जानिए किस पर भड़क उठे अमिताभ बच्चन, ब्लॉग पर बोले- ‘ठोक दो साले को’


नई दिल्ली. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को शायद आज से पहले कभी किसी ने इतने गुस्से में नहीं देखा होगा, ऑफ स्क्रीन तो बिलकुल नहीं. तब भी नहीं जब एमएनएस उनके खिलाफ आई, तब भी नहीं जब बोफोर्स के दाग उन पर उछाले गए, तब भी नहीं जब ऐश्वर्या की पेड़ से शादी या प्रेग्नेंसी के मुद्दे को लेकर गलत खबरें छापी गईं. लेकिन अब वो इतना गुस्सा हुए कि सीधे-सीधे ब्लॉग में लिख दिया कि मेरी मौत की कामना करने वाले अगर मैंने अपने 90 मिलियन फोलोअर्स को लिख दिया कि ठोक दो साले को, तो सोच तेरा क्या होगा.

महानायक अपनी फिल्मों के किरदारों की तरह आज खुद नहीं लड़ सकते, लेकिन एक बड़ी लड़ाई वो नानावटी हॉस्पिटल के बेड पर लड़ रहे हैं, दुनिया भर में लाखों जानें ले चुके कोरोना वायरस से. उनके परिवार के 4 सदस्य इस बीमारी की चपेट में हैं ऐसे में ये लड़ाई ज्यादा गंभीर है. ऐसे में बिग बी की आंखों से उस वक्त आंसू आ गए, जब उनको सोमवार को खबर मिली कि बहू ऐश्वर्या और नातिन आराध्या को नेगेटिव पाया गया है और उनको घर भेजा जा रहा है. ऐसे में अचानक उन्हें मैसेज मिलता है कि ”I hope you die with this Covid”, ये मैसेज एसएमएस के जरिए मिला या सोशल मीडिया पर, बिग बी ने साफ नहीं किया, लेकिन वो अपना गुस्सा रोक नहीं पाए और अपने ब्लॉग में पूरा आक्रोश उड़ेल कर रख दिया.

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग की शुरुआत की, ‘मिस्टर अज्ञात, आपने अपने पिता का नाम तक नहीं लिखा, क्योंकि आपको नहीं पता कि आपका बाप कौन है, या तो मैं जिंदा रहूंगा या मर जाऊंगा. अगर मैं मर गया तो तुम एक सेलेब्रिटी के नाम पर अपनी भड़ास निकालने, निंदा करने का काम आगे नहीं कर पाओगे. अफसोस कि आपके लिखे को नोटिस में लाने वाला नहीं रहेगा, क्योंकि जिस अमिताभ बच्चन पर आपने कटाक्ष किया, तब वो जिंदा नहीं रहेगा.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘लेकिन भगवान के आशीर्वाद से मैं बच गया तो फिर तुम लोगों के गुस्से का तूफान झेलोगे, मेरी तरफ से नहीं बल्कि मेरे 90 मिलियन फॉलोअर्स की तरफ से, और ये जान लो कि ये दुनिया भर में हैं, हर कौने में, ईस्ट से लेकर वेस्ट तक, नॉर्थ से लेकर साउथ तक और ये केवल इस पेज की ईएफ यानी एक्सटेंडेंड फैमिली नहीं है बल्कि एक्सटर्मिनेशन फैमिली है.’

और मुझे केवल ये कहना है- ‘ठोक दो साले को.’

फिर अमिताभ बच्चन ने गुस्से में हिंदी भाषा में भी कुछ ऐसा लिख डाला, लगा मानो कोई शाप दे रहे हों- ‘मारीच, अहिरावन, महिषासुर, असुर, उपनाम हो तुम;  हमारा यज्ञ प्रारम्भ होते ही, तुम राक्षसों की तरह तड़पोगे, जान लो इतना की अब तुम ही केवल समाज की आवाज ना हो;  चरित्र हीन, अविश्वासी, श्रद्धा हीन, लीचड़ तुम हो; जलो गलो पिघलो, बेशर्म, बेहया, निर्लज्ज, समाज कलंकी.’

जाते-जाते हुए उन्होंने ये भी लिख दिया- May you burn in your own stew!!

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