विस्थापित ग्रामों के बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार देने की मांग : किसान सभा ने एसईसीएल को दी खदान बंदी की चेतावनी

कोरबा. कोरबा जिले में एसईसीएल की कोयला खनन परियोजनाओं से विस्थापितों के लिए रोजगार की मांग इस क्षेत्र की एक प्रमुख मांग के रूप में उभर रही है, क्योंकि अपनी जमीन से हाथ धो चुके परिवार आजीविका के साधनों के अभाव में बेरोजगारी का दंश सहने पर मजबूर है। इन विस्थापित परिवारों से एसईसीएल ने रोजगार देने का वादा किया था, जिस पर उसने आज तक अमल नहीं किया है। अब किसान सभा की अगुआई में प्रभावित गांवों के बेरोजगारों ने काम उपलब्ध कराने, अन्यथा गेवरा खदान बंदी की चेतावनी प्रबंधन को दे दी है।
इस आशय का ज्ञापन आज छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेताओं ने एसईसीएल के गेवरा कार्मिक प्रबंधक एस परीडा को सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में माकपा पार्षद राजकुमारी कंवर, जवाहर सिंह कंवर, प्रशांत झा, दीपक साहू, जय कौशिक, देव कुंवर, वनवासा, शशि, गणेश कुंवर, आशीष यादव, गुलशन दास, अमृत यादव, नरेश कुमार, संजय यादव, पुरषोत्तम, राय सिंह, सुरेंद्र, विनोद कुमार, मोहिंद्रा, रविन्द्र, चिंता, फेकू आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, सचिव प्रशांत झा, दीपक साहू, जय कौशिक आदि ने मांग की है कि प्राथमिकता के साथ एसईसीएल के अधीनस्थ कार्य कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों में 100% कार्य विस्थापित बेरोजगारों को उपलब्ध कराया जाए। उनका आरोप है कि विस्थापन प्रभावित गांव के बेरोजगारों को रोजगार  उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जबकि उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की नैतिक जिम्मेदारी एसईसीएल की है। एसईसीएल प्रबंधन के इस असंवेदनशील रवैये के खिलाफ उन्हें खदान बंदी आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा।

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