मलाई चाटतीं बिल्लियां

राजा साहब की सरकार इन दिनों भारी परेशान चल रही है।जब सरकार साहेब ही परेशान हैं तो मंत्रिगण कैसे शांत रह सकते हैं?परेशानी की वज़ह यह है कि विभिन्न योजनओं के लिए अरबों,खरबों रुपये का आबंटन दिया गया पर विकास कुछ नहीं हुआ।जनता वहीं की वहीं खड़ी जिंदाबाद,मुर्दाबाद कर रही है। विकास किस चिड़िया का नाम है यह ग्रामीणों को नहीं पता है।सरकार ने आनन-फानन विभागों को नोटिस जारी कर दिया।
सभा-संसदों में प्रश्नकाल आरंभ हो गया।सवाल पर सवाल उठने लगे,वॉक आउट होने लगा।मेज़ ,टेबिल,कुर्सियां टूटने लगीं।आखिर विभाग प्रमुखों को आदेश दिया गया कि मिले आबंटनों और खर्च की गई राशियों का हिसाब,कार्यों के ब्योरे शीघ्र प्रस्तुत करें।अब तो विभाग सकते में आ गए।कोई जवाब विभाग प्रधानों को नहीं सूझ रहा था।ऐसे मौके पर एक चपरासी विभाग के काम आया।दरअसल ऑफिस के फाइल कक्ष में चूहे हो गए थे।चपरासी ने पिंजरे में एक मोटा-ताजा चूहा फांसा और अफसर के सामने पेश कर दिया।
अफसर तत्काल चूहे का पिंजरा लेकर मिनिस्टर के बंगले जा धमके और कहा-सर फाइलों को चूहे कुतर गए हैं अतः न तो आबंटन का हिसाब दिया जा सकता और न खर्च की गई राशि,विकास कार्यों का ही कोई ब्योरा दिया जा सकता।सवालों से त्रस्त मिनिस्टर साहब ने भी सभा पटल पर फाइल कुतरने की बात रख दी।इतना ही नहीं उन्होंने वह चूहा भी प्रमाण के तौर पर पेश कर दिया।इस तरह रास्ता खुला तो हर विभाग से वही जवाब और प्रमाण प्रस्तुत किया जाने लगा।सैकड़ों चूहे प्रमाण के तौर पर जमा हो गए जिसे सुरक्षित रखने भर सरकार पर आ गया।अब सरकार साहेब की नींद हराम हो गई।उन्होंने तुरंत पांच-पांच करोड़ रुपये का आबंटन हर विभाग को जारी कर दिया ताकि चूहों को गिरफ्तार कर पिंजरे की कैद दी जा सके।चूहे पकड़ने पिंजरे के लिए टेंडर निकाले गए,ठेके हुए।उसी तर्ज पर सब कुछ हुआ जिस तर्ज पर पूर्व से होता रहा है।
इधर सरकार ने अपने समर्थकों का दल फॉरेन कंट्रीज की ओर रवाना किया कि यह पता लगाने ,सरकारें चूहों से कैसे निपट रही है?पांच करोड़ रुपये भी निपट गया पर चूहे नहीं निपटे।चूहेमार दवाएं एवं यंत्रों का उपयोग किया गया पर चूहे नहीं मरे।आखिर सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा कि विभागों में बिल्लियां पाली जाएं।
अफसरों ने तत्काल इस्टीमेट बनाया और बिल्लियों के पालन-पोषण के लिए दूध-रोटी का आबंटन मांग कर दी। जनता की सरकार थी वह कैसे चुप बैठे सकती थी काली, पीली,भूरी,सफेद,चितकबरी विभिन्न प्रकार की शिकारी बिल्लियां वृहत पैमाने पर विदेशों से आयात की गईं।इसके बाद विभाग प्रधानों की राजधानी में बैठक कर बिल्लियां सौंप दी गईं।यह ताकीद भी की गई कि बिल्लियों का समुचित रख-रखाव किया जाए।ये बिल्लियां सामान्य बिल्लियां नहीं हैं,देश के विकास की कुंजियां हैं।इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब विभागों के मत्थे बिल्लियों के रख-रखाव के साथ दूध-रोटी के इंतज़ाम लफड़ा सामने आ गया। विभागों में व्यय भार बढ़ा तो उन्होंने बजट की मांग सौंप दी। सरकार ने हर विभाग को गोशाला स्थापित करने का निर्देश दे दिया।इधर गोशाले स्थापित हुए उधर अफसरों ने डेयरी एवं डेली नीड्स के प्रतिष्ठान स्थापित कर लिए।उनके सारे फड़तूस बच्चे काम से लग गए।इस तरह बेरोजगारी का ग्राफ गिरने लगा।सरकार खुश हो गई,चलो योजनाएं धीरे-धीरे ही सही सफल हो रही हैं।बेरोजगारी की दर कम हुई है।
चूहे फिर भी नहीं मरे।बिल्लियां मलाई चाटकर,दूध पीकर और हट्टी-कट्टी हो गईं जबकि फाइलें कुतर-कुतरकर चूहों का वज़न और ही बढ़ गया।बिल्लियां डकार मार कर फाइल रूम में आराम फरमातीं और चूहे कबड्डी खेलते हैं।आज भी मलाई बिल्लियां ही चाट रही हैं और चूहे फाइल रूमों में मज़े में कबड्डी खेलते हैं।यहां तक कि अब बिल्ली और चूहों में यारी हो गई है।जनता मौन है।सरकार सन्तुष्ट है।विकास हो रहा है।बिल्लियों की आबादी बढ़ रही है और चूहों की संख्या गणना से बाहर हो गई है।अब सभा-संसद में कोई सवाल ही नहीं उठता।जनता जरूर महंगाई की बोझ से दबती जा रही है।

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