फ़िल्म समीक्षा : दिल को झकझोरती है फ़िल्म “दिल्ली कांड”

मुंबई/अनिल बेदाग़. दिल्ली में हुए रेप कांड ने पूरे देश के लोगों में एक आक्रोश भर दिया था। उस मनहूस घटना पर बेस्ड एक हिंदी फीचर फिल्म “दिल्ली कांड” 24 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। लेखक, निर्देशक और निर्माता क्रितिक कुमार की इस फिल्म में संगीत का भी अच्छा स्कोप है जिसके गाने जी म्यूज़िक द्वारा रिलीज किए गए हैं।

गैंग रेप जैसे घिनावने और जघन्य अपराध को दर्शाती इस फ़िल्म की कहानी एक बेहद सीधी सादी कॉलेज गर्ल से शुरू होती है। जो बेहद मासूम है और जिसकी आंखों में कई ख्वाब हैं, उसके दिल मे कई प्यारी ख्वाहिशें हैं। वह अपने माँ बाप की बहुत ही लाडली लडक़ी है। उसे एक नवजवान से मोहब्बत भी हो जाती है मगर एक रात उसके साथ समाज के कुछ खतरनाक हैवान ऐसा करते हैं कि उसकी जिंदगी तबाह हो जाती है। अब तक गैंग रेप केस की जांच और अदालती कार्रवाई को कई फिल्मों में दिखाया गया है लेकिन इस फिल्म में उस रात बस के अंदर क्या और कैसे हुआ था, किस तरह की दरिंदगी अपनाई गई थी। यह दिखाया गया है। हालांकि कई सीन और शॉट्स ऐसे हैं जो दिल दिमाग को विचलित कर सकते हैं। साथ ही आपको समाज के ऐसे हैवानों पर बहुत गुस्सा भी आएगा। निर्देशक क्रितिक कुमार ने एक प्रभावी फ़िल्म बनाई है।

गैंगरेप की शिकार होने वाली लड़की पर क्या बीतती है, उसके मां बाप, उसके घरवालों पर क्या गुजरती है, इन सभी पहलुओं को इसमे बखूबी दर्शाया गया है। इस फ़िल्म के जरिये यह सन्देश देने का प्रयास भी किया गया है, कि जनता को छेड़खानी, बलात्कार या महिला से छेड़छाड़ के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए। इस फ़िल्म में यह भी दर्शाया गया है कि लोग मदद करने के लिए सामने नही आते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।

फैशन परेड फिल्म्स के बैनर तले बनाई गई इस फिल्म को 21 स्ट सेंचुरी आर्ट्स ने को – प्रोड्युस किया है। एसोसिएट प्रोडयूसर स्वाति सिंह हैं। एक्ट्रेस काशवी कंचन ने इसमें गैंग रेप की शिकार लड़की का किरदार अदा किया है। उनके कई शेड्स हैं और उन्होंने बेहतर परफॉर्मेंस दी है। वीरेंद्र सक्सेना ने इस फिल्म में रेप की शिकार लड़की के पिता का किरदार किया है जबकि टीवी ऎक्ट्रेस प्रीतिका चौहान एक जर्नलिस्ट के रोल में हैं।फ़िल्म में शाहबाज बवेजा ने रेपिस्ट का किरदार किया है। संगीतकार शशांक रंजन, सिंगर्स जावेद अली, आदित्य नारायण, अंतरा मित्रा, हर्षित सक्सेना, अमन त्रिखा इत्यादि हैं। फ़िल्म एक बार देखी जा सकती है। सोशल ईशु पर बेस्ड यह एक उम्दा सिनेमा है।

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