मोदी सरकार मजदूरों का रोजगार छीनना चाहती है – दीपक बैज


रायपुर।
 मनरेगा कानून में केन्द्र सरकार के द्वारा किये गये संशोधन के विरोध में कांग्रेस पूरे देश में मनरेगा बचाओ संग्राम चला रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयो में एक दिवसीय मौन व्रत रख कर कांग्रेसजनों ने विरोध जताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज जगदलपुर में तथा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सक्ती में, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिवगण एस. सम्पत दुर्ग, जरिता लैतफलांग अंबिकापुर, विजय जांगीड़ रायपुर, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव रायपुर सहित वरिष्ठ नेतागण अपने क्षेत्रों में मौन व्रत में शामिल हुये। मनरेगा बचाओ संग्राम चरणबद्ध तरीके से फरवरी माह तक चलेगा।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मोदी सरकार मजदूरो का रोजगार छीनना चाहती है। मनरेगा बंद करने से ग्रामीण क्षेत्र में रोजी रोटी में संकट आयेगा। मोदी सरकार ने “सुधार“ के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जानबूझकर की गई कोशिश है। अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है। मनरेगा के तहत, सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोज़गार बंद करने की इजाज़त देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मज़दूरों को महीनों तक रोज़गार से दूर रखा जा सकता है। मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60- 40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।

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