भारत बंद: शिवसेना ने लिखा, ‘मजदूरों की एकता का यलगार ‘कुंभकर्णी’ नींद में सरकार’
नई दिल्ली. केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में आज देशभर की विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने भारत बंद (Bharat Bandh 2020) का आह्वान किया है. भारत बंद को लेकर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, शिवसेना ने कहां, ‘नोटबंदी, जीएसटी जैसे निर्णयों से उद्योग और मजदूर वर्ग उद्धवस्त हो गया. सरकार की नीतियां और मजदूर विरोधी दृष्टिकोण का क्या? एक तरफ सरकार कहती है कि ‘सबका साथ सबका सरकार विकास’ कहना और दूसरी तरफ उद्योग-व्यवसाय और मजदूरों को दबाने की नीति लागू करती है…
….नोटबंदी और जीएसटी के फैसले के कारण देश के दस लाख से ज्यादा छोटे-बड़े उद्योग बंद हो गए. करोड़ों लोगों की नौकरी चली गई. जीडीपी अब 4 प्रतिशत से भी नीचे चली गई है. सभी क्षेत्रों में मंदी की लहर है. बैंकों पर लाखों करोड़ रुपए के डूबे हुए कर्ज का भार है. विकलांग हो चुके उद्योगों की पेंच में फंसे बैंकों की वसूली अटकी हुई है.
रिजर्व बैंक की 1लाख 76हजार करोड़ रुपए की ‘सुरक्षित निधि’ को हाथ लगाने की नौबत सरकार पर आन पड़ी, यही समझना बहुत है.’
प्राइवेटाइजेशन की तरफ बढ़ रही है सरकार
शिवसेना ने लिखा, ‘कॉन्ट्रेक्ट मजदूरों के लिए ‘समान काम-समान वेतन’ की नीति लागू करने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मोदी सरकार इस बाबत कदम उठाने को तैयार नहीं. न्यूनतम वेतन देने के मामले में भी सरकार टालमटोल कर रही है. ‘इज ऑफ डुइंग बिजनेस’ के नाम पर कई मजदूर कानूनों को उद्योगपतियों के हित का ध्यान रखते हुए पुनर्गठित करने का सरकारी इरादा है. बड़े-बड़े सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण की तैयारी शुरू है. रेलवे के निजीकरण हेतु कदम उठाए गए हैं.’
मजदूर संगठनों के आस्तित्व का खतरा
सामना ने आगे लिखा है, ‘देश के मजदूरों और मजदूर संगठनों के अस्तित्व को ही मोदी सरकार के कार्यकाल में खतरा पैदा हो गया है* . सवाल मेहनतकशों की दाल-रोटी का और उनके अधिकारों का है इसलिए सर्वदलीय मजदूर संगठनों के साथ शिवसेना का बाघ भी उनके साथ दहाड़ेगा. आज की हड़ताल सांकेतिक भले ही हो, यह भविष्य में मजदूरों के उद्रेक का आगाज है और केंद्र के सत्ताधारी ये न भूलें कि मजदूरों के लड़ाई की चिंगारी हमेशा महाराष्ट्र से ही उठी है. ये मजदूर एकता का यलगार है. सरकार कब कुंभकरण की नींद से जागेगी.’