वर्धा. भारत की सामाजिक एवं आर्थिक शक्ति को मज़बूत करने में योगदान देकर संस्‍कृति, शिल्‍प, कला, स्‍वास्‍थ्य, सुरक्षा और विपणन की दृष्टि देनेवाली विमुक्‍त एवं घुमंतू जनजातियों के इतिहास का पुनर्लेखन और पुनर्समीक्षा करने की आवश्‍यकता है। यह विचार महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने व्‍यक्‍त किए। प्रो. शुक्‍ल