तीसरे दिन भी ईडी का छापा जारी, जिला कलेक्टर कार्यालय में पसरा सन्नाटा
रायगढ़. ईडी के छापे का आज शानदार तीसरा दिन है, पहले दिन ईडी की बडी टीम ने रायपुर, कोरबा, महासमुंद के अलावा अन्य जगह तीन आईएएस अधिकारी व कुछ कोल व्यापारियों के यहां छापे मारे थे। जिनमंे रायगढ़ की कलेक्टर रानू साहू का नाम भी शामिल था।
पहले दिन जब ईडी की टीम सुबह पांच बजे उनके सरकारी बंगले पहुंची तो मैडम आउट आॅफ स्टेशन थी। इसमें अफवाह यह फैलाई गई कि उन्हें ईडी के आने की जानकारी पहले से थी इसलिये वे फरार हो गई थी। उनके इस फरार होनें की अफवाहों पर विराम तब लगा जब दो दिन पहले कलेक्टर रानू साहू ने अपने मातहत एक अधिकारी के माध्यम से ईडी को लिखे एक पत्र को अपने कुछ खास पत्रकारों को भेजा जो बाद में सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इस पत्र के पीछे उनका इरादा कुछ और था और एक तीर दो शिकार की तर्ज पर उन्होंने मीडिया तथा जनता को यह बताने की कोशिश की कि वह ईडी के जांच में सहयोग दे रही है न कि वे फरार है। इस पत्र को उनके मातहत कर्मचारी ने जिस सरकार लेटर पैड पर लिखे बातों को सार्वजनिक किया उससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि मैडल का यह पत्र जान बूझकर सोशल मीडिया में वायरल कराया गया था। एक अन्य जानकारी के अनुसार दो दिन तक रायगढ़ से गायब रहने की कथित अफवाहों पर विराम लगाने के बाद कल जब कलेक्टर रानू साहू अपने कार्यालय 12 बजे पहुंची तब देर शाम साढ़े 6 बजे तक अपने चेंबर में ही रही और कुछ अधिकारियों से चर्चा करके काम काज भी निपटाये उसके बाद मीडिया से छुपते-छुपाते वे वापस निकल गई। बताया यह जाता है कि उनका सरकारी बंगला सील होनंे के चलते रानू साहू दो दिन से कलेक्टर बंगले की बजाये सर्किट हाउस रूकी हुई है जहां आज सुबह 6 बजे के बाद से फिर से सरकारी काम काज के नाम से निकल गई है। एक अन्य जानकारी के अनुसार ईडी की यह टीम बीते 24 घंटे से खनिज विभाग में दस्तावेजों को खंगाल रही है और वहां कुछ महत्वपूर्ण फाईल भी उनके हाथ लग चुकी है।
छापे के दौर में ग्रामीण जनता हुई परेशान
ईडी के छापे व कथित पूछताछ के कारण रायगढ़ जिला कलेक्टर कार्यालय में बीते तीन दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है और वहां सरकारी काम काज लगभग ठप्प हो गया है। वहां आने वाले दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के ग्रामीण अपनी छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर कलेक्टर से गुहार लगाने के लिये भटक रहे हैं और कलेक्टर के नही रहने के चलते न तो एसडीएम अपने कार्यालय में है और न ही अतिरिक्त कलेक्टर और न ही खाद्य अधिकारी के अलावा जिम्मेदार अधिकारी कुर्सियों में नही बैठ रहे। ईडी की कार्रवाई का लाभ उठाते हुए जिला कलेक्टेªट में कामकाज ठप्प होनें के कारण वहां अधिकारी अपनी मर्जी से आ जा रहे हैं और जनता अपनी समस्या को लेकर भटक रही है।
क्या होगा जांच के बाद
कथित कोयला में अवैध वसूली व डीएमएफ फंड में गड़बडी में हो रही जांच में आखिर क्या सामने आयेगा यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन रायगढ़ जिले में बीते दो साल के भीतर कोयला परिवहन में वसूले गए कथित वसूली एवं डीएमएफ की बंदरबांद से यह बात साफ हो जाती है कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में ईडी की धमक यूं ही नही हुई है।