जान जोखिम में डाल कर विद्युत सप्लाई व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे कर्मी

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बेमेतरा. भारी बारिश के चलते एक ओर जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। वहीं बिजली सप्लाई निर्बाध रखने में भी बाधाएं आ रही थी। लगातार बारिश होने के कारण पोल एवं केबल टूट गए हैं तथा कुछ जगहों पर ट्रांसफार्मर डूब गए हैं। परंतु फिर भी विद्युत सप्लाई की व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद में विद्युत विभाग के कर्मचारी योद्धा की तरह अपनी जान की परवाह किये बिना जुटे हुए हैं।

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, दुर्ग क्षेत्र के कार्यपालक निदेषक संजय पटेल ने बताया कि बेमेतरा ग्रामीण वितरण केंद्र के अंतर्गत ग्राम झिरिया, बावाघटोली, उसलापुर की विद्युत सप्लाई शिवनाथ नदी में बाढ़ के कारण बंद थी। इसकी सूचना मिलने के बाद कनिष्ठ यंत्री एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा गांव से 1.5 किलोमीटर दूर नाव से जाकर सुधार कार्य कर ग्रामों की विद्युत सप्लाई बहाल की गई। उन्होंने बताया कि बारिश का पानी जमा होने के कारण ट्रांसफार्मर लगभग पूरा पानी में डूब चुका था। अधीक्षण अभियंता व्ही.आर.मौर्या ने बताया कि ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी होने की वजह से विद्युत सप्लाई बंद हो गया था। परंतु जलस्तर ऊपर होने के कारण तकनीकी खराबी को ठीक करने कर्मचारी नाव से पहुंचे और ट्रांसफार्मर की खराबी दूर की। बेमेतरा सब डिविजन के सहायक अभियंता गुलाब साहू ने बताया कि शिवनाथ नदी में बाढ़ आने के कारण बहिंगा नाला भी पूरे उफान पर था जिसके कारण 11 के.व्ही. बहेरघाट फीडर की सप्लाई बंद हो गई थी। जिसके कारण ग्राम बहिंगा, बहेरघाट, दमई एवं नवांगांव बस्ती की विद्युत सप्लाई बंद हो गई ।

उन्होंने बताया कि मख्य लाइन नदी किनारे होने के कारण बाढ़ में डूब गया था जिसका जम्फर काट कर गांवों को नई लाइन से सप्लाई दिया गया। सहायक अभियंता ने बताया कि कनिष्ठ यंत्री एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा डूबान क्षेत्र में नाव से पहुंचकर तत्काल नये विद्युत विस्तार कार्य की लाइन को चार्ज कर उक्त ग्रामों में नवीन स्थापित ट्रांसफार्मर को चालू कर ग्रामों की विद्युत व्यवस्था बहाल की गई। उक्त प्रभावित ग्राम रांका वितरण केंद्र के अंतर्गत स्थित हैं। उच्च अधिकारियों द्वारा बेमेतरा ग्रामीण वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री जी.पी.बंजारे, रांका वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभितोश घोष एवं तकनीकी कर्मचारियों लाइन परिचारक श्रेणी-दो  रितेश, लाइन परिचारक श्रेणी-तीन ओमेश्वर साहू, भीखम साहू एवं हिमांशु के इस कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की जा रही है।

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