पत्रकार प्रदीप आर्य की मौत का मामला : आरबी अस्पताल प्रबंधन पर उठ रही कार्रवाई मांग

बिलासपुर. कोरोना पीड़ित मरीजों के उपचार में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है । भेड़ बकरियों की तरह मरीजों रखा जा रहा है । उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया जा रहा है। लोग अपने घरों में रहकर अच्छा उपचार कर सकते है, अस्पताल में जिन लोगो ने दम तोड़ा है उनके परिजन बहुत पछता रहे हैं। जिले में बेहतर इलाज का दावा करने वाले आर बी अस्पताल प्रबंधन का काला चेहरा सामने आया है। वरिष्ठ पत्रकार स्व प्रदीप आर्य को सिम्स के दलालों ने आर बी अस्पताल का रास्त दिखा दिया। आनन फ़ानन में परिजनों ने दाखिल करा दिया । यहां खाली आक्सीजन सिलेंडर को सांस लेने के लिए तड़प रहे पत्रकार प्रदीप आर्य को लगाकर परिजनों गुमराह किया जाता रहा। बार बार शिकायत के बाद भी किसी एक नही सुनी। परिणाम स्वरूप प्रदीप आर्य की दम घुटने से मौत हो गई । पैसे कमाने के फेर में आर बी अस्पताल प्रबंधन ने ना जाने कितने लोगों को मौत के नींद सुला दी है। यह जांच का विषय है।
पत्रकार प्रदीप आर्य के मौत मामले को दबाने का पूरा प्रयास अस्पताल प्रबंधन द्वारा किया गया लेकिन परिजनों ने सारी सच्चाई सामने लाकर रख दी है। शहर के पत्रकारों में भारी रोष है। लेकिन ठीक समय में  लॉक डाउन  लगा दिया गया है। पत्रकार आर बी अस्पताल के खिलाफ आन्दोलन करेंगे। मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। दोषी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा। लॉक  डाउन के चलते पत्रकार घर से बाहर नही निकल पा रहे हैं।  पत्रकार प्रदीप आर्य के मौत जिम्मेदार लोगों को बख्शा नही जाएगा। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बहुत बुरा है, उपचार के अभाव में कई लोगों की मौत हो रही है। वेक्सीन तक उपलब्ध नहीं हैं। लोगों टिका लगाने अस्पताल में बुलाने के बाद घण्टों बिठाया गया। बिना टिका लगाये सैकड़ों लोगों को लौटना पड़ा। हालात बिगड़ रहे हैं। उचित उपचार के अभाव में लोगों की मौत हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी निजी अस्पताल संचालकों के हाथों कठपुतली की तरह नाच रहे है।

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