गौठान बना ग्रामीणों की आय का जरिया, 2 हजार क्विंटल जैविक खाद का निर्माण किया

बिलासपुर. सुराजी ग्रामों में ग्रामीणों के आर्थिक सामाजिक विकास के उद्देश्य से प्रारंभ की गई नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना के क्रियान्वयन से ग्रामीणों को आय का अतिरिक्त जरिया मिल रहा है। योजना के तहत गौठानों में आर्थिक गतिविधियां संचालित की जा रही है।
इस क्रम में जिले के विकासखंड मरवाही के ग्राम गुल्लीड़ांड़ में कृषि विभाग के सहयोग से ग्राम गौठान समिति द्वारा गोबर से जैविक खाद का निर्माण प्रारंभ किया गया है। जुलाई माह से इस गौठान में सैकड़ों की संख्या में पशुओं का रखरखाव किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा इन गौठानों में 5 वर्मी बेड्स और 2 नाडेप टांके जैविक खाद निर्माण के लिये स्थापित किये गये हैं। अगस्त माह में इन दो गौठानों में 2 हजार किलोग्राम वर्मी जैविक खाद का निर्माण किया गया। गौठान में पशुओं की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। गोबर की उपलब्धता बढ़ेगी और जैविक खाद उत्पादन में भी इजाफा होगा। जिले के गौठान प्रभारी और उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डाॅ.सोनी ने बताया कि राज्य शासन द्वारा गोबर से तैयार जैविक खाद की प्रति किलो दर 6.50 रूपये तय किया गया है। इस दर पर जैविक खाद की खरीदी के लिये कृषि और उद्यान विभाग को अधिकृत किया गया है। तय कीमत के आधार पर गौठान समिति को दो हजार किलो जैविक खाद से 13 हजार रूपयों की आमदनी होगी। ग्रामीणों को ईंधन की वैकल्पिक सुविधा हो, इसके लिये बायो गैस प्लांट की स्थापना भी इस गौठान में की जा रही है।

ज्ञातव्य है कि इस गौठान के निर्माण के लिये स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह द्वारा फेंसींग पोल की आपूर्ति की गई है। नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना ग्रामीण क्षेत्रों की परंपरागत अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को पुनर्जीवित करने का काम कर रही है। शासन की इस नवाचारी अवधारणा ने स्वस्थ्य आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण का विकास का मार्ग प्रशस्त किया है।
गुल्लीड़ांड़ में आदर्श गौठान का निर्माण किया गया है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में इस गौठान का व्यवस्थित संचालन किया जा रहा है। गुल्लीड़ांड़ गौठान में अभी करीब 250 पशु आ रहे हैं। जहां उनके चारे, पेयजल और छाये की व्यवस्था की गई है। गुल्लीड़ांड़ गौठान के पास ही पशु चारे का विकास किया गया है। इनमें एक एकड़ में नेपियर, 2 एकड़ में एम.पी.चारा, 2 एकड़ में मैजी और 5 एकड़ में सूडान घास चारागाह का विकास किया गया है।