नागरिकों को दवा, अनाज और भोजन की व्यवस्था करना मेरा दायित्व है : शैलेश पांडेय

बिलासपुर. नगर विधायक शैलेश पांडे का कहा कि मुझे आपके माध्यम से पता चला है कि, मेरे विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया है। मुझे दी गई जानकारी के अनुसार मुझ पर आरोप है कि मैं अपने निवास में भीड़ को आमंत्रित कर कोरोना के प्राणघातक संक्रमण को बढ़ा रहा था, मैंने धारा 144 का उल्लंघन किया है। मैं इस पटकथा से चकित हूँ और आपके सामने तथ्य रख रहा हूँ । यह बिलकुल सही है कि हम लगातार नागरिकों तक अनाज दवा पहुँचाने की व्यवस्था कर रहे हैं। मुझे जहां से सूचना मिल रही है, मैं वहाँ पहुँच रहा हूँ जो ज़ाहिर है मेरा दायित्व है। लोगों को भोजन मिले इसकी व्यवस्था भी है जिसमें निश्चित तौर पर मेरी सहभागिता है। यह सब करते हुए मैं और मेरे सभी साथी सुरक्षा मान्य निर्देशों का पालन करते हैं और नागरिकों से भी करने का आग्रह करते हैं। बीते सात दिनों से कोई क्षण ऐसा नहीं है कि मैंने अपने दायित्व से एक क्षण मुख मोड़ा हो। यह समस्या सरकार की बस नहीं है, हर व्यक्ति हर नागरिक को साझा होकर लड़ना है। नागरिकों को दवा मिले, अनाज मिले भोजन मिले इसकी व्यवस्था करना और यह सुचारु रुप से होती रहे यह मेरा दायित्व है। मैं आभारी हूँ अपने साथियों का,व्यवसायिक संस्थानों का जिनके पास मैं गया और उन्होंने मुक्त हाथों मेरी मदद की, इन्हीं की मदद से मैं सारी व्यवस्था उपलब्ध करा पा रहा हूँ। आज जबकि मैं कार्यालय पहुँचा तो भीड़ बेहद ज़्यादा थी, मैने एडिशनल एसपी ओ पी शर्मा को फ़ोन किया और उन्हें आकर व्यवस्था देने का आग्रह किया। हैरत की बात है , कि इस वीआईपी क्षेत्र में  इतनी बड़ी संख्या में लोग आ जाते हैं और पुलिस को पता भी नहीं चलता। जिसमें कि पुलिस महानिरीक्षक, विधायक, महापौर , महाधिवक्ता और अन्य महत्वपूर्ण लोग निवास करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में पहुंचने पर लोगों को पहले ही रोका क्यों नहीं गया। यह भीड़ तो जरुरतमंद लोगों की थी। इतनी बड़ी संख्या में लोग 144 धारा के ढील यानी कि 12:00 बजे से पहले इकट्ठे हुए थे। मैंने सभी से तत्काल अपील की कि सब अपने अपने घर जाएं सभी के घर तक दवाई व  राशन और जरूरत की चीजें पहुंचा दी जाएंगी।  इसलिए उस जनता की कोई गलती नहीं है। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।  माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति भूखा ना रहे और मैं विधायक होने के नाते उनके आदेश का पालन कर रहा था। यह मेरी ड्यूटी है, कि मैं लोगों की मदद करूं, उनकी तकलीफ सुनूं, और हर संभव प्रयास कर उस समस्या का समाधान करूं। इसके लिए इस महामारी के समय में मैं शासन और प्रशासन के साथ मिलकर शहर के नागरिकों की मदद करने की कोशिश भी कर रहा हूं । उनके दुख सुख में खड़े रहना और उन दुख को दूर करना भी मेरा कार्य है । बिलासपुर की जनता की सेवा करने के लिए उन्होंने मुझे चुन कर भेजा है । जो मेरे दरवाजे तकलीफ लेकर आएगा मैं उसके लिए उस तकलीफ को दूर करने की अंतिम कोशिश करूंगा। मैं केवल अपने निहित दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूँ, मुझे नहीं लगता कि मैंने अपने नागरिकों की सेवा की तो कोई अपराध किया है । मैं फिर दोहराता हूँ । हमने किसी भी सुरक्षा मानकों का कोई उल्लंघन नहीं किया बल्कि सभी को लगातार सतर्क भी करते रहे हैं। मैं आहत हूँ। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि यह प्रायोजित कार्यक्रम (FIR) का प्रायोजक कौन है। मैं इस मसले पर न्यायालय की शरण लूँगा। साथ ही विशेषाधिकार हनन के तहत कार्यवाही की माँग करते हुए विधि द्वारा जो संरक्षण हर नागरिक की तरह जो मुझे भी मिला है, मैं इसका उपयोग करुंगा।

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