‘Infantry day’ पर पढ़िए देश के पहले मिलिट्री ऑपरेशन की कहानी


नई दिल्ली.आज इंफेंट्री दिवस है. देश में आज बड़ी धूमधाम से ‘पैदल सेना दिवस’ मनाया गया. दुनिया की सबसे बड़ी इंफेंट्री डिविजन (Infantry divison) भारत में है. आज ही के दिन 1947 में जम्मू-कश्मीर को कबायलियों और पाकिस्तान की सेना से बचाने के लिए भारतीय सेना की पहली टुकड़ी श्रीनगर पहुंची थी. ये सभी सिख रेजीमेंट की पहली बटालियन के सैनिक थे जो भारतीय सेना की एक इंफेंट्री रेजिमेंट है. इंफेंट्री का अर्थ है पैदल सेना.

सबसे बड़ी पैदल सेना
भारतीय सेना में कुल 380 इंफेंट्री बटालियन और 63 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन हैं. इस हिसाब से इंफेंट्री की तादाद भारतीय सेना में सबसे ज्यादा है. इंफेंट्री में अलग-अलग रेजिमेंट्स हैं जैसे राजपूत रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट, जाट रेजिमेंट, ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट. इनमें से कई रेजिमेंट्स तो 250 साल से ज्यादा पुरानी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इंफेंट्री दिवस (Infantry Day) के अवसर पर सभी जवानों को बधाई दी है.

पाकिस्तान की करतूत
भारत की आज़ादी के बाद से ही पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर कब्ज़े की कोशिश शुरू कर दी थी. 22 अक्टूबर को पाकिस्तान की सरकार और सेना ने कबायलियों को कश्मीर पर कब्ज़ा करने के लिए भेजा. इन्हें पाकिस्तान की सेना ने हथियार दिए और ट्रेनिंग दी. कबायलियों ने मुज़फ्फराबाद से होकर उड़ी और बारामुला पर अगले चार दिन में कब्जा कर लिया. उन्होंने कश्मीरियों पर बहुत जुल्म किए, हजारों लोगों को मार डाला और सैकड़ों महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, उनकी संपत्ति लूटने के बाद उनके घर जला दिए. कबायली श्नीनगर से केवल 4 मील दूर थे.

सेना का पहला सैन्य अभियान
26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय को मंजूरी दे दी. इसके अगले ही दिन यानि 27 अक्टूबर को भारतीय सेना श्रीनगर पहुंचनी शुरू हो गई. 27 अक्टूबर 1947 को सुबह श्रीनगर एयरपोर्ट पर लैंड करने वाली पहली टुकड़ी सिख रेजीमेंट की थी. ये रेजीमेंट गुरुग्राम में शरणार्थियों की सुरक्षा में लगी हुई थी जब उसे अगली सुबह कश्मीर जाने का हुक्म दिया गया. बटालियन के कमांडिंग अफसर ले. कर्नल दीवान रंजीत राय थे जिन्होंने रात में ही पूरी बटालियन मोर्चे पर जाने के लिए तैयार कर दी. अगली सुबह 30 डकोटा विमानों के जरिए ये बटालियन श्रीनगर रवाना हुई थी.

पहले महावीर चक्र विजेता कर्नल राय 
कर्नल रंजीत राय ने तुरंत श्रीनगर एयरपोर्ट की घेरेबंदी की ताकि भारतीय सेना को सुरक्षित लैंडिंग कराना जारी रहे. इसके बाद उन्होंने श्रीनगर से बारामुला की तरफ बढ़ना शुरू किया जहां कबायली मौजूद थे. कबायली लड़ाकों की तादाद बहुत ज्यादा थी और भारतीय सेना के जवान संख्या में उनसे कहीं कम थे, लेकिन कर्नल राय के नेतृत्व में सिख रेजीमेंट ने बहुत बहादुरी से उनका मुकाबला किया और उन्हें पीछे धकेलना शुरू कर दिया. अगले दिन बारामुला के पास पट्टन में कर्नल राय कबायलियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन तब तक भारतीय सेना के पांव श्रीनगर में जम गए थे और कबायलियो को पीछे धकेलना शुरू हो गया था. उन्हें भारत के पहले महावीर चक्र से सम्मानित किया गया.

‘कुमाऊं रेजिमेंट दिवस’
आज कुमाऊं रेजिमेंट दिवस भी है. कुमाऊं रेजिमेंट भी एक इंफेंट्री रेजिमेंट है जिसे 1945 में आज ही के दिन अपना नाम यानी कुमाऊं रेजिमेंट मिला था. इससे पहले ये 19 वीं हैदराबाद रेजिमेंट कहलाती थी. कुमाऊं रेजिमेंट का भी कश्मीर को कबायलियों से बचाने में बड़ा योगदान है. गौरतलब है कि कुमाऊं रेजिमेंट को श्रीनगर एयरपोर्ट की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था. यहां कबायलियों के हमले का खतरा था और अगर एयरपोर्ट उनके हाथ चला जाता तो भारतीय सेना के लिए कश्मीर पहुंचने का रास्ता भी बंद हो जाता. आदेश के तहत कुमाऊं रेजिमेंट की एक कंपनी 3 नवंबर को एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए बडगाम की तरफ रवाना हुई थी.

परमवीर चक्र विजेता
इस कंपनी का नेतृत्व मेजर सोमनाथ शर्मा कर रहे थे. दोपहर के बाद मेजर शर्मा की कंपनी का सामना 700 कबायलियों के बड़े गिरोह से हुआ जो तादाद में उनसे 7 गुना था. मेजर शर्मा अपनी कंपनी का हौसला बढ़ाते रहे यहां तक कि वो खुद मशीनगन से कबायलियों पर गोलियां बरसाते रहे. इसी बीच मोर्टार का एक गोला उनके पास गिरा और वो वीरगति को प्राप्त हो गए. ब्रिगेड हेडक्वार्टर को उनका आखिरी संदेश ये था कि ‘दुश्मन हमसे 50 गज दूर है और हमसे बहुत ज्यादा तादाद में है. लेकिन मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा और आखिरी जवान, आखिरी गोली तक लडूगा. मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरांत भारत का पहला परमवीर चक्र दिया गया जो वीरता का सर्वोच्च सम्मान है.

सीमा पर आज की स्थिति
भारतीय सेना को चीन की सेना के सामने पूर्वी लद्दाख में डटे हुए 6 महीने होने वाले हैं. यहां लगभग 50000 भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों के आगे दीवार बनकर खड़े हैं. इनमें से बड़ी तादाद इंफेंट्री सैनिकों की है. सर्दियों की शुरुआत में ही पूर्वी लद्दाख का तापमान शून्य से नीचे जा चुका है. आने वाले दिनों में ये पारा शून्य से 40 डिग्री तक नीचे चला जाएगा. लेकिन तब भी ये सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) की रक्षा करने के लिए यहीं तैनात रहेंगे. आज इंफेंट्री दिवस पर इन सैनिकों को हमारा भी सलाम.

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