नागपुर से पहुँचे माँ-बेटे का वार्डवासियों ने विरोध किया, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर मे किया कैद


बिलासपुर.कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पूरे देश मे लॉक डाउन किया गया था, जिस वजह से ट्रेनें बसें सब बंद थी। ऐसे में शहर में रहने वाली माँ को अपने बेटे को लेने नागपुर जाना था, ,कोई साथ देने वाला नहीं था,तो माँ मालगाड़ी में बैठकर नागपुर पहुँच गई। चार सौ किलोमीटर का सफ़र छूपते हुए करके नागपुर पहुँची।वो ईलाका जहां कोविड 19 का क़हर बरप रहा है। रिश्तेदारों के यहाँ जहां बेटा था, उन्होंने हाथ खड़े कर दिए थे कि आप ले जाओ,हालात के बेकाबू होने की खबर और बेटे को वापस लाने की ज़िद्द में इस माँ ने जो किया वो एक माँ की ममता को समझने के लिए काफी हैं।माँ अपने बेटे को नागपुर से लेकर पैदल पैदल चलते हुए छत्तीसगढ की सीमा पर आ गई..नागपुर से छत्तीसगढ़ की सीमा का मतलब है क़रीब सौ किलोमीटर..। इसने वो सफ़र अपने बेटे के साथ कभी उसे गोद में लेकर तो कभी पीठ पर बांधकर तय किया..।सरहद पर एक ट्रक मिला.. जिससे वो दूर्ग पहुँची .. और दूर्ग से सब्ज़ी ले जाने वाले ट्रक पर बैठकर बिलासपुर जैसे ही मोहल्ले में पहुँची मां और बेटे को देखकर मोहल्ले में तनाव की स्थिति बन गयी,लोगों ने महिला द्वारा बेटे को बाहर से लाये जाने का कड़ा विरोध किया,जिसकी जानकारी विधायक शैलेष पांडेय को मिली तो स्वास्थ्य टीम के साथ पंकज सिंह और साथी पहुँचे। महिला और उसके बच्चे का प्रारंभिक टेस्ट हुआ.. और उसके घर को सेनेटाईज किया गया.. और क्वारनटाईन में रहने की हिदायत दी गई.. घर के सामने देहरी पर पर्चा भी चस्पा किया गया। विधायक शैलेष पांडेय और उनके साथियों ने उस महिला को खाने का सामान दिलाया.. और आश्वस्त किया कि दिक़्क़त नहीं होगी। बस वो क्वारनटाईन अवधि तक घर से ना निकले।महिला ने सहमति दी और कहा “मेरे बेटे को मेरे से अलग मत करना..बाक़ी जो बोलेंगे वैसा करुंगी” विधायक शैलेष पांडेय ने बताया कि “ यह पूरा मामला स्तब्ध करने वाला है.. मानवता और ममत्व का मसला है.. पर सावधानी और सतर्कता का भी.. स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी रखेगा.. वो खुद भी क्वारनटाईन के लिए सहजता से तैयार है.. प्रारंभिक जाँच में कोई लक्षण नहीं है.. रोज़ाना अपडेट लेंगे.

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