लोक कलाकारों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन


बिलासपुर/अनिश गंधर्व. आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे लोक कलाकारों ने शासन से मांग की है कि उन्हें मंचीय कार्यक्रम की अनुमति दी जाये ताकि वे कुछ काम कर सके। एक ओर जहां शासन प्रशासन द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है तो दूसरी ओर लोक कलाकारों को मंचीय कार्यक्रम प्रस्तुत करने की छूट अभी तक शासन ने नहीं दी है। दो वर्षों के कारोनाकाल के दौरान लोक कलाकार आत्महत्या करने को विवश हुए हैं वहीं कुछ तो अपना वाद्ययंत्र के तक बेचने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के सदस्य आज कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इन लोक कलाकारों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि प्रदेश में बड़े-बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है जबकि लोक कलाकार मंच के माध्यम से अपनी प्रस्तुति देकर आय अर्जित करते हैं। गणेश उत्सव, दुर्गा उत्सव, दशहरा, दीवाली व अन्य अवसरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी तरह लोक कलाकारों को सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने की छूट से संबंधित आदेश जारी नहीं किये गये हैं जिसके चलते इन कलाकारों को जीविका चलाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अपनी मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए कलाकारों ने कहा कि सोशल डिस्टेन्स का पालन करते हुए, कार्यक्रम स्थल पर सेनेटाइजर, मास्क उपलब्ध हो। इसी तरह कम से कम दो हजार की संख्या में दर्शकों को अनुमति आदेश दी जाये। इसी तरह शासन द्वारा आयोजित होने वाले सांस्कृति कार्यक्रमों में स्थानीय लोक कलाकारों को प्रस्तुति का अवसर प्रदान की जाये ताकि आर्थिक स्तर पर सहायता मिल सके। ज्ञापन सौंपने आये लोक कलाकारों में विशेष रूप से रूप सिंह, प्रभात पाण्डेय, मनीशंकर जांगड़े, रामपाल मधुकर, चैतराम टंडन, पल्लवी महिलांगे, चंदन यादव, लालजी श्रीवास, गनपत दास, रामाधार यादव, संजय सिंह, अमर सिंह, सुखीराम खरे आदि उपस्थि थे।

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