अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज पूरे देश के किसानों के साथ ही छत्तीसगढ़ के किसानों ने भी गांव-गांव में मोदी सरकार की कृषि विरोधी नीतियों के खिलाफ ताली-थाली-ढोल-नगाड़ा बजाकर अपना विरोध प्रकट किया और किसान विरोधी तीन कानूनों और बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने की
संघ-भाजपा की मोदी सरकार द्वारा बनाये गए कॉर्पोरेटपरस्त कृषि विरोधी तीन कानूनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के बीस से ज्यादा किसान संगठनों ने 25 सितम्बर को ‘छत्तीसगढ़ बंद’ का आह्वान किया है और जनता के सभी तबकों, राजनैतिक दलों और संगठनों से खेती-किसानी, खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और देश की संप्रभुता को बचाने के लिए इस आह्वान का
कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों को इस संसद सत्र में कानून का रूप दिया जा रहा है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति ने इन अध्यादेशों को कृषि विरोधी बताते हुए 25 सितम्बर को देशव्यापी प्रतिरोध आंदोलन का आह्वान किया है। यह जानकारी छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने आज यहां
केंद्र सरकार से कृषि विरोधी अध्यादेशों और पर्यावरण आंकलन मसौदे को वापस लेने, कोरोना संकट के मद्देनजर ग्रामीण गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न और नगद राशि से मदद करने, मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये रोजी देने, व्यावसायिक खनन के लिए प्रदेश के कोल ब्लॉकों की नीलामी और नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण रद्द