गायत्री प्रज्ञा पीठ में ‘युवा दिवस’ पर वैचारिक विमर्श एवं ज्ञानकुंभ : नाटकों, वाद-विवाद एवं प्रेरक नारों से गूँजे स्वामी विवेकानंद के आदर्श
बिलासपुर: स्वामी विवेकानंद जी की जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन अवसर पर ‘दीया’ (डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन) अखिल विश्व गायत्री परिवार एवं गायत्री प्रज्ञापीठ लिंगियाडीह के संयुक्त तत्वावधान में गायत्री प्रज्ञा पीठ लिङ्गियाडीह में एक वृहद एवं भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया, बल्कि स्वामी जी के “उठो, जागो” के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी जी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि के माध्यम से किया गया. तत पश्चात् विधिवत समस्त अतिथियों एवं विद्यार्थियों के स्वागत अभिनंदन किया गया. इसके बाद सरस्वती वंदना, आशीष गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा लोक नृत्यों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, स्वामी जी के माँ काली दर्शन नाटिका के माध्यम से कार्यक्रम की श्रृंखला आगे बढ़ी. विशिष्ट अतिथि डॉ. सचिन यादव ने बच्चों को स्वामी जी के विचारों से अवगत कराया एवं कहा कि विद्यार्थी जीवन में यदि आगे बढना है तो स्वामी विवेकानंद जी के विचार बहुत प्रभावशील है इसके लिए हमें अपने लक्ष्य पर आत्मविश्वास एवं साहस के साथ अग्रसर होना पड़ेगा। मुख्य अतिथि श्री शंकरलाल पाटनवार जी ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में बच्चों को चाहिए कि वे अपनी एकाग्रता, कौशल और प्रतिभा पर मुख्य रूप से काम करें क्योंकि वही उनको उनके लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करेगी. साथ ही पाटनवार जी ने यह भी बताया कि स्वामी विवेकानंद जी ने अपने जीवन में साहस, आत्मविश्वास और एकाग्रता के माध्यम से स्वयं को एक आदर्श व्यक्तित्व बनाया ठीक उसी प्रकार सभी बच्चों को बनने का और उन गुणों को अपने अन्दर उतारने का प्रयास करना चाहिए.


