सिंधु, मंधाना और जेमिमाह ने बताया उन ‘खास दिनों’ में कैसे खेलें महिला खिलाड़ी
नई दिल्ली. पीवी सिंधु (PV Sindhu) मतलब बैडमिंटन जगत का चमकता सितारा और स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) मतलब भारतीय महिला क्रिकेट की सचिन तेंदुलकर. इनके साथ छोटी सी उम्र में पूरी दुनिया की गेंदबाजों के छक्के छुड़ा रहीं जेमिमाह रोड्रिगेज (Jemimah Rodrigues) की जुगलबंदी. इन तीनों ने मिलकर महिला खिलाड़ियों को एक ऐसी टिप्स दी है, जिसे खेलों में ही नहीं बल्कि दुनिया के हर फील्ड में महिलाओं की राह में बहुत बड़ा रोड़ा माना जाता है. यहां तक कि इस टॉपिक पर अक्षय कुमार जैसे बालीवुड स्टार एक पूरी फिल्म भी बना चुका है. ऐसे में इन तीन खिलाड़ियों ने बताया है कि महिला खिलाड़ियों को उन ‘खास दिनों’ से कैसे निपटना चाहिए.
मेंटली मजबूत बनो और शारीरिक फिट
पीवी सिंधु का मानना है कि मेंशुरेशन यानी मासिक धर्म के दिनों में कोई भी खेल खेलना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. लेकिन उन्होंने कहा कि इससे निपटने का सबसे बढ़िया मंत्र है “मेंटली मजबूत बनो और शारीरिक रूप से फिट रहो.” सिंधु ने कहा कि कई बार ऐसा होता था कि इसकी वजह से मुझे मैच छोड़ने पड़े. लेकिन फिर मैंने ठाना कि लगे रहना है. बाद में समझ में आया कि ये एक मेंटल फेज है. अगर आप ठान लेते हैं कि मुझे डाउन नहीं होना है तो आप इन दिनों में भी आम दिनों की तरह रह सकते हैं. मंधाना ने भी सिंधु की बात का समर्थन किया. जेमिमा ने कहा कि सभी महिलाओं को सेल्यूट होना चाहिए कि इस हालत में भी काम में लगी रहती हैं.
मंधाना-जैमी ने चालू किया है यूट्यूब शो
स्मृति मंधाना और जेमिमाह रोड्रिगेज ने देश में कोरोना वायरस के कारण चल रहे लाकडाउन के दौरान समय बिताने के लिए मिलकर एक यूट्यूब शो चालू किया है, जिसका नाम उन्होंने ‘डबल ट्रबल’ रखा है. इन दोनों ने अपने पहले शो में स्पेशल गेस्ट के तौर पर पीवी सिंधु को बुलाया था. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मदद से किए गए इस शो में ही पीवी सिंधु ने अपने इस डर समेत कई तरह की बातों से पर्दा उठाया.
सिल्वर सिंधु नाम रखे जाने का लगता था सिंधु को डर
सिंधु ने बताया कि ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्होंने 2017-18 में करीब 7 या 8 सिल्वर मेडल जीते. लोगों ने कहना चालू कर दिया था कि सिंधु को फाइनल फोबिया है. ये सुनकर उन्हें डर लगने लगा था कि लोग उनका नाम “सिल्वर सिंधु” रख देंगे. उन्हें इस नाम के बारे में सोचने पर भी डर लगता था. इस डर ने सिंधु को हर मैच के बाद अपनी गलतियां तलाशने और उन पर पहले से ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा दी.
वर्ल्ड चैंपियनशिप में पूरा हुआ सपना
सिंधु ने बताया कि आखिरकार मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर इस डर से बाहर निकलीं. उन्होंने कहा, ये मेरी 5वीं वर्ल्ड चैंपियनशिप थीं. मैं 2 ब्रॉन्ज और 2 सिल्वर जीत चुकी थीं. लेकिन मैंने अपने पुराने सारे मैच भूले और केवल फाइनल पर ध्यान लगाया. यह तरीका काम कर गया.
मंधाना ने याद दिलाई खुशी वाली चीख की याद
मंधाना ने सिंधु को खुशी से भरी हुई उस चीख की भी याद दिलाई, जिसने वर्ल्ड चैंपियनशिप देख रहे हर इंसान को हैरान कर दिया था. सिंधु हंसते हुए बोली कि वो पहली बार हुआ था. दरअसल मैं बेहद एक्साइट हो गई थी. इसके बाद हंसते हुए कहा, लेकिन बस एक बार कोर्ट पर ही ऐसा हुआ है. चीखने के बाद मैं बेहद नर्वस हो गई थी कि ये क्या कर दिया. मुझे शर्म आ रही थी.
सिंधु को 4-5 घंटे तो मंधाना को चाहिए 10 घंटे की नींद
मंधाना ने अगले सवाल में जैमी की खिंचाई करते हुए सिंधु से पूछा कि उसके लिए नींद की कितनी अहमियत है। मंधाना ने कहा, जैमी को तो 4-5 घंटे भी दे दो तो भी वो इतना ही उछलती घूमती है पर मुझे कम से कम 10 घंटे की नींद चाहिए और मैं इसके बाद भी सुस्त दिख सकती हूं. इस पर हंसते हुए सिंधु बोली, इस बार मैं जैमी की साइड में हूं और मेरे लिए भी 4-5 घंटे की नींद ही बहुत होती है.
2012 को बताया अपना टर्निंग प्वाइंट
मंधाना ने सिंधु से उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट पूछा तो उन्होंने कहा कि “मेरे हिसाब से साल 2012 मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट था. मैं महज 17 साल की थी और मैंने एक मैच में चीन की उस समय की ओलंपिक चैंपियन ली जुईरुई को चाइना सुपर सीरीज में हरा दिया था. मंधाना ने पूछा कि आपने कोर्ट पर बहुत जोर से चिल्लाया था तो सिंधु ने कहा कि, “बस कोर्ट पर ही ऐसा हुआ था, 4-5 घंटे जैमी को और मुझे 10 घंटे भी कम.”