने, वहीं जनवरी 2019 से अब तक 2200 बैंक-मित्र बन गये हैं। नये सामान्य सेवा केन्द्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। इस अवधि में 14 लाख से अधिक नये मतदाता फोटो पत्र प्रिन्ट किये गये। साथ ही अब तक 11 लाख से अधिक मजदूरों का पंजीयन कर बीमा किया गया।
5. भौगोलिक सूचना प्रणाली परियोजना –
6. शासन द्वारा 70 लेयर्स पर समस्त ग्रामों की भौगोलिक सूचना प्रणाली तैयार की गई है, जिसमें मुख्यतः भू-अभिलेख नक्शा, सड़क मार्ग, भूमि के उपयोग, भूमि की जल निकासी, मिट्टी की किस्म, वन, जल संग्रहण, खनिज, सामाजिक, सांस्कृतिक, जनसंख्या आदि के संबंध में डेटा का संग्रहण किया गया है।
7. योजना अंतर्गत निर्वाचन आयोग, भारत सरकार के लिए लोकसभा चुनाव 2019 में नागरिक सुविधा एवं चुनाव संबंधी जानकारी वास्तविक समय पर प्रदान करने के लिए ‘सी-टाप्स’ मोबाइल एप बनाया गया। इस हेतु चुनाव में लगे समस्त अधिकारियों/कर्मियों के मोबाइल का जियो-टैगिंग किया गया। मतदान स्थल में अक्षांश एवं देशांश की जानकारी फोटो सहित ‘सी-टाप्स’ एप पर भेजी गयी। फलस्वरूप उच्च अधिकारी सतत् ग्राउंड अधिकारियों के सम्पर्क में रहे और वोटिंग प्रतिशत की जानकारी प्रत्येक 2 घंटे में मिलती रही। उच्च अधिकारियों को ग्राउंड अधिकारियों की वास्तविक स्थिति प्राप्त होते रहने से उनकी सुरक्षा भी मजबूत हुई। आम-नागरिकों को क्यू स्टेटस (कतार में खडे़ मतदाताओं की जानकारी) ‘सी-टाप्स’ एप द्वारा मिली और उनके बहुमूल्य समय की बचत हुई तथा नागरिक भीड़ देखकर अपनी सुविधा अनुसार मतदान कर सके।
8. कोर इनक्यूबेटर-कम-एक्सीलरेटर ;36प्दअद्ध सेंटर –
9. छग सरकार की नवाचार और उद्यमिता नीति अंतर्गत चिप्स द्वारा प्रथम इनक्यूबेटर-कम- एक्सीलरेटर 36प्दअ स्थापित किया गया है, जहां नवीन उद्यमियों को इन्टरनेट की सुविधा के साथ-साथ कार्य स्थल तथा मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
10. इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक 36प्दअ में कृषि क्षेत्र के उद्यमियों की संख्या में तीव्र वृद्धि हुई है। विगत छह माह में 12 नये स्टार्ट-अप्स ने कृषि क्षेत्र में नवाचार प्रारम्भ किया है, जबकि इससे पूर्व एक वर्ष में मात्र 3 स्टार्ट-अप्स कृषि क्षेत्र में नवाचार कर रहे थे। राज्य के इस इनक्यूबेटर-कम- एक्सीलरेटर ;36प्दअद्ध सेंटर में देश के सभी केन्द्रों से अधिक स्टार्टअप्स हैं।
11. ग्रामीण क्षेत्र में स्टार्टअप विकसित करने के लिए 36प्दअ में सामाजिक उद्यमियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम 24 जून 2019 को सम्पन्न हुआ। राज्य के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अमेरिका सरकार द्वारा मान्यता दी गयी और समारोह में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से पीसटेक लैब के प्रमुख द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 10 स्टार्ट-अप्स को सम्मानित किया गया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
1. माननीय मुख्यमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2019 स्वतंत्रता दिवस को ‘‘गरीबी से आजादी‘‘ का आह्वान करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और उसे नया जीवन देने के लिए प्रदेश में ‘‘नरवा, गरवा, घुरवा और बारी‘‘ योजना की शुरूआत की गई।
2. गोठान दिवस का आयोजन – मुख्यमंत्री ने गोवर्धन पूजा को गोठान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
3. प्रत्येक गौठान के सुचारू संचालन के लिए एक गोठान समिति का गठन किया जा रहा है। इस समिति में ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिव के अलावा चरवाहें भी अन्य सदस्यों के साथ शामिल रहेंगे।
4. गोठानों से संबंधित गोधन से उत्सर्जित पदार्थों जैसे- गौमूत्र एवं गोबर से दैनिक उपयोग की वस्तुओं के अलावा प्राकृतिक कीटनाशक एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद निर्माण राज्य आजिविका मिशन ‘‘बिहान‘‘ के स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। चारागाह प्रबंधन का कार्य भी ‘‘बिहान‘‘ स्व-सहायता समूहों के योगदान से संपन्न होगा।
5. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ‘‘नरवा, गरवा, घुरवा एवं बारी कार्यक्रम‘‘ को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से अब तक 1874 गोठान निर्माण एवं 1560 चारागाह विकास कार्य स्वीकृत किये गये हैं।
6. ‘नरवा’ विकास के लिए 1 हजार 28 नालों का चयन किया गया है।
7. एक लाख 34 हजार से अधिक ‘बाड़ियों’ का सर्वेक्षण किया जा चुका है।
8. जल संसाधन विकास की नियमित प्रक्रिया से भी लगभग 1 हजार करोड़ रूपए लागत की 223 योजनाओं की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। ‘गरवा’ यानी पशुधन की समृद्धि और योगदान के लिए हर ग्राम पंचायत में 3 से 5 एकड़ अविवादित जमीन गौठान के लिए सुरक्षित रखा गया है।
9. गोठान परिसरां में एक हजार 560 चारागाहों के काम स्वीकृत किए गए हैं।
10. गोठान समितियों को प्रतिमाह 10 हजार रूपए की सहायता दी जाएगी, जिससे गौठान में काम करने वाले चरवाहों को मानदेय देने सहित अन्य इंतजाम किए जाएंगे।’
11. वर्तमान में 2 लाख 25 हजार 559 महिला किसानों के घरों में बाड़ियां विकसित की जा चुकी हैं, जिनमें सब्जी, भाजी आदि पौष्टिक पदार्थ का उत्पादन, विक्रय एवं सेवन किया जा रहा है।
12. बायो गैस प्लांट तथा कम्पोस्ट इकाइयां लगाने की तैयारी शुरू की गई है।
13. हर गांव के 10 युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
14. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत इस वित्तीय वर्ष में 13 करोड़ के मानव दिवस रोजगार सृजित किया जाने का लक्ष्य रखा गया है। माह जुलाई तक 6.43 करोड़ मानव दिवस रोजगार ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध कराया जा चुका है।
15. मनरेगा अंतर्गत दिव्यांगों को रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश में छटवें स्थान पर है। वर्ष 2019-20 के पहले 8 महीनें अप्रैल से नवम्बर 2019 तक 22966 दिव्यांगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
16. प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2016 से अब तक 7,22,000 आवासों को पूर्ण किया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा जारी वर्ष 2016-19 तक के ‘‘कार्य निष्पादन सूचकांक‘‘ के आधार पर देश में छत्तीसगढ़ द्वितीय स्थान पर है।
17. प्रधानमंत्री आवास योजना में परिवार, जिनका नाम स्थायी प्रतीक्षा सूची में किन्हीं कारणों से छूट गया था, ऐसे सभी छूटे हुए पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने हेतु कार्यवाही की जा रही हैं।  
18. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान‘‘ के अन्तर्गत इस वर्ष प्रदेश के समस्त विकासखण्ड योजना में शामिल कर लिये गये हैं। विभिन्न पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों, मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों को बैंकिग सेवाओं की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने हेतु प्रत्येक 5 पंचायत के मध्य 1 ‘बीसी सखी’ की स्थापना की जा रही है। अब तक 751 ‘बीसी सखी’ की स्थापना की जा चुकी है। इस वर्ष 45 हजार 510 महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों हेतु 483 करोड़ रु.बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाना लक्षित है। माह अक्टूबर तक कुल 32 हजार 570 समूहों के 601.33 करोड़ रु. के ऋण प्रकरण बैंकों में जमा किए गए हैं, जिसमें से 16 हजार 474 समूहों को 273.02 करोड़ रु. के प्रकरण स्वीकृत कराए जा चुके हैं।
19. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत वर्ष 2019 में माह अक्टूबर तक कुल 7998 ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाकर 5673 युवाओं को संगठित क्षेत्र में रोजगार दिलाया जा चुका है।
20. स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण – कार्यक्रम अंतर्गत पूरे प्रदेश में कुल 33,23,585 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। छूटे हुए 1,74,200 परिवारों को इस वर्ष सम्मिलित किया गया है, जिनके घरों में शौचालय निर्मित किये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में कार्य प्रारंभ हो चुका है तथा गोबरधन योजनांतर्गत 1176 बायोगैस संयत्र की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
21. दिव्यांगजन एवं तृतीय लिंग व्यक्तियों हेतु प्रदेश के 10 जिलों की 100 ग्राम पंचायतों में पॉयलेट प्रोजेक्ट चलाया जायेगा, जिसमें सामुदायिक एवं व्यक्तिगत शौचालयों को इनके लिए सुगम्य बनाया जायेगा। ग्रामीण महिलाओं को मासिक स्वच्छता के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
22. 22 जून 2019 को विशेष ग्रामसभा का आयोजन पूरे प्रदेश में किया गया, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्णतः प्लास्टिक प्रतिबंध का प्रावधान ग्रामसभा में किया गया है। स्वच्छता में उत्कृष्ट कार्य हेतु वित्तीय वर्ष 2019-20 में 45.19 करोड़ की परफॉरमेंस ग्रांट छत्तीसगढ़ राज्य को प्राप्त हुई हैं।  
23. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत अब तक 31857 कि.मी. लंबाई की 6959 सड़कें एवं 221 वृहद पुल का निर्माण किया जा चुका है। निर्मित सड़कों से राज्य की 9742 पात्र बसाहटें जुड़ चुकी हैं।
24. योजनाओं के द्वितीय फेस के कार्यां के लिए प्रदेश की उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ राज्य को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में निर्मित सड़कों के संधारण/नवीनीकरण हेतु राशि 400 करोड़ रु.का बजट प्रावधान किया गया है।
25. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना अंतर्गत शत् प्रतिशत राज्य पोषित मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के माध्यम से प्रदेश में 1985 सड़कों द्वारा 3909 कि.मी. पक्के डामरीकृत मार्गां का निर्माण किया जा चुका है। इस वित्तीय वर्ष में रु. 290 करोड़ रूपए के व्यय से 630 कि.मी. सड़कों का निर्माण किया जायेगा।
26. जिला जांजगीर-चांपा के ग्राम रैनखोल दुर्गम पहाड़ी इलाके को पहली बार पक्की सड़क मार्ग से जोड़ा गया, जिससे जन सामान्य को बारहमासी आवागमन की सुविधा प्राप्त हुई।
27. मुख्यमंत्री ग्राम गौरवपथ योजना – मुख्यमंत्री ग्राम गौरवपथ योजना के माध्यम से प्रदेश में 6776 ग्राम गौरवपथ द्वारा 1987 किमी आंतरिक सी.सी. सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इस वर्ष में 60 किमी ग्राम गौरवपथ का निर्माण किया जायेगा। आदिवासी बहुल अति संवेदनशील क्षेत्र, जिला सुकमा, दंतेवाड़ा एवं बीजापुर में 241 ग्राम गौरवपथ का निर्माण किया गया, जिससे ग्रामों में कीचड़, धूल, एवं गंदगी की समस्या दूर हुई एवं स्वच्छता कायम रखने में सीमेंट कांक्रीट सड़कों की अहम भूमिका रही।
28. पंचायत संचालनालय के द्वारा संचालित ई-गवर्नेंस के माध्यम से पंचायतों को सशक्त करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राज्य को देश में तीसरा पुरस्कार प्रदान किया गया। साथ ही ग्राम पंचायतों का लेखा ऑनलाइन करने तथा पी.एफ.एम.एस. प्रणाली से ऑनलाइन भुगतान हेतु पंचायतों को सक्षम करने के लिए विश्व बैंक से प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है।
29विभिन्न योजनाओं में ऑनलाइन भुगतान हेतु प्रदेश के सभी सरपंच (10,978) एवं सचिवों का डिजिटल हस्ताक्षर (क्लास-2) बना लिया गया है। पारदर्शिता के लिए ग्राम पचांयतों का सम्पूर्ण लेखा ऑनलाईन हो गया है, जिसे जनसाधारण द्वारा देखा जा सकता है। प्रदेश की समस्त 20,578 ग्रामों को एल.जी.डी. कोड प्रदाय किया गया है, जिसका उपयोग सभी विभागों द्वारा किया जा रहा है। गत अप्रैल माह से अभी तक 99617 निर्वाचित प्रतिनिधि शासकीय अमलें एवं स्व-सहायता समूह के सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है।
30ग्रामीण क्षेत्र में स्व-सहायता समूहों के आर्थिक गतिविधियों के सुचारू संचालन हेतु 15 एकीकृत सुविधा केन्दों का निर्माण किया जा रहा है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसरंचनों के विकास हेतु मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना, 14 वाँ वित्त एवं मूलभूत योजना से 710.26 करोड़ के निर्माण कार्य स्वीकृत किये गये हैं।
31महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर 5000 से अधिक जनसंख्या वाले ग्रामों में ‘‘ऑक्सीजोन‘‘ बना कर स्वच्छता इंटर्नशिप चलाया गया है।
32वाणिज्यिक कर विभाग (जीएसटी)
33जीएसटी लागू होने के पश्चात् पंजीकृत व्यावसायियों की संख्या में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  
34जीएसटी अधिनियम को लागू हुए पूरे 2 वर्ष हो चुके हैं। राज्य के व्यावसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य की अनुशंसा अनुसार जीएसटी परिषद द्वारा अनेक प्रमुख वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम की गई है। साथ ही राज्य के व्यावसायियों से प्राप्त सुझाव, प्रतिक्रिया के आधार पर अधिनियम के प्रावधानों में सुगमता लाने के लिये आवश्यक परिवर्तन भी किया गया है।
35सभी 5 संभागीय कार्यालयों एवं राज्य के समस्त 30 वृत्त कार्यालयों में जी.एस.टी. सेवा केन्द्र (हेल्पडेस्क) बनाये गये हैं। 24ग7 घंटे टोल फ्री टेलीफोन नंबर पर निरंतर सेवा दी जा रही है। व्यावसायियों को जीएसटी रिटर्न फाइलिंग (जीएसटीआर-3बी) प्रस्तुत करने हेतु निरंतर ई-मेल एवं एसएमएस किया जा रहा है।
36वाणिज्यिक कर विभाग को वित्तीय वर्ष 2018-19 में 14608.70 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ है, गतवर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत राजस्व वृद्धि हुई है।
37चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में (1 अप्रैल 2019 से 30 सितम्बर 2019 तक) 7443.50 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ है।
38ोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग
39‘मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना’ के तहत आदिवासी बहुल अंचलों में स्वास्थ्य जांच, इलाज तथा दवा वितरण की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है, जिसका लाभ विशेषकर सुदूर अंचल में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के लोगों को मिलेगा। यह अभियान 2 अक्टूबर से प्रदेश में लागू किया गया है।
40मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2019 को प्रदेश में किया गया। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के स्लम में रहने वाले लोगों को उनके निकटतम स्थान पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करायी जा रही हैं।
41‘यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम’ के अंतर्गत विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों का उन्नयन किया जा रहा है। अनेक नई सुविधाएं शुरू की जा रही हैं।
ऽ नारायणपुर, सुकमा तथा कोण्डागांव में विशेष नवजात गहन चिकित्सा इकाई शुरू की गई है।
ऽ प्रदेश में नवजात और माताआें को तत्काल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने 17 मातृ-शिशु अस्पताल शुरू करने की प्रक्रिया जारी है।
ऽ गर्भवती माताओं को विभिन्न तरह की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था अस्पतालों में की जा रही है।
ऽ मरीजों के लिए अनेक निःशुल्क सुविधाएं जैसे :- सिकलसेल की जांच, डायलिसिस, पैथोलॉजी जांच आदि शुरू की जा रही हैं।
ऽ पं. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर में हृदय रोग के उपचार हेतु ‘स्टेमी मॉडल’ की स्थापना की जाएगी।
ऽ दंतेवाड़ा में 100 बिस्तर जिला अस्पताल को 200 बेड अस्पताल बनाने की घोषणा की गई है।
ऽ दंतेवाड़ा में सीटी स्केन सेंटर शुरू करने की घोषणा की गई है।
ऽ प्रदेश के 871 हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर को कार्यात्मक बनाया गया है।
ऽ 800 से अधिक नर्सों की भर्ती हेतु विज्ञापन प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है।
ऽ गैर संचारी रोग के लिए 30 वर्ष से अधिक आयु के 4.9 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।
ऽ मार्च 2019 तक वार्षिक अनुमान के विरुद्ध 75 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हुआ है।
ऽ मीजल्स एवं रूबेला वैक्सीन की शुरूआत की गई है।
ऽ रोटा वायरस वैक्सीन प्रारंभ किया गया है।
ऽ 264 प्रथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 24 घंटे संचालित करने की शुरुआत की गई है।
ऽ मार्च 2019 तक 92 प्रतिशत टीकाकरण कवर किया गया।
ऽ लक्ष्य कार्यक्रम के अन्तर्गत लेबर रूम के अनुसार 7 लेबर रूम और 5 ऑपरेशन थियेटर का गुणवत्ता के मानकों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणीकरण किया गया है।
ऽ 4 जिला अस्पताल और 2 सीएचसी को छफ।ै के रूप में प्रमाणित किया गया है।
ऽ आकांक्षी (एस्पिरेशनल) जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अंतर को पूरा करने हेतु 48 करोड़ रू. स्वीकृत किया गया है।
ऽ 7279 स्कूलों के 527459 विद्यार्थियों का नेत्र परीक्षण कर दृष्टि दोष वाले 15845 बच्चों को निःशुल्क चश्मों का वितरण किया गया है।  
ऽ राज्य के सभी नागरिकों को बेहतर एवं गुणवŸापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु ‘डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना’ एवं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
ऽ छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां 20 लाख रु. तक उपचार सुविधा प्रारंभ करने का निर्णय लिया।
आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग
ऽ राज्य शासन के सकारात्मक कार्यों, नई पहल और प्रोत्साहन से देश में आर्थिक मंदी के बावजूद छŸासगढ़ राज्य में ऑटो सेक्टर में वृद्धि हुई है।
ऽ छŸासगढ़ शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-2020 से विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना की पात्रता राशि में वृद्धि कर 1 करोड़ के स्थान पर 2 करोड़ रु. प्रति क्षेत्र कर दिया गया है जिसमें से माननीय विधायक 148 लाख रु. तक के कार्यो तथा माननीय प्रभारी मंत्री 50 लाख रूपए तक कार्यों की स्वीकृति हेतु अनुशंसा  कर सकते है।
ऽ आकस्मिक निधि राशि प्रत्येक विधानसभा हेतु प्रावधानित राशि 2 करोड़ का एक प्रतिशत किया गया है।    
ऽ राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के अनुमान एक निश्चित अवधि में आर्थिक विकास स्तर में आने वाले परिवर्तन को प्रदर्शित करता है।
ऽ छŸासगढ़ राज्य में सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2018-19 के अग्रिम अनुमान पिछले वर्ष की तुलना में बाजार मूल्य (स्थिर भाव) पर 218538 करोड़ रुपये से 231819 करोड़ रुपये हो गई है, जो कि 6.08 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
ऽ राज्य में प्रति व्यक्ति आय (राज्य घरेलू उत्पाद- प्रचलित भाव पर) पिछले वर्ष 2017-18 की तुलना में 7.88 प्रतिशत वृद्धि दर्शाते हुए वर्ष 2018-19 में 96887 रु. अनुमानित है।
ऽ एसडीजी विजन डॉक्यूमेन्ट का प्रकाशन – सतत् विकास लक्ष्यों ;ैनेजंपदंइसम क्मअमसवचउमदज ळवंसे.ैक्ळेद्ध के राज्य में क्रियान्वयन हेतु आवश्यक दस्तावेज श्ैक्ळ ब्ींजजपेहंती टपेपवद क्वबनउमदज.2030श् का प्रकाशन किया गया है। इसमें 2030 के लिये राज्य का विजन, प्रांरभिक 5 वर्षां 2019 से 2024 की रणनीति ;ैजतंजमहलद्ध और प्रारंभिक 3 वर्ष की कार्ययोजना सम्मिलित है।
ऽ सतत् विकास लक्ष्यों का प्रचार-प्रसार – प्रदेश में सतत् लक्ष्यों के प्रचार-प्रसार /स्थानीकरण हेतु सतत् विकास लक्ष्यों के सभी संबंधित पक्षों /हितधारकों के संवेदीकरण की योजना है। योजना के अंतर्गत सर्वप्रथम 5वीं विधानसभा में प्रथम बार निर्वाचित होकर आये विधायकों के संवेदीकरण हेतु मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य तथा योजना मंत्री की अध्यक्षता में कार्यशाला का आयोजन किया गया। भविष्य में गैर सरकारी/ नागरिक सामाजिक संगठनों, मीडिया तथा व्यावसायिक संगठन के संवेदीकरण ;ैमदेपजप्रंजपवदद्ध हेतु वृहद् स्तर पर पृथक-पृथक कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना है।
ऽ ैक्ळ सेल की स्थापना – सतत् विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन, अनुश्रवण तथा मूल्यांकन का कार्य राज्य योजना आयोग को सौंपा गया है। इस हेतु राज्य योजना आयोग में एक पृथक ैक्ळ प्रकोष्ठ ;ैक्ळ ब्मससद्ध की स्थापना की गई है।
ऽ कृषि सांख्यिकी का प्रकाशन – राज्य की कृषि फसलों के क्षेत्र, उत्पादन इत्यादि के 18 वर्षों के आंकडों के आधार पर रिपोर्ट स्वरूप में उपयोग के लिये तैयार कृषि सांख्यिकी तैयार की गई है, जो आयोग के स्वयं के कार्यो के लिये तथा कृषि एवं संबद्ध विभाग के लिये उपयोगी हो सकती है।
ऽ प्रदेश में मिलेट्स उत्पादन को प्रोत्साहन – प्रदेश में मिलेट्स उत्पादन को प्रोत्साहन देने ओड़िशा सरकार की तरह मिलेट्स मिशन प्रारंभ करने पर विचार करने की अनुशंसा की गई है।
ऽ जिला योजना निर्माण हेतु सतत् विकास लक्ष्य आधारित मार्गदर्शिका – सतत्-विकास लक्ष्यों के आधार पर जिला योजना तैयार किये जाने हेतु राज्य योजना आयोग द्वारा सतत् विकास लक्ष्य आधारित जिला योजना निर्माण की मार्गदर्शिका तैयार की गई है। संबंधित विभागों से अभिमत प्राप्त होते ही शीघ्र ही मार्गदर्शिका का प्रकाशन किया जायेगा।
लोक निर्माण विभाग
ऽ ‘‘जवाहर सेतु योजना’’ अंतर्गत पुलों का निर्माण कर पहुंचविहीन गांवों तक आवागमन हेतु कनेक्टिविटी की योजना है। इसके लिए 100 पुलों को वर्ष 2019-20 के बजट में सम्मिलित किया गया है।
ऽ विगत  एक वर्ष में राज्य मद से 1717 कि.मी. सड़कों का निर्माण/उन्नयन किया गया है।
ऽ 54 वृहद पुल पूर्ण किए गए एवं 125 वृहद पुल का कार्य प्रगति पर है।
ऽ नक्सल प्रभावित क्षेत्र के जिलों के लिए 1991 कि.मी. सड़क तथा 3 पुल कार्यां के लिए 3171 करोड़ रु. की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें से 1529 कि.मी. की सड़के तथा 2 पुल का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।
ऽ नक्सल प्रभावित क्षेत्र में त्ब्च्स्ॅम् योजना अंतर्गत 97 कार्य (72 सड़क एवं 25 वृहद पुल) की स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिसकी लंबाई 1238 कि.मी. एवं लागत 1000 करोड़ रु. है। इनमें से 57 कार्य (38 सड़क तथा 19 पुल) प्रगति पर है तथा अभी तक 211 कि.मी. सड़क निर्माण किया गया है।
ऽ छŸासगढ़ राज्य सड़क क्षेत्र परियोजना के अंतर्गत एशियन डेव्लपमेंट बैंक की सहायता से 855 कि.मी. का सड़क कार्य पूर्ण हो चुका है। इस परियोजना के तृतीय लोन में 3484 करोड़ रु. लागत के 25 मार्ग (लंबाई 869 कि.मी.) निर्माण हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
ऽ छŸासगढ़ डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के माध्यम से 2336 करोड़ रूपए की लागत के 26 मार्ग (लंबाई 767 कि.मी) के कार्य प्रगति पर है। इनमें से 584 कि.मी. का सड़क कार्य पूर्ण हो चुका है।
ऽ बस्तर संभाग की शंखिनी-डंकिनी नदी पर 18 करोड़ 75 लाख रु. की लागत से उच्च स्तरीय पुल निर्माण किया जाएगा।
गृह विभाग
ऽ जिला पुलिस बल में आरक्षक संवर्ग के 1159 पदों की भर्ती की अनुमति छत्तीसगढ़ शासन, गृह (पुलिस) विभाग से प्राप्त हो चुकी है तथा 264 पदों की भर्ती की अनुमति के लिए प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन, गृह (पुलिस) विभाग की ओर पृथक से प्रेषित किया गया है, जिसके संबंध में शासनादेश प्रतीक्षित है। इन पदों पर भर्ती की अनुमति प्राप्त होने के उपरांत भर्ती प्रक्रिया के संबंध में अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
ऽ थानों में पदस्थ पुलिस कर्मियों को सप्ताह में 01 दिवस तथा नक्सल प्रभावित एवं दुर्गम क्षेत्र में पदस्थ पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश के एवज में प्रति तीन माह में एक बार 08 दिवस का अवकाश देने हेतु निर्देश जारी किये गये हैं। थाना/चौकियों तथा छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की कंपनियों में रोस्टर बनाकर अवकाश दिया जा रहा है।
ऽ राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ बनाये रखने हेतु कृतसंकल्पित है। इस हेतु सुरक्षा बल में वृद्धि सहित उन्हें उत्कृष्ट संसाधन एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये वित्तीय वर्ष 2019-20 में 4291.21 करोड़ रू.का बजट प्रावधान किया गया है, जो विगत वित्तीय वर्ष 2018-19 की तुलना में 197.73 करोड़ (4.83 प्रतिशत)े अधिक है।
ऽ शासन द्वारा महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम के लिए 6 जिलों-रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ में महिला विरुद्ध अपराध विवेचना इकाई संचालित की जा रही है।
ऽ प्रदेश के 370 थानों में महिला डेस्क, महिलाओं की शिकायतों को सुनने हेतु महिला हेल्पलाइन 1091, सभी जिलों में महिलाओं के पारिवारिक विवाद के निराकरण के लिए परिवार परामर्श केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं।
ऽ प्रदेश में महिला पुलिस वालेंटियर योजना के तहत् दुर्ग और कोरिया जिलों में 4568 महिला पुलिस वालेंटियर बनाये गये हैं। पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत पीड़िताओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
ऽ राज्य शासन की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर अब तक 302 माओवादी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौट आए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियानों में 459 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। विगत वर्ष की तुलना में वर्ष 2019 की प्रथम छमाही में नक्सल घटनाओं में 37 प्रतिशत की कमी हुई है। नक्सल विरोधी अभियानों में कुल 143 हथियार बरामद करने में पुलिस को सफलता मिली है।
ऽ सैनिक कल्याण – देश में लगभग 60,000 औसतन सैनिक (अधिकारियों और कनिष्ठ कमीशन्ड अधिकारियों को छोड़कर) प्रति वर्ष 32-35 वर्ष की आयु में सशस्त्र सेनाओं से सेवानिवृत्त होते हैं। इसमें से छत्तीसगढ़ के लगभग 200 सैनिक सेवानिवृत्त होते हैं। वर्तमान में 6520 भूतपूर्व सैनिक, 1368 सैन्य विधवाएं एवं लगभग 23,664 आश्रित राज्य में निवासरत हैं।
ऽ वर्ष 2018-19 में विशेष निधि से 418 भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके आश्रितों को 52,49,989 रू. (52 लाख 59 हजार) वितरित किए गए। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत सभी हितग्राहियों को आर्थिक सहायता एवं छात्रवृत्तियों का भुगतान बैंक द्वारा त्ज्ळै माध्यम से ऑन लाइन किया गया है।
ऽ भूतपूर्व सैनिकों को स्वरोजगार, रोजगार दिलाने में संचालनालय सैनिक कल्याण, छत्तीसगढ़ द्वारा सहायता की जाती है। वर्ष 2018-19 में अब तक राज्य के 116 से अधिक भूतपूर्व सैनिकों को विभिन्न सरकारी/गैर सरकारी/च्ैन् संस्थानों में रोजगार दिलाया गया है।
ऽ छŸासगढ़ के विभिन्न जिलों के दूरदराज में रहने वालों को जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों में कार्य पूर्ण होने तक ठहरने की व्यवस्था हेतु सैनिक विश्राम गृह उपलब्ध है, जो कि रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और जशपुर में स्थित है। जिला मुख्यालय जगदलपुर एवं अम्बिकापुर के सैनिक विश्राम गृहों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
ऽ लोक अभियोजन – जिला बिलासपुर, दुर्ग, कबीरधाम, धमतरी, जगदलपुर, रायगढ़, सूरजपुर, सरगुजा, कोरिया, महासमुंद, जशपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर चांपा एवं रायपुर में स्वयं का कार्यालय भवन निर्मित किया गया है। यहां अभियोजन कार्यालय सुचारू रूप से संचालित है।
ऽ छŸासगढ़ शासन द्वारा साधारण प्रकृति के 8442 प्रकरणों की वापसी हेतु चिन्हित किया गया हैं। जिला दंडाधिकारी द्वारा 5635 प्रकरणों की वापसी का आदेश जारी किया गया है, जिसमें से न्यायालय द्वारा कुल 3926 प्रकरण वापस किए गए हैं।
ऽ राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला – राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर की स्थापना नवंबर, 2002 में हुई है। प्रयोगशाला में राज्य के समस्त जिलों के आपराधिक प्रकरणों का फोरेंसिक विश्लेषणात्मक परीक्षण किया जाता है। प्रयोगशाला में मुख्य तीन डिवीजन हैं, भौतिकी डिवीजन, बायोलॉजी डिवीजन रसायन डिवीजन जिसमें से भौतिकी डिवीजन के अंतर्गत फोरेंसिक भौतिकी के अतिरिक्त बैलिस्टिक्स प्रकरणों का भी परीक्षण किया जाता है। बायोलॉजी डिवीजन के अंतर्गत फोरेंसिक बायोलॉजी सीरोलॉजी डायटम तथा डीएनए से संबंधित प्रकरणों का परीक्षण कार्य किया जाता है। रसायन एवं विष, आबकारी राज्य सतर्कता आयोग तथा विस्फोटकों से संबंधित प्रकरणों का परीक्षण किया जाता है।
ऽ छततीसगढ़ राज्य के अंतर्गत 03 क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, अंबिकापुर, जगदलपुर तथा बिलासपुर कार्यरत है।
ऽ वीडियो एनालिसिस माह दिसम्बर 2019 में स्थापित किया गया है।
ऽ जिला सीन ऑफ क्राइम ब

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