May 22, 2020
मजदूरों के अधिकारों पर हमलों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आंदोलन को माकपा ने दिया समर्थन
रायपुर.मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सीटू सहित देश के अनेकानेक ट्रेड यूनियनों द्वारा मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आयोजित संयुक्त विरोध आंदोलन का समर्थन किया है। आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिवमंडल ने कहा है कि कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था को उबारने के नाम पर मोदी सरकार देश की जनता पर अपना कारपोरेटपरस्त और सांप्रदायिक राजनीतिक एजेंडा थोपने पर आमादा है। कई श्रम कानूनों को दरकिनार करके मात्र प्रशासनिक आदेशों से वह ऐसे प्रावधान लागू कर रही है, जो देश को फिर से दास युग में धकेल देगी। वेतन और भत्तों में कोई वृद्धि किए बिना काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 किया जाना इसकी एक मिसाल है।
माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि इस सरकार ने अपने बहुप्रचारित 20 लाख करोड़ के पैकेज के जरिए एक ओर तो कारपोरेट लूट के लिए बैंकों के दरवाजों को और खोल दिया है, वहीं दूसरी और आत्मनिर्भरता की लफफाजी की आड़ में देश की सार्वजनिक संपत्ति को बेचने का अभियान तेज कर दिया है। रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए खोलने और निजीकरण की नीतियों से देश की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है और राष्ट्रवाद की लफ्फाजी करने वालों का चेहरा बेनकाब हो गया है। श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर जो मजदूर विरोधी कदम उठाए जा रहे हैं, वे इतने खतरनाक हैं कि भाजपा-संघ समर्थित ट्रेड यूनियन बीएमएस को भी इसका विरोध करना पड़ रहा है।
माकपा नेता ने कहा कि आर्थिक पैकेज देश और जनता के सामने खड़ी तात्कालिक चुनौती का समाधान नहीं करता और असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों को हजारों किलोमीटर पैदल चलने व भूखे मरने के लिए छोड़ दिया गया है। कोरोना संकट के कारण 14 करोड़ लोग बेरोजगार हो चुके हैं और 40 करोड़ लोग भुखमरी और गरीबी की रेखा के नीचे चले गए हैं। देश की जीडीपी के ऋणात्मक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके बावजूद यह पैकेज ना तो प्रवासी मजदूरों को राहत देता है, ना खेती-किसानी की समस्या को हल करता है और ना ही रोजगार खो चुके लोगों की कोई चिंता करता है, जबकि लोगों को पोषण आहार उपलब्ध करवाना और उनकी आजीविका की रक्षा करना और कोरोना संकट के कारण लोगों की रोजी-रोटी को हुए नुकसान की भरपाई करना इस सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए था। उल्टे इस सरकार ने केंद्रीय सरकार व सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर हमला करना शुरू कर दिया है और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को मालिकान की दया पर छोड़ दिया है।
कल आहूत ट्रेड यूनियनों के संयुक्त विरोध आंदोलन का समर्थन करते हुए माकपा नेता ने बताया कि बड़े पैमाने पर कल विभिन्न संगठनों द्वारा देश में एकजुटता कार्यवाही भी की जाएंगी। मजदूरों के अधिकारों पर हो रहे इन नए हमलों के खिलाफ आने वाले दिनों में आंदोलन को और धारदार बनाया जाएगा।