Death Anniversary: सख्त मिजाज डायरेक्टर थे हृषिकेश मुखर्जी, ‘जय-वीरू’ दोनों घबराते थे
नई दिल्ली. एक बार केबीसी के सेट पर जब धर्मेंद्र (Dharmendra) आए तो जय (अमिताभ बच्चन) और वीरू (धर्मेंद्र)दोनों ने स्वीकार किया कि एक ही डायरेक्टर था, जिससे उन्हें डर लगता था. वो डायरेक्टर कोई और नहीं बल्कि अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के साथ कई सुपरहिट फिल्में बनाने वाले हृषिकेश मुखर्जी (Hrishikesh Mukherjee) थे. उनकी फिल्म के सेट पर लेट आने की तो किसी की हिम्मत ही नहीं थी, और ना ही किसी को स्टार वाले नखरे दिखाने की. अमिताभ और जया तो उन्हें गॉडफादर की तरह मानते थे. आज हृषिकेश मुखर्जी की पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें…
‘आनंद’ के क्लाइमेक्स सीन की तैयारी
एक बार एक सीन शूट होना था, जो ‘आनंद’ फिल्म का क्लाइमेक्स सीन था. इस सीन में आनंद यानी राजेश खन्ना मर जाते हैं और उसके बाद उसके मित्र भास्कर यानी अमिताभ बच्चन को उनके मरने पर अपनी प्रतिक्रिया देनी थी. तब अमिताभ बच्चन काफी तैयारी के साथ आए थे, फूट फूट कर रोने के लिए, रोते रोते चिल्लाने के लिए.. वो इस सीन को इतना यादगार बनाने के मूड में थे कि लोग भूल न सकें. वैसे भी फिल्म के लीड हीरो राजेश खन्ना थे और अमिताभ को उसी छोटे रोल में अपनी छाप छोड़नी थी.
कुछ और ही थी ह्रषि दा की प्लानिंग
लेकिन ह्रषि दा ने अमिताभ की सारी प्लानिंग पर पानी फेर दिया. उन्होंने बच्चन को ये सब करने से साफ मना कर दिया. वैसे भी वो अपने सीन पहले से अपने एक्टर्स को भी नहीं बताते थे. पहली बात यह कि इस सीन में मुखर्जी नहीं चाहते थे कि ऑडियंस का फोकस आनंद से हटकर अमिताभ के रोल भास्कर पर हो. इससे लीड करेक्टर आनंद के कमजोर हो जाने का डर था. दूसरी बात यह भी कि ह्रषि दा अमिताभ को व्यक्तिगत तौर पर उभारना भी चाहते थे. उन्होंने अमिताभ से कहा कि तुम्हें रोना नहीं हैं बल्कि आनंद पर गुस्सा होना है, कि वो इतनी जल्दी इस दुनियां से क्यों चला गया, तुमको अकेला छोड़कर. तब मन मारकर बच्चन को वही करना पड़ा, जो मुखर्जी ने बताया. इस तरह फिल्म का फोकस भले ही आनंद पर ही रहा, लेकिन बाबू मोशाय अमिताभ बच्चन भी छा ही गए. उनका रोल कहीं से भी कमजोर नहीं लगा.
धर्मेंद्र भी हुए गुस्से के शिकार
ऐसा नहीं था कि खाली अमिताभ ही मुखर्जी की सख्ती का शिकार होते थे. धर्मेंद्र को भी हृषिकेश मुखर्जी का गुस्सा झेलना पड़ा था और धर्मेंद्र की आवाज नहीं निकलती थी ह्रषि दा के आगे. ‘चुपके चुपके’ फिल्म में अमिताभ के साथ धर्मेंद्र भी थे, धर्मेंद्र ही लीड रोल में थे. फिल्म के क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग के समय सेट पर जब असरानी सूट पहनकर पहुंचे और धर्मेंद्र ड्राइवर की ड्रेस में तो दोनों को ही नहीं पता था कि उन्हें क्या करना है और ना ये पता था कि सीन क्या है, जैसा कि हृषि दा की आदत थी. धर्मेंद्र ने असरानी से पूछा कि ये सब क्या चल रहा है, तुझे सूट कैसे मिला और मुझे ड्राइवर की ड्रेस?
चिल्लाकर कही थे ये बात
दरअसल पहले जब असरानी ने उनसे और लेखक राही मासूम रजा से सीन के बारे में पूछा तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया और मिडिल क्लास बेस्ड फिल्में बनाने वाले ह्रषि दा की फिल्मों में सूट देखकर सबका चौंकना लाजिमी था. ह्रषि दा इसके लिए तैयार थे. जब धर्मेंद्र ने मुखर्जी के असरानी को सूट देने पर आश्चर्य जताया तो वह समझ गए कि धर्मेंद्र क्यों परेशान हैं. असरानी ने पूरे वाकए को बाद में एक इंटरव्यू में बताया था, असरानी के मुताबिक, ‘ह्रषि दा ने दूर से ही चिल्लाकर बोला, ‘ए धरम.. तुम असरानी से क्या पूछ रहे हो? सीन के बारे में ना? अगर तुम्हारे अंदर स्टोरी का कोई सेंस होता तो तुम हीरो बनते क्या?’ धर्मेंद्र के मुंह से आवाज भी नहीं निकली, मानो सांप सूंघ गया, वो तो ये सोचकर हैरान थे कि क्या ह्रषि दा ने वाकई में उनकी बात भी सुन ली?
हृषिकेश मुखर्जी ने अमिताभ और जया को कई फिल्मों में मौका दिया. अमिताभ की उनके साथ वाली फिल्में थीं, ‘आनंद’, ‘गुड्डी’, ‘बावर्ची’, ‘नमक हराम’, ‘मिली’, ‘चुपके चुपके’, ‘गोलमाल’, ‘जुर्माना’ और ‘बेमिसाल’. ‘अभिमान’ तो जया और अमिताभ के अपने होम प्रोडक्शन की मूवी थी, बाद में प्रकाश मेहरा के कहने पर हृषि दा ने अमिताभ मूवी ‘कुली’ भी एडिट की थी.