स्वस्थ मनस्थिति के समाज की जरूरत : प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल

वर्धा. लैंगिक भेदभाव को मिटाने के लिए समाज में स्वस्थ मनस्थिति का निर्माण करना जरूरी है. यह विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने व्यक्त किये. प्रो. शुक्ल विश्वविद्यालय के स्त्री अध्ययन विभाग एवं लैंगिक उत्पीड़न के विरुद्ध समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के प्रति जागरूकता : वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में अध्यक्ष के रूप में संबोधित कर रहे थे. शनिवार, 11 दिसंबर को आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में बाबासाहब भीमराव अंबेडकर सामाजिक विश्वविद्यालय, महु की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला एवं विशिष्ट वक्ता के रूप में टाटा समाज विज्ञान संस्थान की पूर्व आचार्य प्रो. विभूति पटेल, मुंबई विश्वविद्यालय की प्रो. नमिता निंबालकर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की पूर्व प्रो. डॉ. आभा त्रिवेदी, महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, सेवाग्राम की  डॉ. सुधा जैन ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार प्रकट किये. कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य स्त्री अध्ययन विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुप्रिया पाठक ने दिया. उन्होंने कार्यशाला के आयोजन की आवश्यकता और आज के संदर्भ में इसकी महत्ता पर विस्तार से अपने विचार रखे. संचालन सह आचार्य डॉ. आशा मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद सहायक आचार्य डॉ. आर. पुष्पा नामदेव ने ज्ञापित किया.

कुलपति प्रो. शुक्ल ने कहा कि लैंगिक भेदभाव की दृष्टि मनस्थिति में विकृति का परिणाम है. इसे केवल कानून से समाप्त नहीं किया जा सकता. इसके लिए व्यापक जन जागरूकता और परिवेश में स्वस्थ पर्यावरण बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव को नष्ट करने के लिए अंतर्वैयक्तिक संबंधों का वातावरण तैयार कर मर्यादाओं का समाज बनाना चाहिए. मुख्य अतिथि प्रो. आशा शुक्ला ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को लेकर कहा कि विद्यार्थी जिस समाज व्यवस्था से आते हैं उसके चलते वे अनजाने में आचरण करते हैं, हमें उनमें संवेदनशीलता बढानी चाहिए. उन्होंने अंतर्गत शिकायत समिति और यौन उत्पीड़न से संबंधित कानूनों की चर्चा करते हुए विस्तार से अपने विचार प्रकट किये. प्रो नमिता निंबालकर ने कहा कि यौन उत्पीड़न को लेकर महिलाओं और पुरुषों ने भी आवाज उठानी चाहिए.

दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता इंदिरा मिश्रा ने कहा कि महिलाओं के मानसम्मान के प्रति समाज को संवेदनशील होना पडेगा. डॉ. आभा त्रिवेदी ने कहा कि प्रलोभन के कारण भी यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती हैं, ऐसे में स्वयं सतर्क और निडर होकर प्रलोभन पर रोक लगानी चाहिए. प्रो. सुधा जैन ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षा देना मालिक का काम है. उन्होंने  महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों के विभिन्न प्रावधानों पर प्रकाश डाला. प्रो. विभूति पटेल ने कहा कि साइबर अपराधों के माध्यम से भी महिलाओं के साथ ऑनलाइन छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही है. इसके प्रति महिलाओं को जागरूक रहना चाहिए. उन्होंने बच्चों को बचपन से ही संस्कारित करने की आवश्यकता व्यक्त की. कार्यशाला में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की.

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