पैरे का वर्मी, कम्पोस्ट, मशरूम और उर्जा उत्पादन में किया जा सकता है उपयोग

बिलासपुर. राज्य शासन द्वारा सम्पूर्ण राज्य में फसल कटाई के पश्चात खेतों में बचे हुए अवशिष्ट को जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। फसल अवशेष को जलाने पर शासन द्वारा दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकती है। फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और मानव व पशु स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिये किसानांे को इसे नहीं जलाने तथा इसका समुचित प्रबंधन कर लाभ उठाने की अपील की गई है। उप संचालक कृषि बिलासपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार फसल अवशेष से वर्मी, नाडेप कम्पोस्ट निर्माण, कृषि यंत्र, रोटावेटर, स्ट्रा बेलर, मल्चर एवं रिपर कम्बाईंडर का उपयोग कर पैरे को मिट्टी मंे मिलाकर कम्पोस्ट बनाया जा सकता है। जिससे मृदा उर्वरता बढ़ेगी एवं कृषि उत्पादन लागत कम होगा। सीड कम फर्टिलाईजर ड्रील का उपयोग कर खरपतवार नियंत्रण, फसल अवशेष का मशरूम उत्पादन में उपयोग कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसी तरह फसल अवशेष का बोर्ड रफ कागज बनाने तथा उर्जा उत्पादन के कच्चे माल के रूप में उपयोग कर भी आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। धान के पैरे को यूरिया से उपचार कर पशुओं के लिये पौष्टिक चारा बनाया जा सकता है।

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