गिर वन में एशियाई शेरों की आबादी बढ़ी, पीएम मोदी ने ट्वीट कर ऐसे जताई खुशी


नई दिल्ली. आज बात करते हैं शेर पर शुभ समाचार की, जो आई है गुजरात के गिर यानी शेरों के अपने घर से. गिर वन इलाके में एशियाई शेरों की आबादी बढ़ गई है. गिर में 151 शेर बढ़ गए हैं. इसकी जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर दी है.

पूरी दुनिया में जहां एक ओर शेरों की तादाद कम हो रही है. ऐसे में हिंदुस्तान में शेरों की आबादी में एक तिहाई की बढ़ोतरी हुई है. दक्षिणी अफ्रीका को छोड़कर ये विश्व का ऐसा इकलौता स्थान है, जहां शेरों को अपने प्राकृतिक आवास में रहते हुए देखा जा सकता है. बारिश के मौसम के बाद इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है. ये राष्ट्रीय उद्यान 1412 वर्ग किमी में फैला है. 1913 में लुप्त हो रहे एशियाई शेरों को संरक्षण देने के लिए इस उद्यान की स्थापना हुई थी. 1965 में इस वन संरक्षित क्षेत्र को  अभ्यारण्य का दर्जा मिला था.

गुजरात के जूनागढ़ में गिर वन ‘बाघ संरक्षित क्षेत्र’ है. जो पूरी दुनिया में ‘एशियाई बब्बर शेरों’ के लिए प्रसिद्ध है. गिर के शेर जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर, बोटाद, पोरबंदर, राजकोट और सुरेंद्रनगर तक के जंगलों में देखे जाते हैं.

गिर के शेरों की संख्या में इजाफा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताई है. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करके लिखा है कि दो बहुत अच्छी खबरें हैं, गुजरात के गिर वन में रहने वाले एशियाई शेर की आबादी लगभग 29 फीसद तक बढ़ गई है. भौगोलिक रूप से, वितरण क्षेत्र (फैलाव) 36 फीसद तक बढ़ गया है. गुजरात के लोगों और उन सभी लोगों के लिए बधाई जिनके प्रयासों से यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है.

शेरों की गिनती पूर्णिमा की रात को होती है. जिसे ब्लॉक काउंट मेथड कहा जाता है. टाइम, जीपीएस लोकेशन, शेर के ग्रुप और उनकी तादाद, रेडियो कॉलर नंबर्स, ई-गुजरात फॉरेस्ट डेटा के आधार पर पूरी गिनती की जाती है. प्रधानमंत्री मोदी ने शेरों की संख्या में बढ़ोतरी को सकारात्मक बताया है. प्रधानमंत्री मोदी ने एक और ट्वीट में लिखा

पिछले कई वर्षों से गुजरात में शेरों की आबादी लगातार बढ़ रही है. ये सामुदायिक भागीदारी, प्रौद्योगिकी पर जोर, वन्यजीव स्वास्थ्य सेवा, उचित आवास प्रबंधन और मानव और शेरों के बीच संघर्ष को कम करने के कदमों का नतीजा है. आशा है कि ये सकारात्मक प्रवृत्ति आगे भी जारी रहेगी.

इससे पहले वर्ष 2015 में शेरों की गिनती की गई थी. तब इनकी संख्या 523 थी. पांच सालों में इनकी संख्या में 151 शेर बढ़ गए हैं.

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