हेल्दी समझकर ज्यादा न खाएं डायजेस्टिव बिस्किट, कहीं पेट में न शुरू हो जाए ये गड़बड़
आजकल डायजेस्टिव बिस्किट खाने के फायदे गिनाने वाले विज्ञापन की टीवी पर भरमार है और लोग इस पर यकीन भी कर रहे हैं। तो क्या डाइजेस्टिव बिस्किट्स सच में सेहत के लिए फायदेमंद हैं?
डाइजेस्टिव बिस्किट को प्रमोट करने वाले विज्ञापन हमें खाने के बीच के अंतराल के लंबे होने या भूख सहने की आदत को लेकर डराते हैं। इससे बचने के लिए हमें डाइजेस्टिव बिस्किट को बेहतर ऑप्शन बताया जाता है। डिपार्टमेंटल स्टोर के बिस्किट सेंगमेंट में डायजेस्टिव बिस्किट के नए-नए ब्रांड्स की भरमार देखकर तो यही लगता है। शुगर, फैट और सोडियम फ्री होने के दावे करनेवाले इन बिस्किट में से ज्यादातर में छिपे होते हैं ढेर सारी शक्कर, फैट, सोडियम और रिफाइंड आटा। साथ ही आपको इन्हें खाने के लिए ललचाने हेतु जायका बढ़ाने वाले केमिकल यानी टेस्ट इनहेंसर भी मिलाए जाते हैं। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले इंग्रीडियंड्स हमारी सेहत पर क्या असर डालते हैं और क्या डायजेस्टिव बिस्किट वाकई हमारी सेहत के लिए इतने फायदेमंद हैं?
डाइजेस्टिव बिस्किट असल में डॉक्टर्स की सलाह पर कब्ज़ और खराब डायजेशन से जूझ रहे पेशेंट के लिए बनाए गए। डाइजेस्टिव बिस्किट को बाजार में मिलने वाले दूसरे बिस्किट्स के मुकाबले ज्यादा फाइबर युक्त, प्रोटीन और विटामिन और मिनरल होने के दावे के साथ ही कम कॉलेस्ट्रेल वाले और फैट फ्री बताया जाता है और बतौर स्नैक्स चाय के साथ लेने की सलाह दी जाती है। इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए या इस बीमारी से बचने के लिए बेहतरीन स्नैक्स के तौर पर पेश किया जाता है।
ग्लूटेन की ज्यादा मात्रा बना सकती है आपको बीमार
हर मर्ज और मरीज अलग होता है, इसलिए जरूरी है किसी भी प्रॉडक्ट पर आंखें बंद कर भरोसा करने से पहले उसे बनाए जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इंग्रीडिएंट्स के बारे में ध्यान से पढ़ें। डाइजेस्टिव बिस्किट की बजाए ड्रायफ्रूट्स, स्प्राउट्स या फल को अपने स्नैक्स में शामिल करने की कोशिश करें। या चावल, साबूदाने या नारियल के आटे के बने नमकीन या ऐसी ही दूसरी चीजें, जो आपको किसी भी तरह के नुकसान, एलर्जी या बीमारी से बचाकर सेहतमंद रखने में मदद कर सकते हैं।