तारीफों के बीच सवालों के घेरे में न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न
वेलिंगटन. न्यूजीलैंड ने हाल ही में कोरोना (Corona Virus) मुक्त होने की घोषणा की थी, लेकिन अब वहां फिर से नए मामले सामने आये हैं. सरकार ने कोरोना खत्म होने की बात करते हुए सभी कड़े उपायों को हटा लिया था, मगर अब अचानक से सामने आए तीन नए मामलों ने उसकी चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में यह सवाल भी पूछा जाने लगा है कि क्या कोरोना मुक्त होने की घोषणा करने में सरकार ने जल्दबाजी दिखाई?
दुनिया में भले ही न्यूजीलैंड और उसकी प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न (Jacinda Ardern) की एक सकारात्मक छवि पेश की जा रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि कई मोर्चों पर सरकार की विफलता ने जनता के दिल में उसके प्रति विश्वास को कम किया है. बात केवल कोरोना के नए मामलों की नहीं है. पिछले कुछ समय में न्यूजीलैंड में हेट-क्राइम में इजाफा हुआ है. इसके अलावा, शुक्रवार को ऑकलैंड में एक निहत्थे पुलिसकर्मी की गोली मारकर की गई हत्या ने भी कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है. पिछले एक दशक में यह पहली ऐसी घटना है जिसमें ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारी को मौत के घाट उतारा गया हो.
PM ने माना यह सिस्टम की विफलता
प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस घटना को सिस्टम की विफलता करार दिया है. यह वारदात ऐसे समय हुई है जब देश में हथियार रखने से जुड़े कानूनों को सख्त बनाये जाने की बात चल रही है. पिछले साल के क्राइस्टचर्च मस्जिद नरसंहार को ध्यान में रखते हुए संसद में इस पर वोटिंग भी हुई है. गौरतलब है कि एक बंदूकधारी ने मस्जिद में घुसकर 51 मुस्लिमों को मौत के घाट उतार दिया था.
क्राइस्टचर्च कांड के बाद अर्डर्न ने बड़ी चालाकी से लोगों का ध्यान इस मामले से हटाकर ऑनलाइन हेट पर केंद्रित कर दिया था. उन्होंने सवाल किया था कि फेसबुक कैसे सामूहिक गोलीबारी को लाइव दिखाने की अनुमति दे सकता है. इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन नफरत के खिलाफ एक वैश्विक आंदोलन भी छेड़ा.
15 फीसदी आबादी को बनाया निशाना
बेशक अर्डर्न की छवि न्यूजीलैंड और दुनिया में एक आदर्श नेता की है, लेकिन कई ऐसे मोर्चे हैं जहां उन्होंने अपनी छवि के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया है. पुलिसकर्मी की हत्या ने न्यूजीलैंड के खुद को अच्छी तरह से प्रशासित देश करार देने के दावे को झूठा साबित कर दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च 2019 के बाद से न्यूजीलैंड में हेट-क्राइम और जेनोफोबिया (अजनबी या विदेशियों के प्रति नफरत) में वृद्धि हुई है, यहां कम से कम 15 प्रतिशत आबादी को निशाना बनाया गया है. एक विशेषज्ञ के मुताबिक, न्यूजीलैंड में कम से कम 60 से 80 कट्टर समूह सक्रिय हैं और हाल ही में इनकी गतिविधियों में तेजी देखी गई है. ये लोग नफरत फैलाने के लिए विभिन्न मंचों का सहारा ले रहे हैं.