विश्व कैंसर दिवस पर जागरूकता अभियान की हुई शुरुआत
भोपाल. आदर्श योग आध्यात्मिक केन्द्र द्वारा आज प्रातः सुबह 8 बजे से 9 बजे तक दिनांक 4 फरवरी 2021स्वर्ण जयंती पार्क कोलार रोड भोपाल में विश्व कैंसर दिवस पर जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई | इस अवसर पर प्रमुख रूप से योग गुरु महेश अग्रवाल, मधुमेह मुक्त भारत अभियान के डॉ नरेंद्र भार्गव, आरोग्य मित्र योजना के डॉ गोविन्द भूतड़ा, संतोष, नरेंद्र विजयवर्गीय, आकाश मेहरा, जागृति कीर, श्वेता, निशिका सहित योग साधक उपस्तिथ रहें |
इस अवसर पर योग गुरु महेश अग्रवाल ने कहा कि कैन्सर, रोगों का एक वर्ग है जिसमें कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के साथ ही शरीर के दूसरे अंगों में भी फैलने और विनाश करने की क्षमता होती है। अधिकतर कैन्सर का कारण वातावरण होता है। शेष आनुवंशिकी से निर्धारित होते हैं। ज्यादातार कैन्सर को प्रारम्भिक अवस्था में ही उसके चिन्ह एवं लक्षण या स्क्रीनिंग द्वारा पहचाना जा सकता है। चिकित्सीय परीक्षण जैसे रक्त जाँच, एक्स-रे, सी.टी. स्कैन, एण्डोस्कोपी तथा बायोप्सी प्रमुख हैं। कुछ कैन्सर की रोकथाम उसको उत्पन्न करने वाले जोखिम कारकों जैसे, तम्बाकू चबाना, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, मदिरापान, यौन सम्बन्धित रोगों आदि से बचाव करके किया जा सकता है।
विश्व कैंसर दिवस की स्थापना अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (UICC) द्वारा की गई। विश्व भर में 04 फरवरी को हर साल विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। साल 2019 से 2021 तक तीन साल के लिए विश्व कैंसर दिवस का विषय रखा गया है “मैं हूं और मैं रहूंगा” है। जिसका मतलब है कि हर किसी में क्षमता है कि वह कैंसर से लड़ सकता है। दुनिया की सभी जानलेवा बीमारियों में कैंसर सबसे ख़तरनाक है क्योंकि कई बार इसके लक्षणों का पता ही नहीं चलता। जब इस बीमारी के होने का खुलासा होता है, तब तक काफी देर हो चुकी है और कैंसरे शरीर में फैल चुका होता है। इसी वजह से कई लोगों को उचित इलाज का समय ही नहीं मिल पाता और उनकी मौत हो जाती है। अगर वक्त पर कैंसर की बीमारी का पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है।
कैंसर से बचाव के उपाय और ख़तरों के बारे में आम लोगों को जागरुक करने के लिए विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। लोगों को लगता है कि यह बीमारी छूने से फैलती है इसलिए कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को समाज में घृणा और अछूत के रूप में देखा जाता है। आम लोगों में कैंसर से संबंधित विभिन्न प्रकार के सामाजिक मिथक हैं जैसे कि कैंसर पीड़ित के साथ रहने या स्पर्श से उन्हें भी ये घातक बीमारी हो सकती है। इस तरह के मिथक को ख़त्म करने के लिए भी ये दिन मनाया जाता है। इसके होने के कारण, लक्षण और उपचार आदि जैसे कैंसर की सभी वास्तविकता के बारे में सामान्य जागरुकता बनाने के लिए इसे मनाया जाता है।
कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को अलग से उपचारित न किया जाए, उन्हें समाज में एक आम इंसान की तरह जीने का अधिकार होना चाहिए और कोई भी रिश्ता उनके लिए बदलना नहीं चाहिए। अपने रिश्तेदारों के द्वारा उनकी हर इच्छाओं को पूरा करना चाहिए भले ही उनके जीने की उम्मीद कम क्यों न हों। ये बहुत ज़रूरी है कि उन्हें एक आम इंसान की तरह अच्छा महसूस कराना चाहिए और ऐसा प्रतीत नहीं कराना चाहिए जैसे उनको कुछ उपचार दिया जा रहा है | उन्हें उन लोगों की जीवनी पढ़ने को दें जिन्होंने कैंसर को हराया है | उनके अनुभवों को जानेंगे, तो रोग का सामना आसान हो जायेगा | कैंसर पर नियंत्रण पाना ज़रूरी है ये संभव हो सकता है यदि योग प्राकृतिक चिकित्सा एवं आत्म अनुशासन दिनचर्या में परिवर्तन शुभचिंतन, उपवास, अच्छी नींद, प्राणायाम के अभ्यास कपालभाति भस्त्रिका अग्निसार,गहरी श्वास के अभ्यास किए जाये |