तकनीक और परंपरा का संगम: गोदरेज ने अपनी एडवांस ‘हैंडलूम-फ्रेंडली’ वाशिंग मशीन्स के साथ हथकरघा विरासत को फिर से जीवित करने का किया अहम प्रयास

 

मुंबई.  इस गणतंत्र दिवस पर, गोरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अप्लायंसेज़ बिज़नेस ने ‘टेस्टेड फॉर हैंडलूम्स’ पहल के ज़रिये भारत की सदियों पुरानी हथकरघा विरासत को फिर से जीवित करने की दिशा में एक सार्थक कदम उठाया है। हैंडलूम-फ्रेंडली फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीन तकनीक के साथ, ब्रांड हथकरघा कपड़ों की देखभाल को आसान बना रहा है, ताकि भारतीय गर्व के साथ अपने हथकरघा वस्त्र अधिक बार पहन सकें।

भारत के हर राज्य की अपनी खास हथकरघा परंपरा है—केरल का कसावू, कर्नाटक का मैसूर सिल्क, तेलंगाना का पोचंपल्ली इकत, महाराष्ट्र की पैठणी, लखनऊ की चिकनकारी, गुजरात और राजस्थान की बांधनी, असम का मूगा सिल्क और कई अन्य। इनमें से कई को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा भी मान्यता दी गई है। सदियों पुरानी ये बुनाई परंपराएं भारत की समृद्ध और विविध संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। इसके बावजूद, हथकरघा क्षेत्र को पुनरुद्धार की तत्काल आवश्यकता है, और इसके लिए उपभोक्ताओं को इन कपड़ों को अधिक अपनाने की जरूरत है।

अक्सर लोग हथकरघा कपड़ों को ज़्यादा देखभाल वाला मानते हैं। कपड़े खराब होने की आशंका के कारण अधिकतर लोग केवल हाथ से धुलाई या ड्राई-क्लीनिंग पर निर्भर रहते हैं, जिससे हथकरघा कपड़े कम खरीदे और कम पहने जाते हैं।

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