धान खरीदी, एसआईआर, जमीन की गाईडलाईन दरों पर राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया

 

रायपुर । पत्रकारों से चर्चा करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज धान खरीदी, सर्वर समस्या और एसआईआर तथा प्रदेश में फैली प्रशासनिक अनिमियतताओं को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धान खरीदी की स्थिति जगजाहिर है, बताने की जरूरत नहीं है। पूरे प्रदेश में धान खरीदी में आ रही समस्याओं से किसान परेशान है। कई किसानों के नाम लिस्ट से कट गए है, इस कारण किसानों का धान भी नहीं लिया जा रहा। सर्वर डाउन होने से टोकन कट नहीं पा रहे, गिरदावरी की रिपोर्ट के आधार पर खरीदी हो रही जिसमें 21 क्विंटल के हिसाब से खरीदी नहीं हो पा रही। किसान डिजिटल कॉर्प सर्वे और गिरदावरी के बोगस आंकड़ों के आधार पर किए जा रहे रकबा कटौती से व्यथित है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ के बजाए मात्र 15 से 17 क्विंटल प्रति एकड़ धान ही बेच पा रहे है। धान खरीदी में बड़ी बात यह है कि एग्रीटेक पोर्टल की वजह से हजारों किसानों के धान का रकबा कट गए है। सरकार लाखों किसानों का धान नहीं खरीदेगी, आदिवासी पट्टाधारी किसानों का धान नहीं खरीदेगी. सर्वर डाउन होने से किसान टोकन नहीं कटा पा रहे हैं। सरकार की दुर्भावना से प्रदेश के किसानों के कोचियों और बिचौलियों के हाथों शोषण का शिकार होने मजबूर है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि बीएलओ बड़ी मुश्किल से फार्म जमा कर पा रहे है। उनके ऊपर इतना ज्यादा दबाव बना दिया गया है कि वो भी मानसिक रूप से परेशान है। आयोग दावा करता है कि 80 मतदान केंद्रों में एसआईआर का काम शतप्रतिशत पूरा हो गया है तो आयोग उन 80 मतदान केंद्रों की सूची सार्वजनिक कर दे जिनका एसआईआर का काम पूरा हो गया है। निर्वाचन आयोग का यह भी दावा है कि 97 प्रतिशत गणना पत्रक फार्म मतदाताओं को बांटे जा चुके है लेकिन हकीकत में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत के आसपास है, तीन चौथाई मतदाताओं के घरों तक गणना पत्रक फार्म अब तक पहुंचा ही नहीं है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि चुनाव आयोग लोगों के नाम काटने पर तुला हुआ है। केचुआ मतलब, केंद्रीय चुनाव आयोग। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केचुआ वाला बयान देकर केंद्रीय चुनाव आयोग पर कड़ा निशाना साधा है। आज तक सांप-बिच्छू के डसने से मौतें सुनी थी, क्या कभी सुना था कि, केचुआ काटने से मौत होती है। वहीं रोहिंग्या-बांग्लादेशियों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा, सरकार अब तक रोहिंग्या और बांग्ला देशियों का कोई आंकड़ा नहीं दे पाई है। यह सिर्फ राजनीतिक शोषण है, बस इससे ज्यादा कुछ नहीं है, हमने कई बार जवाब मांगा, लेकिन उनके पास कुछ नहीं है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जमीन की गाइडलाइन की दरें सरकार का तुगलकी फरमान है। सरकार ने विसंगतिपूर्ण तथा मनमाने ढंग से जमीन का रेट बढ़ा दिया है। जहां जमीन का बाजार भाव 1 लाख रू. है वहां पर गाईडलाईन 2 करोड़ कर दिया है, ऐसे में 10 लाख की जमीन पर लोग 2 करोड़ ले लेंगे तथा बैंकों के साथ बड़ा धोखा होगा। गाईडलाईन की दो बाजार भाव के अनुकूल करना था, इसमें प्रदेश को व्यापार और रोजगार दोनों प्रभावित होगा।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अभी पीएम मोदी आ रहे हैं। कई बार दौरा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तारीफ करते हैं, वो इसलिए ताकि अडानी और अंबानी को जमीन दी जाए। इनकी निगाह आदिवासी की जमीन के नीचे जमे कोयला खनिज बेचने में है। वहीं सरकारी जमीन दरों में बढ़ोतरी को चौथा मुद्दा बताते हुए कहा कि सरकार के तुगलकी आदेश का विरोध व्यापारियों ने किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का दुर्ग में घेराव हुआ है। लाखों परिवार को छीनने वाले फैसले का विरोध हो रहा है।

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