PM मोदी ने ‘मन की बात’ में की वीर सावरकर की निडरता की सराहना


नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को याद किया. पीएम मोदी ने कहा वीर सावरकर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए भारतीय वीरों के संघर्ष को देश की आजादी की पहली लड़ाई कहने की हिम्मत की. पीएम मोदी ने मन की बात में कही गई इस बात का वीडियो ट्वीट भी किया.

पीएम मोदी ने कहा, ‘इस मई महीने की याद एक और बात से जुड़ी है और वह है वीर सावरकर. 1857 में ये वही महीना था जब देश के वीरों ने अंग्रेजों को अपनी ताकत दिखाई थी. देश के कई हिस्सों में हमारे जवान और किसान अपनी बहादुरी दिखाते हुए अन्याय के विरोध में उठ खड़े हुए थे. दुख की बात है कि हम लंबे समय तक 1857 की घटनाओं को केवल विद्रोह या सिपाही विद्रोह कहते रहे. वास्तव में न सिर्फ उस घटना को कम करके आंका गया बल्कि वो हमारे स्वाभिमान को भी ठेस पहुंचाने का एक प्रयास भी था. ये वीर सावरकर ही थे जिन्होंने निर्भीक होकर लिखा कि 1857 में जो कुछ भी हुआ वो कोई विद्रोह नहीं था बल्कि आजादी की पहली लड़ाई थी. सावरकर सहित लंदन में इंडिया हाउस के वीरों ने इसकी वर्षगांठ बड़े धूम-धाम से मनाई.’

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, ‘ये भी अद्भुत संयोग की बात है कि जिस महीने पहला स्वाधीनता संग्राम प्रारंभ हुआ, उसी महीने वीर सावरकर जी का जन्म भी हुआ. सावरकर जी का व्यक्तित्व विशेषताओं से भरा पड़ा है. वे शस्त्र और शास्त्र दोनों के उपासक थे. आमतौर पर वीर सावरकर को उनकी बहादुरी और ब्रिटिश राज के खिलाफ उनके संघर्ष के लिए जानते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘इस सबके के अलावा वे एक ओजस्वी कवि और समाज सुधारक भी थे. जिन्होंने हमेशा सद्भावना और एकता पर बल दिया. वीर सावरकर जी के बारें में एक अद्भुत वर्णन हमारे प्रिय आदरणीय अटल बिहारी वाजपेई जी ने किया है. अटल जी ने कहा था सावरकर माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व, सावरकर माने तर्क, सावरकर माने तारण्य, सावरकर माने तीर, सावरकर माने तलवार कितना सटीक चित्रण किया था अटल जी ने. सावरकर कविता और क्रांति दोनों को साथ लेकर चले. संवेदनशील कवि होने के साथ-साथ वे साहसिक क्रांतिकारी भी थे.’

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