विश्व हिंदी दिवस पर डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में हिंदी के परिष्कृत एवं व्यावहारिक स्वरूप पर हुआ सार्थक विमर्श
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी साहित्य की भूमिका पर संगोष्ठी आयोजित
बिलासपुर. विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय के भाषा एवं साहित्य विभाग (हिंदी) द्वारा
“वैश्विक स्तर पर हिंदी साहित्य का परिष्कृत एवं व्यावहारिक स्वरूप”
विषय पर एक भव्य एवं विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य हिंदी भाषा एवं साहित्य की वैश्विक प्रासंगिकता, उसकी सांस्कृतिक चेतना तथा समकालीन व्यावहारिक उपयोगिता पर गंभीर चर्चा करना था।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलसचिव डॉ अरविंद तिवारी ने किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ तिवारी ने कहा कि हिंदी प्रशासन, शिक्षा, सूचना-प्रौद्योगिकी, मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी भूमिका निभा रही है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया, कि वे हिंदी को अपने व्यवहारिक जीवन, रोजगार और व्यावसायिक क्षेत्रों से जोड़ें, जिससे भाषा के साथ-साथ करियर के नए अवसर भी सृजित हो सकें।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रख्यात हिंदी साहित्य विद्वान डॉ. संतोष तिवारी ने हिंदी साहित्य के परिष्कृत स्वरूप, उसकी नैतिक चेतना एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य समाज को मानवीय मूल्यों की ओर अग्रसर करने का कार्य करता है। विशिष्ट अतिथि डॉ. मुरली मनोहर सिंह ने हिंदी के व्यावहारिक पक्ष पर चर्चा करते हुए शिक्षा, अनुवाद, पत्रकारिता, मीडिया, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में हिंदी की निरंतर बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर हिंदी के महत्व को बताया।
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रज्ञा शर्मा ने अत्यंत प्रभावशाली एवं सुसंगत ढंग से किया। संगोष्ठी के दौरान विषय से संबंधित विचार-विमर्श एवं प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर हिंदी विभाग के समस्त प्राध्यापकगण, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर यह संगोष्ठी हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति नई सोच, जागरूकता और प्रेरणा प्रदान करने में सफल सिद्ध हुई। इस अवसर पर हिंदी विभाग के प्रमुख डॉ. शाहिद हुसैन ने स्वागत किया।


