Farmers Protest : सिंघु बॉर्डर पर किसानों की भूख हड़ताल आज, केजरीवाल भी करेंगे उपवास


नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 19 दिनों से दिल्ली-हरियाणा सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर धरना दे रहे हजारों किसानों ने अपना आंदोलन (Farmers Protest) तेज करने का ऐलान किया है. इसी क्रम में आज यानी सोमवार को किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर भूख हड़ताल (Hunger Strike) करेंगे. इस दौरान देश की राजधानी दिल्ली के सीएम ने भी किसानों का समर्थन करते हुए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है.

किसानों के साथ खड़ी है AAP
सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी कार्यकताओं को संबोधित करते हुए किसानों की इन मांगों के समर्थन में उपवास रखने की अपील की है. जिसके बाद आप सरकार में मंत्री गोपाल राय ने बताया कि पार्टी के सभी पदाधिकारी, विधायक और पार्षद सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक ITO स्थित पार्टी कार्यालय पर सामूहिक उपवास करेंगे. आम आदमी पार्टी किसानों की मांगों के समर्थन में पूरी तरह से किसानों के साथ खड़ी है.’

आंदोलन तेज करेंगे किसान, कानून में संशोधन मंजूर नहीं
बताते चलें कि कानून रद्द कराने को लेकर किसानों के तेवर अभी भी तल्ख हैं बीते शुक्रवार को उन्होंने कहा कि हम आंदोलन को कानून रद्द होने तक जारी रखेंगे. गांव से लोग चल पड़े हैं. हम आंदोलन को और बड़ा करेंगे. सरकार भले ही फूट डालने की कोशिश करती रहे. बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर दे. लेकिन हम उसे तोड़ देंगे. हमने सरकार से साफ कह दिया है. कानून रद्द करना होगा. संसोधन मंजूर नहीं.

4 लेयर प्रोटेक्शन में तबदील हुई दिल्ली की सुरक्षा
किसानों के आंदोलन तेज करने के ऐलान के मद्देनजर देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) के सिंघु बॉर्डर पर पुलिस (Delhi Police) ने सुरक्षा को बढ़ाते हुए सीमेंट बैरिकेड पर जंजीर के साथ ताले लगा दिए हैं. जिससे बैरिकेड को हटाया या तोड़ा न जा सके. बता दें कि पुलिस ने सुरक्षा के तौर पर पहले मिट्टी से भरे डंपर, बैरिकेड और फिर सीमेंट के बैरिकेड लगा रखे हैं. इतना ही नहीं, इस थ्री लेयर प्रोटेक्शन के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और बीएसएफ के जवानों की तैनाती की गई है.

पिछले 5 दौर की वार्ता रही बेनतीजा, अगली बैठक से उम्मीद
बता दें कि केंद्र सरकार और 40 किसान संघों के प्रतिनिधियों के बीच पहले हुई पांच दौर की वार्ता बेनतीजा रही थीं. कृषि कानूनों के कुछ प्रावधानों में संशोधन के लिए सरकार के मसौदा प्रस्ताव को किसान नेताओं द्वारा खारिज किए जाने और बैठक में हिस्सा लेने से इनकार करने के बाद छठे दौर की बातचीत नहीं हुई थी. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह किसी भी समय चर्चा के लिए तैयार है. जबकि किसान संघों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे बातचीत के लिए तभी आएंगे जब कानून निरस्त होंगे.

जल्द होगी किसानों के साथ अगले दौर की वार्ता
केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने रविवार को बयान दिया है कि सरकार जल्द ही एक तारीख तय कर किसान संघ के नेताओं को अगले दौर की वार्ता के लिए बुलाएगी. चौधरी ने आगे कहा कि गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार ‘कोई समाधान’ तलाश लेगी. हमें पूरा भरोसा है. अगली बैठक में, यह मुद्दा सुलझ जाएगा.’ कृषि राज्य मंत्री चौधरी ने कहा कि वरिष्ठ मंत्री अमित शाह और नरेंद्र सिंह तोमर इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं.

किसान आंदोलन पर क्या कहता है इंडिया?–

1. मध्य प्रदेश
किसान कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन चल रहा है, किसान मध्य प्रदेश में भी हैं, लेकिन वो धरना प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, क्या मध्य प्रदेश के किसान नए कानून का समर्थन कर रहे हैं?

2. बिहार
बिहार के किसानों को नए कानूनों में कोई कमी नहीं दिखती क्योंकि वो कानून के विरोध में नहीं हैं, बिहार के किसानों पर आपका क्या कहना है, उन्हें किसान कानून का विरोध करना चाहिए या नहीं?

3. उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, देश में किसान कानूनों का विरोध हो रहा है, उत्तर प्रदेश के किसान विरोध आंदोलन में शामिल नहीं हैं, किसानों का विरोध क्या वाकई किसानों का विरोध है या राजनीति है?
4. हरियाणा
हरियाणा के एक किसान संगठन ने सरकार को किसान कानून के समर्थन में पत्र लिखा है, आपका क्या कहना है?

5. पंजाब
पंजाब के किसान कानून को वापस लेने में अड़े हैं, कल भूख हड़ताल की बात कह रहे हैं और सरकार संशोधन की बात कह रही है, आपको क्या लगता है, किसानों के आंदोलन से कोई बात बनेगी?

6. महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के किसान आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा नहीं ले रहे हैं जबकि महाराष्ट्र के नेताओं का किसान आंदोलन को समर्थन मिल रहा है, क्या महाराष्ट्र के किसान नए कानूनों से संतुष्ट हैं?

7. दिल्ली NCR
किसान आंदोलन की वजह से दिल्ली NCR में रह रहे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है, किसान आंदोलन पर आप का क्या कहना है?

8. राजस्थान
राजस्थान के किसान आंदोलन में शामिल नहीं हुए, ऐसा क्यों? क्या वो नए कानूनों के समर्थन में हैं?

9. कहीं से भी
एक भारतीय नागरिक की तरह किसान आंदोलन पर आपका क्या नजरिया है?

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