प्रादेशिक योग सम्मलेन सामूहिक योग साधना योग रत्न सम्मान समारोह के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जायेगा

भोपाल. आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र स्वर्ण जयंती पार्क कोलार रोड़ भोपाल के योग गुरु महेश अग्रवाल ने बताया की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 19 जून रविवार को प्रातः 6 बजे 9 बजे तक  सामूहिक ॐ के उच्चारण के साथ शुरुआत करते हुए सबके मंगलमय स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए मनाया जायेगा इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रदेश स्तर से आयें हुए सम्मानीय योगाचार्य,  क्षेत्रीय रहवासी समितियों, सामाजिक संस्थाओ,व्यावसायिक संगठनों आदि के पदाधिकारियों , खेलकूद संगठनों के खिलाड़ियों , स्कूलों के होनहार बच्चों का सम्मान योग रत्न के रुप में किया जायेगा निरंतर योग करने का संकल्प एवं राष्ट्रगान किया जायेगा।
योग गुरु महेश अग्रवाल ने इस अवसर पर बताया कि योग शब्द अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यह संस्कृत की युज् धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है जोड़ना या एक करने की क्रिया । योग का अर्थ है जुड़ना, एकात्मता। सबके सुख-दुःख से जुड़ें। अपने हृदय को उदार बनायें और जीवन की क्षुद्रताओं से ऊपर उठें। योग को यदि इस अर्थ में लें तो यह व्यक्तिपरक नहीं रह जाता। जैसे, माता और सन्तान में भावनात्मक एकात्मता रहती है उसी प्रकार अपने परिवेश के साथ भावनात्मक एकात्मता विकसित करें।
योग शारीरिक और मानसिक उत्थान के लिए है, दुःखी मानवता के लिए यह मनोदैहिक चिकित्सा पद्धति के रूप में एक आशीष है, वरदान है। सत्य के खोजियों के लिए ईश्वरानुभूति की सीधी राह है। वस्तुत: योग पूर्णता की योजना है। आप इसे एक कार्यक्रम, एक विधि या एक दर्शन के रूप में ले सकते हैं। निश्चित लक्ष्यों एवं ध्येयों के साथ जब यह आन्दोलन का रूप ग्रहण करता है, तब यह एक कार्यक्रम है। यह एक विधि इस अर्थ में है कि योग के अभ्यास शुद्ध एवं सुव्यवस्थित हैं। मनुष्य की आध्यात्मिक दिशा जो भी हो, ध्यान तथा अन्य अभ्यास सदा ही उपयोगी हैं। आत्म-साक्षात्कार की कुछ विधियाँ सारे विश्व में मान्य एवं साध्य हैं। अतः योग एक सार्वभौम नुस्खा है। और वस्तुतः आत्म-साक्षात्कार का राजमार्ग है।
लोग बड़े ऊँचे संकल्प करते हैं, आत्म-साक्षात्कार चाहते हैं, उच्चादर्शों का पालन करना चाहते हैं। परन्तु इसमें एक ही अड़चन है, उनमें संकल्पशक्ति का अभाव है। संकल्प शक्ति के अभाव में न भौतिक उन्नति सम्भव है और न आध्यात्मिक। दुहरे व्यक्तित्व का विकास न करें-बाहर में लोगों के सामने संकल्प शक्ति का प्रदर्शन और एकांत में अपने दोषपूर्ण कर्मों में लिप्त रहना वास्तविकता और आदर्श का द्वन्द्व । क्या आपको सुखी और सामंजस्यपूर्ण जीवन अच्छा लगता है? क्या आप अपने दैनिक कार्य-कलापों में उत्साह से भरे रहते हैं? जब प्रतिकूल परिस्थितियाँ आपको झकझोर देती हैं, तब क्या आप शान्त मन और सहज भाव से अपना सिर ऊँचा रख पाते हैं? यदि नहीं, तो फिर योग की शरण में आइये।

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