April 20, 2020
मुख्यमंत्री के संबोधन पर माकपा ने कहा : मुख्यमंत्रीजी, अच्छा होता थोड़ा सोशल सिक्योरिटी पर भी बात कर लेते
रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संबोधन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि अच्छा होता यदि मुख्यमंत्री जी फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ ही थोड़ा सोशल सिक्योरिटी पर भी बात कर लेते।
आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि कोरोना संकट से निपटने में राज्य के नागरिक तो शासन का सहयोग कर रहे हैं, लेकिन असली सवाल है कि इस संकट ने आम जनता की आजीविका पर जो हमला किया है, उससे उबरने में राज्य सरकार नागरिकों की क्या अतिरिक्त मदद कर रही है? राहुल गांधी की बात को याद दिलाते हुए पार्टी ने कहा है कि केवल फिजिकल डिस्टेंसिंग से ही कोरोना संकट से नहीं निपटा जा सकता।
माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि पिछले एक माह से जारी अनियोजित लॉक डाउन के कारण पूरे देश के साथ ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था भी पटरी से उतर गई है। खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जो हमारे प्रदेश में खाद्यान्न सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की बुनियाद है, पर काफी गंभीर असर पड़ा है और खेती-किसानी चौपट होने के साथ ही ग्रामीणों की आजीविका को भारी नुकसान पहुंचा है। इसका सीधा नकारात्मक असर खरीफ फसल के उत्पादन पर भी पड़ेगा। लेकिन इस संबंध में ठोस कदम उठाने के बारे में सरकार पूरी तरह से मौन है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसी अतिरिक्त निवेश करने का उसका कोई इरादा नहीं है। केवल मुफ्त अनाज वितरण तथा मनरेगा से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में आई मंदी से बाहर नहीं निकला जा सकता। फिर राशन वितरण जैसे सीमित राहत में भी जो भ्रष्टाचार व धांधली हो रही है, उस पर भी मुख्यमंत्री मौन हैं। इसी प्रकार लॉक डाउन खुलने के बाद फिजिकल डिस्टेंसिंग का मकसद भी तभी पूरी तरह सफल हो पाएगा, जब किसानों और ग्रामीण मजदूरों के पास सुरक्षा किट होंगे। लेकिन इस मामले में भी इस सरकार ने आम जनता को अपने रहमो करम पर छोड़ दिया है।
माकपा नेता ने कहा कि केंद्र द्वारा राज्य सरकारों के साथ किया जा रहा भेदभाव जगजाहिर है और छत्तीसगढ़ भी उसका शिकार है। लेकिन अपने सीमित संसाधनों को भी जनता की सामाजिक सुरक्षा के लिए जुटाने में कांग्रेस सरकार की असफलता भी जाहिर है। उन्होंने कहा कि इस संकट के समय मनरेगा की सार्थकता तभी है, जब उसे कृषि कार्यों से जोड़कर कृषि संकट को हल करने के उपाय के रूप में अपनाया जाय। पराते ने सुझाव दिया है कि सरकार को किसानों के सभी उत्पादनों को समर्थन मूल्य पर खरीद कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए आम जनता तक पहुंचाने के लिए कदम उठाना चाहिए। इससे ग्रामीणों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में आए ठहराव को तोड़ा जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि अफवाहों पर ध्यान न देने की मुख्यमंत्री की अपील स्वागत योग्य हैं। लेकिन तबलीगियों से जोड़कर कोरोना-संदिग्ध मरीजों के आंकड़े जारी करके प्रशासन ने सांप्रदायिक ताकतों के मंसूबे ही पूरे किए हैं। संघी गिरोह ने इन आंकड़ों का उपयोग एक धर्म विशेष के अनुयायियों के खिलाफ नफरत और अफवाह फैलाने के लिए ही किया है। इससे प्रदेश की सांप्रदायिक सद्भाव के वातावरण में बिखराव पैदा हुआ है।
माकपा ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि प्रदेश की गरीब जनता और अर्थव्यवस्था के हित में सोशल सिक्योरिटी के कुछ ऐसे ठोस कदम उठाए, जिससे उनकी आजीविका के नुकसान की भरपाई हो सके। इन कदमों के बारे में पहले ही माकपा मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने सुझाव दे चुकी है। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीणों के दुख-दर्दों के प्रति केंद्र और राज्य सरकारों की संवेदनहीनता के खिलाफ कल 21 अप्रैल को पूरे देश में *भूख के विरूद्ध, भात के लिए* आंदोलन किया जाएगा।