शरदपूर्णिमा के अवसर पर आदर्श योग आध्यात्मिक केन्द्र के योग साधकों द्वारा सामूहिक योग अभ्यास किया गया
भोपाल. शरदपूर्णिमा के अवसर पर आदर्श योग आध्यात्मिक केन्द्र के योग साधकों द्वारा सामूहिक योग अभ्यास करते हुए सभी के स्वास्थ्य के लिए शुभकामनायें देते हुए उत्साह पूर्वक स्वर्ण जयंती पार्क कोलार रोड भोपाल में मनाया गया | प्रमुख रूप से योग गुरु महेश अग्रवाल राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्राप्त स्वास्थ्य प्रचारक नरेंद्र भार्गव, पियूष मित्तल, लोकेश, दिनेश संघी, संतोष, श्रीमती चंद्रमणि श्रीमती किरण वाघवानी, श्रीमती पलक श्रीमती क्षिप्रा जैन, श्वेता, हर्षित, काशवी उपस्थित रहें |
इस अवसर पर योगाचार्य महेश अग्रवाल ने कहा की हमारे सभी त्यौहार योग की शिक्षा देते है, यदि हम ध्यान पूर्वक अध्ययन करें तो वैज्ञानिक तथ्य भी होते है, योग में शक्ति है जो व्यक्ति की सभी बुराइओं को दूर करता है, शरद पूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व है, रात चंद्रमा से बढ़ जाती है औषधियों की ताकत, हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह की शुरुआत से कार्तिक महीने के अंत तक शरद ऋतु रहती है। शरद ऋतु में 2 पूर्णिमा पड़ती है। इनमें अश्विन माह की पूर्णिमा महत्वपूर्ण मानी गई हैं। इसी पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। चंद्र व्यापिनी पर्व है | इसे कोजगार पूर्णिमा भी कहते हैं वहीं इसके अलावा जागृति पूर्णिमा या कुमार पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार कुछ रातों का बहुत महत्व है जैसे नवरात्रि, शिवरात्रि और इनके अलावा शरद पूर्णिमा भी शामिल है। श्रीमद्भागवत के अनुसार चन्द्रमा को औषधि का देवता माना जाता है।
इस दिन चांद अपनी 16 कलाओं से पूरा होकर अमृत की वर्षा करता है। मान्यताओं से अलग वैज्ञानिकों ने भी इस पूर्णिमा को खास बताया है, जिसके पीछे कई सैद्धांतिक और वैज्ञानिक तथ्य छिपे हुए हैं। इस पूर्णिमा पर चावल और दूध से बनी खीर को चांदनी रात में रखकर प्रात: 4 बजे सेवन किया जाता है। इससे रोग खत्म हो जाते हैं और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वैज्ञानिक शोध के अनुसार चांदी का विशेष महत्व एक अन्य वैज्ञानिक शोध के अनुसार इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। इस दिन बनने वाला वातावरण दमा के रोगियों के लिए विशेषकर लाभकारी माना गया है। चंद्रमा से बढ़ जाता है औषधियों का प्रभाव एक अध्ययन के अनुसार शरद पूर्णिमा पर औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है। यानी औषधियों का प्रभाव बढ़ जाता है रसाकर्षण के कारण जब अंदर का पदार्थ सांद्र होने लगता है, तब रिक्तिकाओं से विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है। लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है।
सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है। खीर का महत्व वैज्ञानिकों के अनुसार दूध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है और इस खीर का सेवन सेहत के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इससे पुनर्योवन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है। उन्होंने कहा की वर्तमान में मास्क का उपयोग करें एवं आपस में स्नेह शुभ भाव रखते हुए दुरी रखें, घर पर रहकर ही योग करें | आदर्श योग आध्यात्मिक केन्द्र लगातार कई वर्षो से स्वर्ण जयंती पार्क में एवं वर्तमान में 7 महीनों से ऑनलाइन फेसबुक के माध्यम से निशुल्क सुबह एवं शाम को योग के द्वारा लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की कला सीखा रहा है कोई अवकाश नहीं रखते हुए सभी धार्मिक सामाजिक राष्ट्रीय त्यौहार उत्साह पूर्वक मनाते है साधकों के जन्मदिन पर वृक्षारोपण के साथ लोगों को स्वच्छता सुरक्षा के प्रति भी जागरूक किया जाता है |