राम मंदिर पर 18 अक्टूबर को आएगा फैसला, संतों के बीच खुशी की लहर

नई दिल्ली. अयोध्या मसले में सुप्रीम कोर्ट अब 18 अक्टूबर के बाद कोई सुनवाई नहीं करेगी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने आज इस बात को स्पष्ट कर दिया है. साथ ही चार हफ़्तों में निर्णय आने को चमत्कार के रूप में बताया है. यह खबर आते ही अयोध्या के संतों में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक आशा प्रबल हो गई है. संत समाज सीजेआई के इस निर्णय का स्वागत कर गदगद महसूस कर रहा है तो वहीं बाबरी मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी भी इस फैसले को सही ठहरा रहे हैं. 

इकबाल अंसारी का कहना है कि कोर्ट आज ही फैसला करदे उस फैसले को मानने के लिए तैयार है. वह अब इस फैसले को लेकर कोई राजनीति नहीं करना चाहते और न ही फैसले को लटकाना चाहते हैं. अयोध्या के संत समाज भी राम मंदिर को लेकर आशा के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं. 

श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का कहना है कि भगवान श्री राम के जन्म स्थान को लेकर कोई संसय नहीं है. राम के लिए प्रमाण की जरूरत नहीं है. अयोध्या की सुंदरता उसका अस्तित्व भगवान श्री राम से ही है.  यदि कोई प्रमाण दे कि राम का जन्म कहीं और हुआ तो बताएं. आज जहां श्री राम विराजमान हैं, वही उनका जन्म स्थान है. उसपर कुछ कहना मूर्खता और अज्ञानता ही होगी. 

आचार्य सतेंद्र दास का कहना है कि अयोध्या मसला जटिल है. संविधान पीठ के पैनल को सुनवाई के लिए धन्यवाद है. अब नवंबर तक फैसला आने की आशा संत समाज रख रहा है. सितंबर 2010 को हाई कोर्ट ने जो निर्णय दिया था वह किसी को समझ नहीं आया था. सुप्रीम कोर्ट सूझबूझ से निर्णय देगा संतों को यह विश्वास है,  हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के महज 10 दिन बचे हैं. 

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