मुंबई में पहली बार 64 आत्माओं का सामूहिक जैन दीक्षा महोत्सव

महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार ‘संयमरंग’ की विराट आध्यात्मिक गाथा
मुंबई (अनिल बेदाग) :  जो अब तक मायानगरी, सपनों और तेज़ रफ्तार ज़िंदगी के लिए जानी जाती थी, अब एक ऐसे आध्यात्मिक अध्याय की साक्षी बनने जा रही है, जो न सिर्फ़ जैन समाज बल्कि महाराष्ट्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा। बोरीवली वेस्ट के चीकुवाड़ी क्षेत्र में पहली बार इतने विराट स्तर पर आयोजित होने जा रहा जैन दीक्षा महोत्सव 2026-‘संयमरंग उत्सव’, जहाँ 8 फरवरी 2026 को एक ही मंडप में 18 पुरुष और 46 महिला दीक्षार्थी सामूहिक रूप से सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम का व्रत ग्रहण करेंगे। यह दृश्य आस्था, साहस और आत्मिक जागरण का ऐसा संगम होगा, जिसे देखने-सुनने मात्र से हृदय श्रद्धा से भर उठेगा।
4 फरवरी से 8 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस पाँच दिवसीय महोत्सव के लिए 2,50,000 वर्ग फुट क्षेत्र में एक भव्य आध्यात्मिक नगरी का निर्माण किया गया है। पूरा परिसर त्याग, तप, संयम और जैन मूल्यों की अनुभूति कराएगा—मानो नगर नहीं, कोई जीवंत साधना-लोक हो।
यह ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव वरिष्ठ आचार्य भगवंत गच्छाधिपति पूज्य सोमसुंदरसूरिजी महाराज साहेब सहित अनेक पूज्य आचार्य भगवंतों की उपस्थिति में संपन्न होगा। दीक्षा संस्कार पूज्य योगतिलकसूरिजी महाराज साहेब के मार्गदर्शन में, पूज्य शांतिचंद्रसूरि समुदाय की परंपरा अनुसार सम्पन्न होगा।
इस दौरान 800 से अधिक साधु-साध्वी भगवंतों की पावन उपस्थिति पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी।
हर शाम देरासर परिसर 1,000 से अधिक दीपों से प्रकाशित होगा, जिससे पूरा क्षेत्र दीपावली जैसी दिव्यता से जगमगाएगा। देश के प्रसिद्ध भक्ति संगीतकार मनन संघवी, शिवम सिंह, सनी शाह सहित 12 संगीत टीमों द्वारा भावपूर्ण भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।
इस दीक्षा महोत्सव की सबसे प्रेरणादायक विशेषता है—9 वर्ष की अल्पायु से लेकर 72 वर्ष के वृद्ध तक दीक्षार्थियों की सहभागिता।
तीन संपूर्ण परिवार और चार दंपति (पति-पत्नी) एक साथ संसार त्याग कर दीक्षा ग्रहण करेंगे। भारत के नौ राज्यों और शहरों के साथ-साथ यूएसए से भी दो दीक्षार्थी इस महोत्सव में शामिल हो रहे हैं, जो जैन धर्म की वैश्विक आध्यात्मिक पहुँच को दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में इसी चीकुवाड़ी क्षेत्र में 44 सामूहिक दीक्षा आयोजित हुई थी, और पिछले 10 वर्षों में 350 से अधिक दीक्षाएँ पूज्य योगतिलकसूरिजी महाराज साहेब की निश्रा में संपन्न हुई हैं। वर्ष 2026, पूज्य शांतिचंद्रसूरिजी महाराज साहेब की दीक्षा शताब्दी का वर्ष भी है, जो इस महोत्सव को और अधिक ऐतिहासिक बनाता है।

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