अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया ट्रंप टैरिफ
वाशिंगटन. अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों के खिलाफ लगाए गए व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को शुक्रवार को रद्द कर दिया। अदालत द्वारा 6-3 के बहुमत से सुनाये गये इस फैसले का केंद्र बिंदु आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत लगाए गए टैरिफ हैं, जिनमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक पारस्परिक शुल्क भी शामिल हैं। यह ट्रंप के व्यापक एजेंडे का पहला महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सीधे देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष आया है। शीर्ष ने कहा कि संविधान बहुत स्पष्ट रूप से कांग्रेस को कर लगाने की शक्ति देता है, जिसमें शुल्क भी शामिल हैं। इस फैसले के बाद भारत पर लगा 18 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ भी अवैध घोषित हो गया है। उधर, ट्रंप ने फैसले को शर्मनाक बताया है। यह फैसला उस समय आया जब ट्रंप राज्यों के गवर्नरों के साथ बैठक कर रहे थे।
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखे गए फैसले में निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें रिपब्लिकन प्रेसिडेंट का 1977 के इस कानून का इस्तेमाल उनके अधिकार से ज्यादा था। रॉबर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए लिखा कि प्रेसिडेंट को टैरिफ लगाने की अपनी खास ताकत को सही ठहराने के लिए कांग्रेस से मिली साफ मंजूरी दिखानी होगी। उन्होंने आगे लिखा कि वह ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कराधान की शक्ति का कोई भी हिस्सा कार्यपालिका शाखा को नहीं सौंपा। जस्टिस सैमुअल एलिटो, जस्टिस क्लेरेंस थॉमस और जस्टिस ब्रेट कावानाघ ने ट्रंप के लगाए टैरिफ का समर्थन किया।


