कानन प्रशासन ने कर्मचारियों का मोबाइल किया प्रतिबंधित
बिलासपुर. कानन प्रशासन द्वारा अपनी कारगुजारियां छुपाने के लिए सोमवार को मौखिक आदेश के तहत जु के अंदर कार्यरत कर्मचारियों का मोबाईल प्रतिबंधित कर दिया गया सोमवार को जब कर्मचारी अपने कार्य पर आए तब उनका मोबाईल गेट पर ही जमा करा लिया गया ऐसे में समझा जा सकता है कि कानन प्रशासन को अपने ही मातहत कर्मचारियों पर अब भरोसा नही रहा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगातार हो रही घटना के संबंध में वो बात भी जो कानन प्रशासन द्वारा मीडिया से छुपाई जा रही थी उन जानकारियों के मीडिया में प्रकाशन के बाद कानन प्रशासन ने ये फैसला लिया है। ज्ञात हो कि विगत एक सप्ताह में कानन पेण्डारी में तीन वन्य प्राणियों की मौत हो चुकी है। सबसे पहले रायगढ़ से रेस्क्यू कर लाये गए आदमखोर भालू की 12 दिनों बाद इलाज के आभाव में कानन में मौत हो गई थी उसके बाद रविवार को एक मणिपुरी चीतल एवं सांभर की मौत हो गई जिसमें से दो माह के उम्र के मणिपुरी चीतल की मौत का कारण कमजोरी एवं सांभर की मौत की वजह आपस मे लड़ने से गले के स्वास नली में आई चोट को बताया गया है।कानन प्रशासन के असवेदनशीलता के चलते एक सप्ताह में लगातार तीन वन्य जीवों की मौत की खबरे मीडिया में आने से कानन प्रशासन की फजीहत होने लगी इससे बौखलाए कानन के अधिकारियों ने इसका ठीकरा वहाँ कार्यरत कर्मचारियों पर फोड़ते हुवे तुगलकी मौखिक फरमान जारी कर दिया जिसके तहत अब हर कर्मचारी को कानन जू के अंदर प्रवेश करने से पूर्व अपना मोबाइल फोन गेट पर ही जमा कराना पड़ेगा इसकी शुरुआत सोमवार से की गई। नाम न छापने की शर्त पर पुष्ट सूत्रों ने बताया कि लगातार कानन में हो रही वन्य प्राणियों के मौत की खबर बाहर फैलाने के दोषी कानन के अधिकारी वहाँ कार्यरत कर्मचारियों को मान रहे है जिसके चलते सजा के तौर पर एवं अघोषित सेंशरशिप लगाने के लिए कानन के अधिकारियों ने इसे लागू किया है। सोमवार को जब कर्मचारी कानन पहुचे तब उनके मोबाइल गेट पर ही जमा करा लिया गया वापस जब वो काम खत्म कर घर जाने के लिए बाहर निकले लगे तब उनका मोबाइल वापस किया गया विदित हो कि जू के अंदर विभिन्न व्यवस्थाओ का प्रभार देखने वाले कर्मचारियों का प्रवेश और निर्गमन गेट नम्बर 2 से होता है।इस तरह के आदेश से ऐसे में सवाल उठना लाजमी है की क्या कानन प्रशासन अपनी अव्यवस्था छिपाने के लिए ऐसा दिशा-निर्देश जारी कर रहा है।