Budget 2021 : चीन के साथ जारी तनातनी के बीच रक्षा बजट पर रहेगा फोकस, सरकार के सामने ये है बड़ी चुनौती
नई दिल्ली. सोमवार यानि कि एक फरवरी को देश का आम बजट पेश होने जा रहा है. कोरोना काल में आ रहा यह बजट कई मायनों में बेहद खास है और इस पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं. अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूती से खड़ा करने के साथ ही सरकार के सामने जो एक बड़ी चुनौती है, वो है देश की सुरक्षा को भी मजबूत बनाए रखना. ऐसे में आम बजट में रक्षा बजट के लिए आवंटित होने वाली रकम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
चीन के साथ तनाव ने बढ़ायी चिंता
बीते साल मई माह से लद्दाख सीमा पर भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं. कई दौर की बातचीत होने के बाद भी सीमा पर तनाव कम नहीं हो सका है. यही वजह है कि चीन की तरफ से मिल रही चुनौती को देखते हुए रक्षा बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. बता दें कि चीन का साल 2020 में आधिकारिक बजट 179 बिलियन डॉलर था, जो कि भारत के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है. इसके साथ ही चीन अपने तय बजट से इतर भी कुछ मदों में पैसा खर्च करता है.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक साल 2019 में चीन का रक्षा बजट करीब 240 बिलियन डॉलर के करीब रहा. यही वजह है कि चीन के साथ जारी तनाव को देखते हुए भारत में भी रक्षा बजट को बढ़ाए जाने की उम्मीद की जा रही है.
सेना का आधुनिकीकरण किए जाने की जरूरत
आधुनिक समय में लड़ाई के बदले हुए तौर-तरीकों को देखते हुए सेना के आधुनिकीकरण की मांग लंबे समय से की जा रही है. हालांकि इस मांग को पूरा होने में भारी-भरकम बजट आड़े आ रहा है. भारतीय सेना को सैन्यबल के बजाय अब तकनीक पर अपनी निर्भरता बढ़ाने की जरूरत है.
रक्षा विशेषक्ष मानते हैं कि भविष्य में युद्ध में जीत उसी देश की सेना की होगी, जिसकी नौसेना मजबूत होगी. ऐसे में भारत को भी अपनी नौसेना में निवेश बढ़ाने की जरूरत है. हिंद महासागर में चीन की बढ़ती चुनौती के चलते भी नौसेना को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है. ऐसे में इस बात पर सभी की निगाहें रहेंगे कि बजट में सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है? इसके साथ ही पाकिस्तान से साथ लंबे समय से जारी तनाव के चलते सेना के एक साथ दो मोर्चों पर लड़ने की आशंका भी बनी हुई है.
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए इतना बजट हुआ था आवंटित
पिछले आम बजट में यानि कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए रक्षा मंत्रालय को करीब 4,71,378 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था. जिसमें सुरक्षा बलों की सैलरी, पेंशन, आधुनिकीकरण और मेंटिनेंस, रिसर्च आदि का काम किया जाना था. यह देश की कुल जीडीपी का करीब 2 फीसदी था.