मोदी सरकार ने 3 लाख अल्पसंख्यक युवाओं को दी रोज़गार की ट्रेनिंग

नई दिल्ली. 2014 में केन्द्र में सरकार बनाने के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दिया था. 2019 में जब पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा मोदी सरकार बनी तो पीएम मोदी ने एक बार फिर मुस्लिमों का विश्वास जीतने की बात दोहराई. अब एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जिससे ये पता चलता है कि मोदी सरकार ने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए सिर्फ नारे ही नहीं दिए बल्कि उनके उत्थान के लिए ज़मीन पर काम भी किए हैं.

केन्द्र सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के लगभग 3.25 लाख युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण के तहत नौकरी के लिए ट्रेनिंग दी. इस प्रशिक्षण के माध्यम से अल्पसंख्यक युवा अलग अलग क्षेत्रों में नौकरी के लिए हुनर प्राप्त करने में सफल रहे. लगभग 3 लाख 32 हज़ार अल्पसंख्यक युवा ने अलग अलग योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बने.

अल्पसंख्यक युवाओं ने इस प्रमुख योजनाओं में ट्रेनिंग प्राप्त की, जो कि मोदी सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं-

1. सीखो और कमाओ (Learn and Earn)
2. उस्ताद योजना (USTTAD)
3. नई मंज़िल
4. गरीब नवाज़ रोज़गार प्रशिक्षण

ये आंकड़े इन्हीं 4 योजनाओं के ज़रिए जिन अल्पसंख्यक युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उन युवाओं के हैं.  इसके अलावा अल्पसंख्यक छात्राओं और महिलाओं के लिए भी मोदी सरकार ने काम किए. ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक लगभग 1 लाख 52 हज़ार अल्पसंख्यक लड़कियों या महिलाओं को अलग अलग ट्रेनिंग दी गई. जिससे ये लड़कियाँ अपने अपने क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकीं. मोड्यूलर रोज़गार स्किल योजना भी इस में शामिल है.

इन योजनाओं के चलाने के लिए सरकार देश भर में लगभग 396 NGO, संस्था, संगठन की मदद ले रही है. अब देखना ये होगा कि क्या मोदी सरकार को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय का नज़रिया बदल पाएगा  और क्या मोदी सरकार अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने में सफल हो पाएगी ?


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