न्याय योजना में सीमांत किसानों को भी शामिल करें सरकार : किसान सभा

रायपुर. अ. भा. किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा ने ग्रामीण भूमिहीन परिवारों के लिए बनाई गई ‘न्याय योजना’ में सीमांत किसानों को भी शामिल करने की मांग की है। आज यहां जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते तथा महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा है कि भूमिहीन ग्रामीण परिवारों के लिए ‘न्याय योजना’ में पात्रता की जो शर्तें रखी गई है, उसमें संपूर्ण कृषि भूमिहीनता के नाम पर सीमांत किसानों को इस योजना के दायरे से बाहर रखने से इस योजना के औचित्य पर ही प्रश्न चिन्ह लग जाता है। इससे 18 लाख ग्रामीण परिवारों को सरकार की मदद मिलने का दावा भी संदेह के घेरे में है।

उन्होंने कहा है कि प्रदेश में 30 लाख सीमांत किसान परिवार है। इनमें से 22 लाख किसान परिवारों के पास एक एकड़ से भी कम कृषि भूमि है और इनका गुजारा खेतों और मनरेगा में मजदूरी करके, वनोपज संग्रहण और अन्य शारीरिक श्रम के जरिये ही होता है। सरकारी सर्वे के अनुसार, यही वह तबका है, जो जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य का भी लाभ नहीं मिलता और पलायन का शिकार भी होता है। लगभग भूमिहीनता से ग्रस्त यह तबका योजना के लिए पात्रता की सभी शर्तें पूरी करता है। किसान सभा नेताओं ने कहा है कि कृषि अर्थशास्त्र में भी इन अति-सीमांत किसान परिवारों को भूमिहीन किसानों की श्रेणी में ही रखा जाता है, इसलिए इस तबके को ‘न्याय योजना’ के दायरे से बाहर रखने से पूरी योजना की उपादेयता और औचित्य पर ही प्रश्न चिन्ह लग जाता है। किसान सभा नेताओं ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए मात्र 200 करोड़ रुपये आबंटित करने को भी अपर्याप्त बताया है और कहा है कि इससे केवल 3.33 लाख ग्रामीण भूमिहीन परिवारों को ही मदद दी जा सकेगी, जबकि इस योजना के संपूर्ण क्रियान्वयन के लिए कम-से-कम 1000 करोड़ रुपयों की जरूरत है।

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