महाराष्ट्र सरकार ने CBI जांच में लगाया अड़ंगा, जारी किया नया फरमान
मुंबई. सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) मामले में CBI जांच अभी शुरू भी नहीं हुई है और महाराष्ट्र सरकार CBI के रास्तों में रुकावटें पैदा करने की जुगत में लग गई लगती है. महाराष्ट्र सरकार की मंत्री और मुंबई की मेयर ने सुशांत केस में जांच के लिए मुंबई आनेवाली सीबीआई की टीम को बिना परमिशन मुंबई में कदम रखने पर 14 दिन के आइसोलेशन में भेजने का ऐलान कर दिया है. इसपर महाराष्ट्र का विपक्षी दल ठाकरे सरकार को घेर रहा है.
बीएमसी ने आनन-फानन में कोरोना को लेकर गाइडलाइन जारी कर दिया है, जिसमें दूसरे प्रदेश से फ्लाइट से आने वाले लोगों को 14 दिनों का आईसोलेशन अनिवार्य कर दिया गया है.
मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर ने ऐलान किया है कि सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच करने वाले सीबीआई अफसरों को मुंबई आने से पहले बीएमसी से परमिशन लेना अनिवार्य होगा. ऐसा नहीं करने पर उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा. बीएमसी ने बीते 3 अगस्त को SOP जारी किया है.
SOP में कहा गया है कि अगर कोई सरकारी अधिकारी फ्लाइट से मुंबई आता है तो उसे क्वारंटीन में छूट पाने के लिए दो कार्य दिवस पहले संबंधित विभाग से NOC लेनी होगी. क्यों आ रहे हैं? कितना जरूरी काम है और क्यों क्वारंटीन में छूट चाहिए इन बातों की जानकारी देनी होगी. ये जानकारी नहीं देने और SOP का पालन नहीं करने पर सरकारी अधिकारी को क्वारंटीन कर दिया जाएगा.
उधर, बीजेपी इस पूरे केस में मुंबई पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठा रही है और जांच पूरी होने तक पुलिस कमिश्नर को छुट्टी पर भेजने की मांग कर रही है. उधर, महाराष्ट्र सरकार सुशांत सिंह केस की सीबीआई जांच को राजनीति से प्रेरित बता रही है.
शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अनिल परब ने कहा कि सीबीआई हो या ईडी अपने अपने दायरे में जांच कर रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन सीबीआई अधिकारी अगर मुंबई आ रहे हैं और वो कोरोना नेगेटिव का सर्टिफिकेट लेकर आते हैं तो हम उन्हें जांच करने से नहीं रोकेंगे. लेकिन हम चाहें तो उनकी (कोरोना) जांच कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह हमारा अधिकार है.
बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच के लिए हाल ही में मुंबई आए पटना के एसपी विनय तिवारी को नियमों का हवाला देते हुए बीएमसी ने क्वारंटीन कर दिया था.