निजी लाइब्रेरी संचालकों पर टूटा मुसीबतों का पहाड़

बिलासपुर/अनीश गंधर्व. कोरोना गाइड लाइन के चक्कर में निजी लाइब्रेरी के संचालकों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्हे आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। कलेक्टर कार्यालय में भी उनकी समस्याओं पर गौर नहीं किया जा रहा है। इन निजी लाइब्रेरी संचालकों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में एक तिहाई कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, किंतु हमारे लिए कोई व्यवस्था नहीं जा रही है। आगामी समय में प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने को है ऐसे में लाइब्रेरी संचालन पर प्रतिबंध लगाया है जिसके चलते छात्र छात्राओं को भी परेशानी होगी।
मालूम हो कि कोविड 19 संक्रमण के रोकथाम के लिए राज्य शासन ने स्कूल और लाइब्रेरी पर प्रतिबंध लगाया है। जबकि सरकारी दफ्तर और कोचिंग सेंटरों को गाइड लाइन का पालन करने की शर्त पर छूट दी गई है। सरकारी लाइब्रेरी का हाल सभी जानते है इसलिए ज्यादातर छात्र छात्राएं प्राइवेट लाइब्रेरी में जाकर अपना अध्ययन करते हैं और उन्हें शुलियत भी मिलती है।
15 दिनों से बंद पड़े लाइब्रेरी के संचालकों ने कलेक्टर कार्यालय में चंदन केसरी संवाददाता को बताया कि हम लोग प्राइवेट संस्थान चलाते हैं हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपए खर्च होता है, इस परिस्थिति में भी कुछ छूट दिया जाए ताकि हम क्रमश छात्र छात्राओं को प्रवेश दे सकें।

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